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बंगालियों से भेदभाव पर ममता का पैदल मार्च:कहा-BJP बंगाली बोलने वालों को परेशान कर रही; सुवेंदु बोले- ये अवैध घुसपैठियों को बचाने की कोशिश

बंगालियों से भेदभाव पर ममता का पैदल मार्च:कहा-BJP बंगाली बोलने वालों को परेशान कर रही; सुवेंदु बोले- ये अवैध घुसपैठियों को बचाने की कोशिश

कोलकाता5 घंटे पहले
CM ममता बनर्जी के पैदल मार्च में अभिषेक बनर्जी समेत पार्टी के कई बड़े नेता शामिल हुए।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को भाजपा शासित राज्यों में बंगाली बोलने वाले लोगों के साथ हो रहे कथित उत्पीड़न के खिलाफ विरोध मार्च निकाला।

ममता ने कहा कि बंगालियों के प्रति भाजपा के रवैये से मैं शर्मिंदा और निराश हूं। अब से मैंने तय किया है कि मैं बांग्ला में ज्यादा बोलूंगी। अगर आप मुझे डिटेंशन कैंप में रखना चाहते हैं तो रखें।

यह रैली कोलकाता के कॉलेज स्क्वायर से धर्मतला के दोरीना क्रॉसिंग तक निकाली गई। इसमें अभिषेक बनर्जी समेत पार्टी के कई बड़े नेता इस रैली में शामिल हुए।

कोलकाता के अलावा पार्टी ने राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में भी इसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया। यह ऐसे समय पर हो रहा है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य के दौरे पर आने वाले हैं।

कोलकाता में बारिश के बीच ममता ने पैदल मार्च निकाला।

ममता बोलीं- अब से ज्यादा से ज्यादा बांग्ला बोलूंगी

  • CM ममता ने कहा, ‘मैं आपको (बीजेपी) चैलेंज करती हूं कि साबित कीजिए कि बांग्ला बोलने वाले प्रवासी लोग रोहिंग्या मुसलमान हैं। बंगाल के 22 लाख प्रवासी श्रमिक देश के अन्य हिस्सों में काम कर रहे हैं, उनके पास वैध पहचान दस्तावेज हैं।’
  • ‘मैं बंगालियों पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं करूंगी। भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषी लोगों को बांग्लादेशी और विदेशी कहकर प्रताड़ित और जेल और डिटेंशन कैंप में भेजा जा रहा है। क्या बंगाल देश का हिस्सा नहीं है।’
  • ‘दूसरे राज्यों में बैठकर बंगाल के वोटर का नाम काटा जा रहा है। भाजपा ऐसा कर महाराष्ट्र में चुनाव जीती। अब बिहार में ऐसा कर रही है।’ उन्होंने चुनाव आयोग पर भाजपा की दलाली करने का आरोप लगाया।
रैली कोलकाता के कॉलेज स्क्वायर से धर्मतला के दोरीना क्रॉसिंग तक निकाली गई।

सुवेंदु अधिकारी बोले- ये अवैध घुसपैठियों को बचाने की कोशिश है ममता की रैली के बाद भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा, ‘बंगाली अस्मिता’ की बात सिर्फ अवैध घुसपैठियों को बचाने की कोशिश है। जब हजारों बंगाली शिक्षक सरकारी घोटालों के चलते नौकरी से निकाले गए, तब ममता ने उनकी आवाज क्यों नहीं सुनी?’

अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि ममता बनर्जी खुद बंगाली अफसरों की अनदेखी करती हैं। उन्होंने पूछा कि वरिष्ठ अफसर अत्री भट्टाचार्य और सुब्रत गुप्ता को मुख्य सचिव क्यों नहीं बनाया गया? और क्यों बंगाली आईपीएस संजय मुखोपाध्याय को डीजीपी पद से वंचित कर बाहर के अफसर को नियुक्त किया गया?

ममता ने कहा था- बांग्लादेशियों के खिलाफ अभियान NCR की बैकडोर एंट्री ममता की इस रैली को ओडिशा में कुछ अवैध बांग्लादेशियों को हिरासत में लेने, दिल्ली में बांग्लादेशियों के खिलाफ अभियान शुरू करने और असम में एक बंगाली किसान को विदेशी न्यायाधिकरण (फॉरनर्स ट्रिब्यूनल) के नोटिस दिए जाने की घटनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव एक साल बाद है। जानकारों का कहना है कि टीएमसी बंगाल में भाषा विवाद, बंगाली अस्मिता के मुद्दे को फिर से उठाना चाहती हैं। ममता ने कुछ दिन पहले चुनाव आयोग पर आरोप लगाया था कि वह भाजपा की कठपुतली की तरह काम कर रहा है। उन्होंने यह भी आशंका जताई थी कि मतदाता सूची में संशोधन कहीं एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस) को पीछे के दरवाजे से लागू करने की कोशिश तो नहीं है।

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