रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के पिता का निधन:जोधपुर में हुआ अंतिम संस्कार; पिछले कुछ दिनों से चल रहे थे बीमार
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के पिता दाऊलाल वैष्णव का मंगलवार सुबह निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। हाल ही में उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें जोधपुर एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जोधपुर एम्स के मुताबिक मंगलवार सुबह 11 बजकर 52 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। जोधपुर में मंगलवार शाम उनका अंतिम संस्कार किया गया।
वे मूलत: पाली जिले के जीवंद कला निवासी थे। बाद में परिवार के साथ जोधपुर में बस गए थे। रातानाडा भास्कर चौराहा के पास महावीर कॉलोनी में उनका घर है। वे अपने गांव में सरपंच भी रह चुके थे और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। दाऊलाल वैष्णव ने जोधपुर में एक वकील और कर सलाहकार के रूप में लंबे समय तक कार्य किया।
उनके परिवार में पत्नी सरस्वती वैष्णव, बड़े बेटे अश्विनी वैष्णव और छोटे बेटे आनंद वैष्णव हैं।
पार्थिव देह को बैठाकर निकाली अंतिम यात्रा अश्विनी वैष्णव के पिता दाऊलाल वैष्णव की पार्थिव देह को बैठाकर उनके घर से बैकुंठी (अंतिम यात्रा) निकाली गई। वैष्णव समाज में बैकुंठी निकालने की परंपरा है। अंतिम संस्कार भी पार्थिव देह को बैठाकर ही किया जाता है।
जोधपुर में नागौरी गेट कागा क्षेत्र स्थित वैष्णव समाज के श्मशान घाट में शाम को उनका अंतिम संस्कार किया गया। अश्विनी वैष्णव ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी।
अश्विनी वैष्णव के पिता के अंतिम संस्कार में कागा श्मशान घाट पर सीएम भजनलाल शर्मा और भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ भी पहुंचे।
सीएम के आने की सूचना मिली तो भरने लगे रोड के गड्ढे इस दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के भी जोधपुर पहुंचने की सूचना प्रशासन को मिली, तो दोपहर बाद प्रशासन भी हरकत में आया।
निगम, जेडीए और पीडब्ल्यूडी के अफसर भी कागा क्षेत्र की तरफ दौड़े। इस मार्ग पर जगह-जगह गड्ढे बंद करने का काम शुरू कराया।
वहीं, कागा स्थित श्मशान घाट के बाहर और भीतर भी निगम की टीम साफ-सफाई करने में जुट गई।
बेटे को चिट्ठी लिखकर कहा- हर रेल यात्री का चेहरा खिला रहे रेल मंत्री बनने के बाद 2 अक्टूबर 2021 को पहली बार अश्विनी वैष्णव जोधपुर पहुंचे थे। इस दौरान पिता-पुत्र की मुलाकात काफी कम समय के लिए हो पाई थी, तब दाऊलाल वैष्णव ने अश्विनी वैष्णव को एक चिट्ठी लिखी। उन्होंने लिखा- ‘कर्तव्य को इतनी निष्ठा से निष्पादित करो कि हर रेलयात्री का चेहरा यात्रा के दौरान फूल सा खिला रहे।’
