Headlines

उपराष्ट्रपति बोले- जस्टिस वर्मा केस में तुरंत FIR की जरूरत:कैश कहां से आया, ये जानना जरूरी; जज के घर बोरियों में अधजले नोट मिले थे

उपराष्ट्रपति बोले- जस्टिस वर्मा केस में तुरंत FIR की जरूरत:कैश कहां से आया, ये जानना जरूरी; जज के घर बोरियों में अधजले नोट मिले थे

नई दिल्ली5 घंटे पहले

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को जस्टिस वर्मा के घर में मिले अधजले नोटों के मामले में तुरंत FIR की बात कही। उन्होंने कहा- यह न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह हमारी न्यायपालिका की नींव को हिला देने वाला है।

इस मामले की जड़ तक जाने की जरूरत है। कैश कहां से आया, ये जानना बहुत जरूरी है। केंद्र स्तर पर सरकार मजबूर है, क्योंकि 90 के दशक की शुरुआत में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण जस्टिस पर FIR दर्ज नहीं की जा सकती है।

धनखड़ ने नेशनल एडवांस्ड लीगल स्टडीज (NUALS) यूनिवर्सिटी के सेमिनार में ये बातें कहीं।

दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित घर में 14 मार्च की रात आग लगी थी। उनके घर के स्टोर रूम में 500-500 रुपए के जले नोटों के बंडलों से भरे बोरे मिले थे। इसके बाद से ये सवाल खड़ा हुआ कि इतना कैश कहां से आया।

उपराष्ट्रपति धनखड़ के संबोधन की खास बातें

  • न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर चिंता जताई : “मैं न्यायपालिका की स्वतंत्रता का समर्थन करता हूं। जजों को सुरक्षा प्रदान करना जरूरी है क्योंकि वे जटिल परिस्थितियों में काम करते हैं। लेकिन जब ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, तो हमें सच का सामना करना होगा।” उन्होंने जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर मिले नकदी का हवाला दिया।
  • शेक्सपियर के नाटक से जोड़ा : उन्होंने इसे शेक्सपियर के नाटक ‘जूलियस सीजर’ से जोड़ा और 14 मार्च (जूलियस सीजर की हत्या की तारीख) को न्यायपालिका के लिए बुरा समय बताया।
  • जांच की मांग की : उन्होंने कहा, “यह नकदी कहां से आई? क्या यह काला धन है? इसका मालिक कौन है? इसकी जांच होनी चाहिए। यह एक आपराधिक कृत्य है, और इसके लिए तत्काल एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।
  • जजों के रिटायरमेंट के बाद नियुक्तियों पर सवाल उठाए: उपराष्ट्रपति ने जजों को सेवानिवृत्ति के बाद दी जाने वाली नियुक्तियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा लोक सेवा आयोग , नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी), को सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी पद नहीं मिलती। लेकिन जजों के लिए ऐसा कोई नियम नहीं है।
  • संविधान में बदलाव पर चिंता जताई : उपराष्ट्रपति ने संविधान की प्रस्तावना में आपातकाल के दौरान किए गए बदलावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “प्रस्तावना को माता-पिता की तरह समझें, जिसे बदला नहीं जा सकता। विश्व में किसी भी देश ने अपनी संविधान की प्रस्तावना में बदलाव नहीं किया।
  • शक्तियों के अलगाव पर जोर दिया : उपराष्ट्रपति ने शक्तियों के अलगाव पर जोर देते हुए कहा, “न्यायपालिका, कार्यपालिका, और विधायिका को एक-दूसरे के क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। यदि कोई संस्था दूसरे के क्षेत्र में दखल देती है, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक हो सकता है।”
14 मार्च को दिल्ली HC जज के सरकारी बंगले में आग लगी थी। वहां दमकल कर्मियों को जले हुए 500 रुपए के नोटों से भरी बोरियां मिली थीं।

14 मार्च को जज के घर मिले थे जले नोटों के बंडल

जस्टिस यशवंत वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित घर में 14 मार्च की रात आग लगी। उनके घर के स्टोर रूम जैसे कमरे में 500-500 रुपए के जले नोटों के बंडलों से भरे बोरे मिले। सवाल खड़ा हुआ कि इतना कैश कहां से आया। मामले ने तूल पकड़ा।

14 मार्च: कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने यह मामला राज्यसभा में उठाया। उन्होंने न्यायिक जवाबदेही का मसला उठाते हुए सभापति से इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज के खिलाफ महाभियोग के संबंध में लंबित नोटिस का जिक्र किया था।

22 मार्च: CJI संजीव खन्ना ने जस्टिस वर्मा पर लगे आरोपों की इंटरनल जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई थी। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट चीफ जस्टिस से जस्टिस वर्मा को कोई भी काम न सौंपने को कहा था।

22 मार्च: देर रात सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस के घर से 15 करोड़ कैश मिलने का वीडियो जारी किया। 65 सेकेंड के वीडियो में नोटों से भरी जली बोरियां दिखाई दे रही हैं। मामले के खुलासे के बाद से जस्टिस वर्मा खुद ही छुट्टी पर हैं।

21 मार्च: जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाईकोर्ट होने का प्रस्ताव बनाया गया।

जस्टिस यशवंत वर्मा इलाहाबाद हाईकोर्ट में ही बतौर जज नियुक्त हुए थे। इसके बाद अक्टूबर 2021 में उनका दिल्ली हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था। जज बनने से पहले वह इलाहाबाद हाईकोर्ट में राज्य सरकार के चीफ स्टैंडिंग काउंसिल भी रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा का भी पक्ष

रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा का पक्ष भी है, जिसमें उन्होंने कहा है कि जिस स्टोर रूम में नोटों की गड्डियां मिलने की बात की जा रही है, वहां उन्होंने या उनके परिवार ने कभी कोई पैसा नहीं रखा। वो एक ऐसी खुली जगह है, जहां हर किसी का आना-जाना होता है। उन्हें इस मामले में फंसाया जा रहा है।

दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय ने इंटरनल इन्क्वायरी के बाद सुप्रीम कोर्ट को 21 मार्च को रिपोर्ट सौंपी थी। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा को ज्यूडिशियल काम देने से मना कर दिया है। अब जस्टिस वर्मा के 6 महीने की कॉल डिटेल्स की जांच की जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Budget 2024