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जावेद अख्तर बोले- पाकिस्तान में लोकतंत्र दिखावा, असली शासक सेना:अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रम्प भी यह बात जानते हैं, इसलिए सेना प्रमुख को मिलने बुलाया

मशहूर गीतकार और राइटर जावेद अख्तर ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद विभिन्न देशों में जाने वाले प्रतिनिधिमंडलों में विपक्ष का शामिल होना सराहनीय कदम है, क्योंकि पहलगाम आतंकी हमला सरकार पर नहीं, बल्कि पूरे भारत पर किया गया था। अख्तर ने शुक्रवार को NDTV के शो में पाकिस्तान के असली सत्ता के केंद्र के बारे में भी बात की।

जावेद ने भारत और पाकिस्तान के बिगड़ते संबंधों पर कहा कि ऐसा लगता है कि यह सबसे खराब दौर है, क्योंकि घाव अभी ताजे हैं, लेकिन इससे पहले भी ऐसे दौर आए हैं। पाकिस्तान में कई लोग भारत के साथ दोस्ती चाहते हैं, लेकिन वहां की सरकार और सेना इसका विरोध करती है।

भारत-पाकिस्तान संबंधों पर जावेद अख्तर के बयान की बड़ी बातें…

  • पहलगाम आतंकी हमला सरकार पर नहीं, देश पर हमला था: पहलगाम आतंकी हमला सरकार पर नहीं था, यह देश पर हमला था। इसलिए देश का हर व्यक्ति जाएगा। जो लोग प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे, उनमें से कुछ ऐसे भी हैं जो सरकार पर हमला करते रहते हैं। लेकिन जब देश की बात आती है, तो हम सब एक हैं। बाकी मुद्दे आंतरिक हैं और हम उन पर आंतरिक रूप से बात करते रहेंगे।
  • भारत-पाक संबंधों का सबसे खराब दौर: 1965 का युद्ध और कारगिल युद्ध भी हो चुका है। हर बार पाकिस्तान सरकार पल्ला झाड़ लेती है और दावा करती है कि इसमें उसका कोई हाथ नहीं है। 1948 में उन्होंने कहा था कि कश्मीर में कबायलियों ने प्रवेश किया था; कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने कहा था कि उन्हें नहीं पता कि वहां कौन गया था। इसी तरह, पहलगाम में भी उन्होंने कहा था कि उन्हें हमले के बारे में कुछ नहीं पता। यह कोई नई बात नहीं है, वे ऐसा ही करते हैं।
  • अमेरिका भी जानता है असली ताकत कहां: जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, पाकिस्तान से बात करना चाहते थे, तब भी वे राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री से बात कर सकते थे, लेकिन उन्हें पता था कि असली ताकत कहां है, इसलिए उन्होंने उनके सेना प्रमुख असीम मुनीर को बुलाया। इससे यह स्पष्ट हो गया कि उनका लोकतंत्र एक दिखावा है और सेना देश पर शासन करती है। तो, भारत के साथ अच्छे संबंध उनके लिए कैसे अनुकूल होंगे।

दिलजीत दोसांझ फिल्म कंट्रोवर्सी पर भी बोले

दिलजीत दोसांझ की ‘सरदार जी 3’ में पाकिस्तानी एक्ट्रेस हानिया आमिर की कास्टिंग कंट्रोवर्सी पर अख्तर ने कहा कि इस विवाद का कोई मतलब नहीं है। फिल्म पहले ही शूट हो चुकी थी। उन्हें कैसे पता था, पाकिस्तान को इससे नुकसान नहीं होगा। इससे हमारे देशवासियों को नुकसान होगा। कानून को पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता।

सेंसर बोर्ड और सरकार को इस पर विचार करना चाहिए। वे कह सकते हैं कि ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए। जब हालात इतने खराब नहीं थे, तो दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने का एक तरीका यह होता कि दोनों पक्षों के कलाकार सरकारों की भागीदारी के साथ फिल्में बनाते।

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