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खालिस्तानी आतंकियों का महाकुंभ में ब्लास्ट का दावा:ई-मेल भेजकर सिलेंडर ब्लास्ट की जिम्मेदारी ली, बोला- पीलीभीत फेक एनकाउंटर के बदले की शुरुआत
नमन तिवारी, जालंधर2 मिनट
रविवार शाम को महाकुंभ में बनाए 180 कैंपों में आग लगी थी। यहां दो सिलेंडर ब्लास्ट हुए थे। – फाइल फोटो
प्रयागराज महाकुंभ मेले के दौरान 2 सिलेंडर ब्लास्ट की घटना की जिम्मेदारी आतंकवादी संगठन खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF) ने ली है। संगठन ने इसे लेकर कुछ मीडिया संस्थानों को ई-मेल भेजी है, जिसमें कहा गया है कि यह पीलीभीत फेक एनकाउंटर का बदला है। यह ब्लास्ट CM योगी को केवल अलर्ट है। यह शुरुआत है।
इस ई-मेल की सत्यता की पुष्टि दैनिक भास्कर नहीं करता है। पुलिस इस मामले में जांच कर रही है।
बता दें कि रविवार शाम करीब चार बजे शास्त्री ब्रिज के पास सेक्टर-19 में गीता प्रेस के कैंप में 2 सिलेंडर ब्लास्ट से आग लग गई थी। इससे 180 कॉटेज जल गए थे। अफसरों के मुताबिक, गीता प्रेस की रसोई में छोटे सिलेंडर से चाय बनाते समय सिलेंडर लीक हो गया और आग लग गई। इसके बाद 2 सिलेंडर ब्लास्ट हो गए।
आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड की 12 गाड़ियां भेजी गई थीं, जिन्होंने आग पर एक घंटे में (शाम 5 बजे) काबू पाया। इसमें कोई जानी नुकसान नहीं हुआ था। उस समय अधिकारियों ने इसे अग्निकांड बताया था।
महाकुंभ में आग लगने के बाद जलते कॉटेज। यह दुर्घटना शास्त्री ब्रिज के पास हुई थी। वारदात के समय ब्रिज से गुजर रही ट्रेन से यात्री ने इसका वीडियो बना लिया।
आतंकी संगठन ने ई-मेल में क्या कहा…
आतंकी संगठन की ओर से भेजी गई ई-मेल में कहा गया है, ‘खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स कुंभ मेले के दौरान हुए दोहरे विस्फोट की जिम्मेदारी लेता है। इसका मुख्य उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं था। यह सिर्फ जोगी (UP के CM योगी आदित्यनाथ) और उनके कुत्ते के लिए एक चेतावनी थी।
खालसा पीलीभीत फर्जी मुठभेड़ में हमारे 3 भाइयों की हत्या का बदला लेने के लिए आपके बहुत करीब है। यह अभी शुरुआत है।’ ई-मेल में फतेह सिंह बागी का नाम लिखा है।
खालिस्तानी संगठन की ओर से भेजी गई ई-मेल की फोटो…
पीलीभीत में पुलिस एनकाउंटर में मारे थे तीन आतंकवादी
23 दिसंबर को यूपी के पीलीभीत में पुलिस ने तीन आतंकियों को मार गिराया था। पंजाब की एक पुलिस चौकी पर ग्रेनेड अटैक के आरोपी भागकर पीलीभीत आ गए थे। पंजाब पुलिस ने पीलीभीत पुलिस को सूचना दी थी कि ये आरोपी जिले में छिपे हुए हैं, जिसके बाद पुलिस ने नाकाबंदी और चेकिंग अभियान शुरू किया।
इस दौरान आरोपियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी थी, पुलिस की जवाबी फायरिंग में तीन आतंकी मारे गए थे। इनकी पहचान जसनप्रीत सिंह, गुरविंदर सिंह और वीरेंद्र सिंह के रूप में हुई है। पुलिस ने उनके पास से दो एके-47 राइफल्स और दो विदेशी पिस्तौल भी बरामद की थीं।
UP और उत्तराखंड बने खालिस्तानियों के हाइडआउट
बीते 4 साल में पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और UP में भारत विरोधी और खालिस्तान के समर्थन में कई बार आवाज उठी। इसमें सरकारी इमारतों, स्कूलों और गुरुद्वारों के बाहर पोस्टर, बैनर और भड़काऊ नारे लगाए गए। कई जुलूस भी निकाले गए, जिनमें आतंकी संगठन बब्बर खालसा और जरनैल सिंह भिंडरांवाले के पोस्टर लहराए गए।
जून, 2024 में पीलीभीत के पूरनपुर-खुटार हाईवे पर खालसा निवास गुरुद्वारे के बाहर भिंडरावाले के फोटो लगे पोस्टर चिपकाए गए। पुलिस ने गुरुद्वारे को नोटिस भेजा, लेकिन पोस्टर नहीं हटे। इसके बाद प्रशासन ने गुरुद्वारा प्रमुख इंद्रजीत कौर खालसा के खिलाफ केस दर्ज किया, तब काफी बवाल के बाद पोस्टर हटाए गए। इसके 6 महीने बाद पीलीभीत में खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के आतंकियों की एक्टिविटी देखी गई।
हमने 1986 से 1988 के बीच पीलीभीत के SP रहे UP के पूर्व DGP बृजलाल से देश में बढ़ते खालिस्तानी नेटवर्क के बारे में बात की।
वे कहते हैं, ‘खालिस्तान मूवमेंट के दौरान UP के पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर, बरेली और उत्तराखंड के नैनीताल, उधमसिंह नगर और किच्छा जैसे इलाकों में सिख कम्युनिटी की आबादी तेजी से बढ़ी। 1980 के दशक में यहां जंगल को काटकर बड़ी संख्या में फार्म हाउस बनाए गए। पंजाब से लोग यहां आकर रहने लगे।‘
‘खालिस्तानी आतंकी गुटों ने इसका फायदा उठाया। वे पंजाब, दिल्ली, हरियाणा में क्राइम करते और छिपने के लिए UP और उत्तराखंड भाग जाते थे। आज भी खालिस्तान ये जगहें हाइडआउट के तरह इस्तेमाल कर रहा है।‘
‘बेरोजगारी और ड्रग्स की वजह से आतंकी बन रहे पंजाब के लड़के’
यूनाइटेड स्टेट इंडिया पॉलिटिकल एक्शन कमेटी के फाउंडर और फॉरेन एक्सपर्ट रॉबिन सचदेवा कहते हैं, ‘भारत में खालिस्तान समर्थकों की एक्टिविटी बढ़ना खतरनाक है। ये देश के अलग-अलग हिस्सों में फैल रहे हैं। इनका टारगेट ज्यादातर ऐसे युवा हैं, जो अपने धर्म और विचारधारा को लेकर सीरियस होते हैं। आतंकी इनका ब्रेनवॉश करते हैं।‘
रॉबिन आगे कहते हैं, ‘पंजाब इस वक्त कई चुनौतियों से गुजर रहा है। बेरोजगारी और ड्रग्स का बढ़ता इस्तेमाल बड़े मसले हैं। इनका फायदा उठाकर आतंकी संगठन बच्चों को आतंक की ओर मोड़ रहे हैं।‘
हिंसा भड़काने के लिए युवाओं को आर्मी जैसी ट्रेनिंग
केंद्रीय जांच एजेंसी NIA के एक अधिकारी बताते हैं, ‘बीते 4 साल में पाकिस्तान बॉर्डर से सटे पंजाब के कई इलाकों में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के सपोर्ट से टेरर ग्रुप मजबूत हुए हैं। इसमें भिंडरावाले कमांडो फोर्स ऑफ खालिस्तान, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स, सिख फॉर जस्टिस और खालिस्तान लिबरेशन फोर्स शामिल हैं।’
’ISI एजेंट खालिस्तानी आतंकियों को सीमा पार कराने में मदद करते हैं। उनके लिए ठिकाने, हथियार और विस्फोटकों के स्टोरेज का इंतजाम करते हैं।’
‘भारत में गिरफ्तार खालिस्तानी आतंकवादियों से पूछताछ के बाद पता चला है कि ISI की मदद से पाकिस्तान में सिख युवाओं को 2001 से ट्रेनिंग दी जाती रही है। उन्हें राइफल, स्नाइपर गन, LMG, ग्रेनेड और गन पाउडर से ब्लास्ट करना सिखाया जाता है। ट्रेनिंग के बाद उनके जरिए अमृतसर, लुधियाना, चंडीगढ़, दिल्ली जैसे बड़े शहरों में ब्लास्ट करने और VVIP लोगों को निशाना बनाने की कोशिश भी की गई।’
एशियाई देशों में हुई आतंकी गतिविधियों, हमलों पर रिसर्च और डेटा बैंक रखने वाली वेबसाइट साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में 5 से ज्यादा ट्रेनिंग कैंपों में पंजाब के 200 से ज्यादा युवाओं को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी गई।
इसके लिए फंड और हथियार जुटाने की जिम्मेदारी ISI और पाकिस्तान में बैठे खालिस्तानी लीडर्स ने ली थी। इसमें बब्बर खालसा इंटरनेशनल के चीफ वधावा सिंह, खालिस्तान कमांडो फोर्स के चीफ परमजीत सिंह पंजवार और KZF चीफ रंजीत सिंह नीटा के नाम सामने आए थे।
