सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि देश में नॉन-मीट प्रोडेक्ट्स को भी हलाल सर्टिफिकेट दिया जा रहा है।
एक मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि आटा, बेसन और पानी की बोतल जैसे प्रोडक्ट्स भी इस लिस्ट में शामिल हैं।
उन्होंने पूछा कि बेसन कैसे हलाल या गैर-हलाल हो सकता है। बात खाने-पीने की चीजों की नहीं है। सीमेंट और सरिया जैसी चीजों को भी यह सर्टिफिकेट दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हर प्रोडेक्ट पर हलाल सर्टिफिकेट देने वाली निजी एजेंसियां लाखों करोड़ रुपए कमा रही हैं। हलाल सर्टिफिकेट लेने की लागत को भी कंपनी प्रोडेक्ट की कीमत में जोड़ देती है। इससे कीमत बढ़ जाती है।
मार्च के आखिरी हफ्ते में होगी अगली सुनवाई
जस्टिस बी आर गवई और ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने याचिकाकर्ताओं को केंद्र के हलफनामे पर जवाब देने को कहते हुए सुनवाई मार्च के अंतिम सप्ताह के लिए टाल दी। कोर्ट ने कहा कि उसने यूपी सरकार को पहले आदेश दिया था कि वह इस मामले में कोई दंडात्मक कार्रवाई न करें। वह आदेश फिलहाल जारी रहेगा।
हलाल इंडिया के वकील ने कहा- लिपस्टिक भी हलाल या गैर हलाल
सुनवाई के दौरान जमीयत उलेमा ए हिंद की तरफ से वकील एम आर शमशाद ने कहा कि हलाल जीवन शैली से जुड़ा विषय है। यह सोचना गलत है कि हलाल या गैर हलाल का सिद्धांत सिर्फ मीट उत्पादों पर ही लागू है।
उन्होंने कहा कि बहुत से खाद्य पदार्थ ऐसे हो सकते हैं जिनमें प्रिजर्वेटिव के रूप में अल्कोहल का इस्तेमाल हुआ हो। ऐसे खाद्य पदार्थ गैर हलाल की श्रेणी में आएंगे। हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के वकील ने कहा कि लिपस्टिक जैसी मेकअप की चीजें भी हलाल या गैर हलाल हो सकती हैं।
हलाल प्रोडक्ट्स और सर्टिफिकेट क्या है
हलाल सर्टिफिकेट वाले प्रोडेक्ट की बिक्री पर रोक के खिलाफ याचिका
उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेट वाले उत्पादों की बिक्री पर रोक के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी, 2024 को नोटिस जारी किया था। यूपी के फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FSDA) ऑफिस ने 18 नवंबर 2023 को जारी अधिसूचना में हलाल सर्टिफिकेट वाले खाद्य पदार्थों, दवाओं और कॉस्मेटिक्स समेत दूसरे उत्पादों की बिक्री और स्टोर किए जाने पर रोक लगा दी थी।
इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद महाराष्ट्र का कहना था कि अगर धार्मिक कारणों से लोग हलाल सर्टिफिकेट वाले उत्पादों का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो इससे दूसरे लोगों के हितों पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने अपनी याचिका में हलाल सर्टिफिकेट जारी करने वाली संस्थाओं पर यूपी में FIR दर्ज होने का भी विरोध किया था।
हलाल सर्टिफिकेट देने के लिए अलग-अलग एजेंसियां
बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देशों में इस्लामिक रिलीजियस काउंसिल ऑफ सिंगापुर (MUIS), डिपार्टमेंट ऑफ इस्लामिक डेवलपमेंट मलेशिया (JAKIM) और इंडोनेशिया काउंसिल ऑफ उल्लेमा (MUI) जैसे संस्थान ब्यूटी प्रोडक्ट्स को हलाल सर्टिफिकेट देते हैं।
भारत में भी कई संस्थाएं हलाल सर्टिफिकेशन जारी करती हैं। इनमें से कुछ हलाल सर्टिफिकेशन बॉडीज भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त हैं, जबकि कुछ के पास कोई मान्यता नहीं है। गर्वमेंट अप्रूव्ड हलाल सर्टिफिकेशन बॉडीज से सर्टिफिकेट लेने से प्रोडक्ट्स को नेशनल और इंटरनेशनल मार्केट में फायदा मिलता है।
