कोलकाता रेप-मर्डर केस में संजय रॉय दोषी करार:सजा का ऐलान सोमवार को, संजय बोला- मुझे फंसाया गया, इसमें IPS शामिल
कोलकाता11 मिनट
पुलिस कस्टडी में कोर्ट से बाहर आता संजय रॉय। यह तस्वीर सितंबर 2024 की है।
कोलकाता के आरजी कर हॉस्पिटल में ट्रेनी डॉक्टर से रेप और मर्डर केस में सियालदह कोर्ट ने मुख्य आरोपी संजय रॉय को दोषी करार दिया है। जस्टिस अनिर्बान दास ने दोपहर 2.30 बजे फैसला सुनाया और कहा कि सजा का ऐलान सोमवार (20 जनवरी) को किया जाएगा।
अदालत ने 162 दिन बाद फैसला सुनाया है। रेप-मर्डर की घटना 9 अगस्त 2024 की है और फैसला 18 जनवरी 2025 को आया है। CBI ने आरोपी संजय के लिए फांसी की मांग की है।
फैसले के बाद दोषी संजय ने कहा-
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मुझे इस मामले में फंसाया गया है। मैंने यह काम नहीं किया। जिन्होंने ये काम किया है, उन्हें जाने दिया गया है। एक IPS इसमें शामिल है।
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आरजी कर हॉस्पिटल में 8-9 अगस्त की रात ट्रेनी डॉक्टर का रेप-मर्डर हुआ था। 9 अगस्त की सुबह डॉक्टर की लाश सेमिनार हॉल में मिली थी। CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस ने संजय रॉय नाम के सिविक वॉलंटियर को 10 अगस्त को अरेस्ट किया था।
CBI ने 10 दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दी थी। जिसमें बताया था कि सियालदह ट्रायल कोर्ट में रेगुलर सुनवाई हुई और 81 गवाहों में से 43 से पूछताछ की गई।
इधर, शनिवार को फैसले से पहले पीड़ित के पिता ने कहा है कि आरोपी की सजा कोर्ट तय करेगा, लेकिन जब तक हमें न्याय नहीं मिल जाता हम अदालत का दरवाजा खटखटाते रहेंगे।
फैसले के बाद कोर्ट के बाहर प्रदर्शन
जूनियर डॉक्टर फेडरेशन और सोशल एक्टिविस्ट सियालदह कोर्ट के बाहर प्रदर्शन करते नजर आए।
जूनियर डॉक्टर फेडरेशन और सोशल एक्टिविस्ट सियालदह कोर्ट के बाहर प्रदर्शन करते नजर आए।
फैसले से जुड़ी 3 बड़ी बातें
1. फैसले का आधार फॉरेंसिक रिपोर्ट
अदालत ने फॉरेंसिक रिपोर्ट को सजा का आधार बनाया, जो बताती है कि संजय रॉय इस मामले में शामिल था। घटना स्थल और पीड़ित डॉक्टर की बॉडी पर भी संजय का DNA मिला था। रॉय को भारत न्याय संहिता अधिनियम की धारा 64, 66 और 103(1) के तहत दोषी पाया गया है
2. अधिकतम सजा फांसी होगी
जस्टिस अनिर्बान दास ने कहा कि इस मामले में अधिकतम सजा फांसी दी जा सकती है। कम से कम सजा आजीवन कारावास होगी।
3. दोषी संजय को बोलने का मौका मिलेगा
जब दोषी संजय ने कहा कि उसे इस केस में फंसाया जा रहा है, इसके बाद जस्टिस अनिर्बान दास ने कहा कि सजा सुनाए जाने से पहले उसे बोलने का मौका मिलेगा।
फैसले से पहले पीड़ित के पिता के 4 दावे
हमारे वकील और CBI ने हमें कोर्ट न जाने को कहा है। CBI ज्यादा कोशिश नहीं कर रही है। इसमें कोई न कोई जरूर शामिल है। मुझे हाल की कोर्ट कार्यवाही के बारे में कुछ नहीं पता।
CBI ने मुझे कभी कहीं नहीं बुलाया, वे एक या दो बार हमारे घर आए लेकिन जब भी हमने उनसे जांच के बारे में पूछा, उन्होंने हमेशा कहा कि जांच चल रही है।
मेरी बेटी की गर्दन पर काटने के निशान थे, लेकिन वहां से सैम्पल नहीं लिया गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी ठोस सबूत नहीं मिला।
DNA रिपोर्ट में बताया गया है कि वहां 4 पुरुष और 2 महिलाएं मौजूद थीं। हम चाहते हैं कि इसमें शामिल सभी लोगों को सजा मिले।
सियालदह कोर्ट में केस का ट्रायल 12 नवंबर 2024 को शुरू हुआ था, इसके 57 दिन बाद संजय को दोषी करार दिया गया।
सियालदह कोर्ट में केस का ट्रायल 12 नवंबर 2024 को शुरू हुआ था, इसके 57 दिन बाद संजय को दोषी करार दिया गया।
फैसले में देरी के 3 कारण
पहला कारण- 2 वकीलों ने केस छोड़ा
सबसे पहले बिकास रंजन भट्टाचार्य अपॉइंट किए गए। भट्टाचार्य ने सियालदह कोर्ट के अलावा हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में CBI जांच की मांग करने में अहम भूमिका निभाई थी। भट्टाचार्य की व्यस्तता के कारण पीड़ित परिवार को नया वकील ढूंढना पड़ा था। भट्टाचार्य ने 9 सितंबर को आखिरी बार पीड़ित के वकील के तौर पर पहुंचे।
ट्रेनी डॉक्टर के पिता ने कहा था- हम चाहते थे कि भट्टाचार्य हाईकोर्ट और सियालदह कोर्ट में हमारा केस लड़ें। सुप्रीम कोर्ट के लिए हम कोई दूसरा वकील ढूंढ रहे थे। भट्टाचार्य को यह बात पसंद नहीं आई और उन्होंने सभी अदालतों में हमारा केस छोड़ दिया।
सितंबर से एडवोकेट वृंदा ग्रोवर पीड़ित परिवार की वकील बनीं। 11 दिसंबर को वृंदा भी केस से अलग हो गईं। पीड़ित के पिता ने कहा- वृंदा ने मुझे मैसेज किया और कहा कि वे केस नहीं लड़ेंगी। 12 दिसंबर को ट्रायल कोर्ट में सुनवाई थी। उस दिन हमारी बात रखने के लिए कोई वकील नहीं था।
वृंदा के बाद पीड़ित परिवार ने डॉक्टरों से मदद की गुहार लगाई। सीनियर एडवोकेट करुणा नंदी के चैंबर के एडवोकेट राजदीप हलधर सियालदह कोर्ट में पीड़ित परिवार का केस लड़ रहे हैं।
दूसरा कारण- CBI को मामला देरी से सौंपा गया
9 अगस्त की घटना के बाद आरजी कर अस्पताल के डॉक्टरों और पीड़ित परिवार ने मामले की CBI जांच की मांग की, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जांच के आदेश नहीं दिए।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद 13 अगस्त को CBI को जांच सौंपी गई। इसके बाद CBI ने नए सिरे जांच शुरू की, लेकिन घटना को 5 दिन हो चुके थे।
तीसरा कारण- अन्य आरोपियों के खिलाफ CBI 90 दिन में चार्जशीट दायर नहीं कर पाई
आरोपी संजय रॉय के अलावा मामले में मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिसिंसपल संदीप घोष को भी आरोपी बनाया गया, लेकिन CBI 90 दिन के अंदर घोष के खिलाफ चार्जशीट दायर नहीं कर पाई, जिस कारण सियालदह कोर्ट ने 13 दिसंबर को घोष को इस मामले में जमानत दे दी। इसके अलावा ताला थाने के पूर्व प्रभारी अभिजीत मंडल को भी चार्जशीट दायर न करने के कारण जमानत दी गई।
हॉस्पिटल में लगे CCTV कैमरे में संजय रॉय 9 अगस्त की सुबह 4:03 मिनट पर वार्ड में आता दिखा था। उसने टी-शर्ट और जींस पहनी थी। बाएं हाथ में हेलमेट पकड़ा था।
हॉस्पिटल में लगे CCTV कैमरे में संजय रॉय 9 अगस्त की सुबह 4:03 मिनट पर वार्ड में आता दिखा था। उसने टी-शर्ट और जींस पहनी थी। बाएं हाथ में हेलमेट पकड़ा था।
10 आरोपियों का पॉलीग्राफ टेस्ट
CBI ने 25 अगस्त को सेंट्रल फोरेंसिक टीम की मदद से कोलकाता की प्रेसीडेंसी जेल में संजय का पॉलीग्राफ टेस्ट किया था। अधिकारियों ने करीब 3 घंटे उससे सवाल-जवाब किए। संजय समेत 10 लोगों का पॉलीग्राफ टेस्ट हुआ था। इनमें आरजी कर के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष, ASI अनूप दत्ता, 4 फेलो डॉक्टर, एक वॉलंटियर और दो गार्ड्स शामिल थे।
CBI ने कहा था- ट्रेनी डॉक्टर का गैंगरेप नहीं हुआ
CBI ने 7 अक्टूबर 2024 को कलकत्ता हाईकोर्ट में चार्जशीट दायर की, जिसमें कोलकाता पुलिस में सिविक वॉलेंटियर संजय को एकमात्र आरोपी बताया गया। एजेंसी ने बताया कि ट्रेनी डॉक्टर का गैंगरेप नहीं हुआ था।
चार्जशीट में 100 गवाहों के बयान, 12 पॉलीग्राफ टेस्ट रिपोर्ट, CCTV फुटेज, फोरेंसिक रिपोर्ट, मोबाइल की कॉल डिटेल और लोकेशन शामिल रहीं। यह भी कहा गया है कि पीड़ित के शरीर से मिला सीमन सैंपल और खून आरोपी से मैच हुआ।
वहीं क्राइम सीन पर मिले छोटे बाल भी फोरेंसिक जांच के बाद आरोपी के बालों से मैच हुए। संजय का इयरफोन, मोबाइल ब्लूटूथ से कनेक्ट हो गया था। इसे भी अहम सबूत माना गया।
पैरेंट्स ने कहा था- सियालदह कोर्ट को सजा सुनाने से रोका जाए
CBI जांच को लेकर ट्रेनी डॉक्टर के माता-पिता ने असंतोष जताया। उन्होंने मामले की निगरानी कर रहे सुप्रीम कोर्ट और कलकत्ता हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की है। उन्होंने अपील की है कि सियालदह स्पेशल कोर्ट को इस मामले में सजा सुनाने से रोका जाए और पूरे मामले की एक बार फिर नए सिरे से जांच की जाए।
फोरेंसिक रिपोर्ट से आया ट्विस्ट, गद्दे पर हाथापाई के सबूत नहीं
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में ट्रेनी डॉक्टर से रेप-मर्डर केस में 24 दिसंबर को सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री (CFSL) की एक रिपोर्ट सामने आई। जिसमें कई सनसनीखेज खुलासे थे। 12 पेज की रिपोर्ट में कहा गया था कि सेमिनार हॉल में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे पता चले कि वहां पीड़ित से रेप के बाद हत्या की गई।
रिपोर्ट के 12वें पेज की आखिरी लाइनों में लिखा था- जिस जगह ट्रेनी डॉक्टर का शव मिला था, वहां संघर्ष का कोई सबूत नहीं मिला। जिस गद्दे पर शव था, उस पर भी किसी तरह की हाथापाई के निशान नहीं मिले।
