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भारतीय सेना में शामिल होगी तीसरी पीढ़ी की नाग मिसाइल:4 किलोमीटर दूर टैंक को 17 से 18 सेकेंड में उड़ा देगी; पोकरण में सफल परीक्षण

भारत ने अपनी तीसरी पीढ़ी की स्वदेशी एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल ‘नाग’ का सफल परीक्षण किया है। जैसलमेर की पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में इस मिसाइल के तीन परीक्षण किए गए। इन परीक्षणों में मिसाइल ने अपने सभी टारगेट को पूरी सटीकता से नष्ट कर दिया। ये परीक्षण भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ।

रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि अब यह मिसाइल भारतीय सेना में शामिल होने के लिए पूरी तरह से तैयार है। यह मिसाइल 230 मीटर प्रति सेकेंड की रफ़्तार से अपने लक्ष्य पर प्रहार करती है। यानी 4 किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को 17 से 18 सेकेंड में नेस्तनाबूद कर देती है।

जैसलमेर के पोकरण में स्वदेशी एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल ‘नाग’ का सफल परीक्षण किया है।
फायर एंड फॉरगेट तकनीक
ये मिसाइल ‘फायर-एंड-फॉरगेट’ तकनीक पर आधारित है, यानी इसे दागने के बाद दोबारा निर्देशित करने की आवश्यकता नहीं होती। नाग मिसाइल हर मौसम में काम करने में सक्षम है और यह दुश्मन के टैंक को सटीकता से नष्ट कर सकती है।

इसमें इन्फ्रारेड तकनीक है, जो लॉन्च से पहले लक्ष्य को लॉक करती है और तेजी से उसे नष्ट कर देती है। इसकी मारक क्षमता 4 किलोमीटर तक है। हल्के वजन और अचूक निशाने वाली यह मिसाइल दुश्मन के टैंक और अन्य सैन्य वाहनों को सेकेंड्स में नष्ट कर सकती
नाग एमके-2, भारतीय सेना के लिए एक एडवांस एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम है।
300 करोड़ की लागत से तैयार
नाग मिसाइल को डीआरडीओ ने 300 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया है। इसका पहला सफल परीक्षण 1990 में किया गया था। जुलाई 2019 में पोकरण फायरिंग रेंज में भी इसका परीक्षण किया गया था। इसके अलावा, 2017, 2018 और 2019 में भी अलग-अलग ट्रायल किए गए, जिनमें हर बार नई तकनीक जोड़ी गई।

ये मिसाइल डीआरडीओ के एकीकृत मिसाइल विकास कार्यक्रम का हिस्सा है। यह दुश्मन के टैंकों के खिलाफ भारत की ताकत को कई गुना बढ़ाएगी और सेना को आधुनिक तकनीकों से लैस करेगी।

पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में टारगेट को नष्ट करती मिसाइल नाग एमके-2।
नाग एमके-2 की खासियत
नाग एमके-2, भारतीय सेना के लिए एक एडवांस एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम है। यह हल्की मिसाइल है जो हर मौसम में काम करने में सक्षम है। इसका वजन करीब 45 किलो है और यह 6 फीट एक इंच लंबी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय सेना को बधाई दी है।

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