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पत्रकार हत्याकांड…मुकेश की रॉड से पीट-पीटकर हत्या:मोबाइल 50KM दूर नदी में फेंका, वारदात के 5 दिन पहले रची साजिश;सड़क की खबर से थी नाराजगी

बीजापुर के पत्रकार मुकेश चंद्राकर की रॉड से पीट-पीटकर हत्या की गई थी। लोकेशन भटकाने के लिए उसका मोबाइल 50KM दूर तुमनार नदी में फेंका गया। वारदात से 5 दिन पहले ठेकेदार सुरेश चंद्राकर ने मुकेश की हत्या की प्लानिंग की थी। SIT की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। सड़क निर्माण काम की खबर से ये लोग मुकेश से नाराज थे।

इस मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने और आरोपियों को पकड़ने के लिए CG के अलावा महाराष्ट्र, तेलंगाना और ओडिशा पुलिस की भी मदद ली गई। SIT के मुताबिक, हत्या रितेश चंद्राकर और महेंद्र रामटेके ने की, जबकि शव छिपाने का काम दिनेश ने किया।

1 जनवरी को बीजापुर के पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या कर दी गई थी।
100 से ज्यादा CDR निकाले गए

गुरुवार की शाम SIT ने एक प्रेस रिलीज में बताया कि, इस घटना के आरोपियों को पकड़ने के लिए करीब 100 से ज्यादा CDR निकाले गए। CCTV कैमरे खंगाले गए। 50 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की गई है। पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के लिए साइबर टीम ने AI (Artificial intelligence) और OSINT (Open-source intelligence) टूल्स का भी प्रयोग किया।

वहीं सुरेश चंद्राकर की कुल 4 लग्जरी गाड़ी, मिक्सर मशीन समेत अन्य वाहन जब्त किए गए हैं। यह भी पता चला है कि, आरोपियों ने अपने फोन से भी सारा डेटा डिलीट कर दिया है। फोन का डेटा रिकवर करने के लिए लैब भेजा गया है। जिस दिन मुकेश की हत्या की साजिश रची गई उसी दिन सुरेश ने अपने बैंक अकाउंट से एक मोटी रकम निकाल ली थी।

लोकेशन भटकाने के लिए आरोपियों ने मुकेश के फोन को चकनाचूर कर घटनास्थल से 40-50 किमी दूर तुमनार नदी में फेंक दिया।
खबर से नाराजगी, इसलिए हत्या

SIT के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि मुकेश चंद्राकर इनका रिश्तेदार था और उनके ठेका काम के खिलाफ लगातार न्यूज कवर कर रहा था। इनके ठेका कार्य की जांच भी शुरू हो गई थी। इस बात से नाराज होकर सुरेश चंद्राकर ने अपने भाइयों के साथ मिलकर उसकी हत्या की साजिश रची।

1 जनवरी को रितेश चंद्राकर और महेंद्र रामटेक इन दोनों ने मिलकर बाड़े के कमरा नंबर 11 में रॉड से पीट-पीटकर मुकेश की हत्या की।

सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार की खबर से नाराज सुरेश चंद्राकर ने अपने भाइयों के साथ मिलकर मुकेश की हत्या की साजिश रची।
दिनेश ने मिटाए सबूत

दिनेश चंद्राकर ने घटना के बाद रात में ही आकर सबूत मिटाने और आरोपियों को फरार करने में साथ दिया। सुरेश चंद्राकर ने खुद को घटना के समय बाहर रखने की योजना बना रखी थी, ताकि उस पर संदेह न हो। 3 जनवरी को दोपहर 12 बजे दिनेश चंद्राकर अस्पताल में खुद बीमार होकर भर्ती हो गया था। जब पुलिस को शक हुआ तो उसे अस्पताल से ही हिरासत में लेकर पूछताछ की। 3 घंटे की पूछताछ के बाद दिनेश ने हत्या का सारा राज खोला।

इसके बाद इस वारदात में शामिल महेंद्र रामटेक के बारे में बताया। पुलिस ने बीजापुर बस स्टैंड से महेंद्र रामटेक को गिरफ्तार किया। जब शव के बारे में जानकारी मिली तो 3 जनवरी की शाम 5 बजे सेप्टिक टैंक को तोड़कर शव निकाला गया। 6 जनवरी को सुरेश चंद्राकर को हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपियों को 8 जनवरी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।

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