एक देश एक चुनाव पर JPC की पहली बैठक:संबित पात्रा समेत कई सांसद 18 हजार पन्नों की रिपोर्ट लेकर पहुंचे; प्रियंका गांधी भी शामिल हुईं
नई दिल्ली13 मिनट पहले
एक देश एक चुनाव को लेकर JPC मीटिंग में प्रियंका गांधी, संबित पात्रा सहित अन्य मेंबर्स पहुंचे।
एक देश-एक चुनाव के लिए संसद में पेश हुए 129वें संविधान संशोधन बिल पर बुधवार (8 जनवरी) को जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) की पहली बैठक हुई। बैठक के लिए पहुंचे भाजपा सांसद संबित पात्रा, AAP सांसद संजय सिंह सहित कई सांसद करीब 18 हजार पन्नों की रिपोर्ट लेकर पहुंचे। कानून मंत्रालय ने यह रिपोर्ट JPC को दी थी।
बैठक में कानून मंत्रालय के अधिकारियों ने प्रस्तावित कानूनों के प्रावधानों पर एक प्रेजेंटेशन दी। इस दौरान भाजपा ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि यह देशहित में है। वहीं, कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने इसे संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।
39 सदस्यों वाली JPC में कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी, मनीष तिवारी और सुखदेव भगत सिंह शामिल हैं। वहीं, भाजपा की तरफ से बड़े नामों में बांसुरी स्वराज, संबित पात्रा और अनुराग सिंह ठाकुर हैं, जबकि TMC से कल्याण बनर्जी का नाम है।
इसके अलावा सपा, DMK, TDP समेत अन्य पार्टियों से भी सांसदों को इस JPC का सदस्य बनाया गया है। इस समिति को अगले सत्र के आखिरी हफ्ते के पहले दिन तक अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी।
संसद में बिल पेश करने के लिए सरकार को बहुमत नहीं मिला
कानून मंत्री मेघवाल ने 17 दिसंबर को लोकसभा में एक देश-एक चुनाव को लेकर संविधान संशोधन बिल रखा था। विपक्षी सांसदों ने इसका विरोध किया। इसके बाद बिल पेश करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग कराई गई।
कुछ सांसदों की आपत्ति के बाद वोट संशोधित करने के लिए पर्ची से दोबारा मतदान हुआ। इस वोटिंग में बिल पेश करने के पक्ष में 269 और विपक्ष में 198 वोट पड़े। इसके बाद कानून मंत्री ने बिल दोबारा सदन में रखा।
लोकसभा की 543 सीटों में NDA के पास अभी 292 सीटें हैं। दो तिहाई बहुमत के लिए 362 का आंकड़ा जरूरी है। वहीं, राज्यसभा की 245 सीटों में NDA के पास अभी 112 सीटें हैं, वहीं 6 मनोनीत सांसदों का भी उसे समर्थन है। जबकि विपक्ष के पास 85 सीटें हैं। दो तिहाई बहुमत के लिए 164 सीटें जरूरी
लोकसभा में मौजूद सत्ता पक्ष के सांसदों ने बिल का समर्थन किया। तस्वीर में अमित शाह, राजनाथ सिंह, पीयूष गोयल, किरेन रिजिजू देखे जा सकते हैं।
कांग्रेस बोली- बिल पेश करते समय सरकार 272 सांसद नहीं जुटा पाई
कांग्रेस ने एक देश एक चुनाव विधेयक को लेकर 20 दिसंबर को कहा कि भाजपा इस बिल को कैसे पास कराएगी? क्योंकि संविधान संशोधन के लिए उसके पास सदन में दो तिहाई बहुमत (362 सांसद) नहीं हैं। बिल भले ही JPC के पास भेजा गया, लेकिन कांग्रेस इसका विरोध करती है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने PTI से बातचीत में कहा, ‘केंद्र सरकार बिल पेश करते समय 272 सांसद भी नहीं जुटा पाई थी। संविधान संशोधन के लिए उन्हें दो-तिहाई बहुमत कैसे मिलेगा। ये बिल संविधान की मूल संरचना, संघीय व्यवस्था और लोकतंत्र विरोधी है। हम एक देश,एक चुनाव बिल का विरोध करेंगे।’
दरअसल, 20 दिसंबर को राज्यसभा में इस बिल से जुड़े 12 सदस्यों को नामित करने के प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित किया। सभापति जगदीप धनखड़ ने केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से राज्यसभा के सदस्यों को समिति में मनोनीत करने के लिए प्रस्ताव पेश करने को कहा था।
इसके बाद संसद की संयुक्त समिति को दोनों विधेयकों की सिफारिश करने वाला प्रस्ताव पारित किया गया। फिर बिल को 39 सदस्यीय JPC के पास भेजने का फैसला किया गया, जिसमें लोकसभा से 27 और राज्यसभा से 12 सांसद होंगे।
एक देश-एक चुनाव क्या है…
भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं। एक देश-एक चुनाव का मतलब लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से है। यानी मतदाता लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को चुनने के लिए एक ही दिन, एक ही समय वोट डालेंगे।
आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एकसाथ ही हुए थे, लेकिन 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं समय से पहले ही भंग कर दी गईं। उसके बाद दिसंबर, 1970 में लोकसभा भी भंग कर दी गई। इस वजह से एक देश-एक चुनाव की परंपरा टूट गई।
एक देश-एक चुनाव के लिए बनाई गई समिति ने मार्च में राष्ट्रपति को सौंपी थी रिपोर्ट
एक देश-एक चुनाव पर विचार के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में 2 सितंबर, 2023 को एक कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने करीब 191 दिनों में स्टेकहोल्डर्स और एक्सपर्ट्स से चर्चा के बाद 14 मार्च, 2024 को अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी थी।
एक देश-एक चुनाव को लागू करने के लिए संविधान संशोधन के जरिए संविधान में 1 नया अनुच्छेद जोड़ने और 3 अनुच्छेदों में संशोधन करने की व्यवस्था की जाएगी। सरकार इस मुद्दे पर आम सहमति बनाना चाहती है, लिहाजा बिल को जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) को भेजे जाने की संभावना है।
संविधान संशोधन से क्या बदलेगा, 3 पॉइंट…
संविधान संशोधन के जरिए अनुच्छेद- 82(A) जोड़ा जाएगा, ताकि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जा सकें। वहीं, अनुच्छेद- 83 (संसद के सदनों का कार्यकाल), अनुच्छेद- 172 (राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल) और अनुच्छेद- 327 (विधानसभाओं के चुनाव से जुड़े कानून बनाने में संसद की शक्ति) में संशोधन किया जाएगा।
बिल के जरिए प्रावधान किया जाएगा कि आम चुनाव के बाद लोकसभा की पहली बैठक की तारीख पर राष्ट्रपति नोटिफिकेशन जारी करेंगे। नोटिफिकेशन जारी करने की तारीख को अपॉइंटेड डेट कहा जाएगा। लोकसभा का कार्यकाल अपॉइंटेड डेट से 5 साल का होगा। लोकसभा या किसी राज्य की विधानसभा समय से पहले भंग होने पर बचे हुए कार्यकाल के लिए ही चुनाव कराए जाएंगे।
बिल के उद्देश्यों और कारणों में कहा गया है कि यह पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक देश-एक चुनाव पर हाईलेवल कमेटी की सिफारिशों पर आधारित है। कोविंद कमेटी ने देश और राज्यों को चुनावों के साथ ही लोकल बॉडीज इलेक्शन कराने की भी सिफारिश की थी। हालांकि 12 दिसंबर को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इसे लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ है।
