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मणिपुर के इंफाल में फिर गोलीबारी, बम फेंके गए:जयराम ने पूछा- PM क्यों नहीं जाते; CM बोले- क्या नरसिम्हा राव आए थे

मणिपुर के इंफाल वेस्ट जिले के गांव पर मंगलवार रात कुछ बंदूकधारियों ने हमला कर दिया। कडांगबंद इलाके में रात करीब 1 बजे बम फेंके गए। गांव वालों ने भी जवाबी फायरिंग की। हालांकि इसमें किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

मणिपुर में यह ताजा घटना CM बीरेन सिंह के माफी मांगने के बयान के कुछ घंटो बाद हुई। बीरेन सिंह ने मंगलवार को राज्य में हुई हिंसा और उसमें हुई जनहानि को लेकर माफी मांगी थी।

इस पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सवाल पूछा कि, पीएम मोदी मणिपुर क्यों नहीं जाते हैं। इसके जवाब में बीरेन सिंह ने कहा कि, पूर्व पीएम नरसिम्हा राव के कार्यकाल में भी मणिपुर में अशांति थी। क्या वो कभी वहां गए थे।

बीरेन सिंह ने कहा- हिंसा को लेकर मुझे खेद है, माफी मांगता हूं

तारीख- 31 दिसंबर
समय- दोपहर 2:30 बजे

CM बीरेन सिंह ने 31 दिसंबर को सेक्रेटिएट में मीडिया से चर्चा के दौरान कहा था कि हिंसा में कई लोगों ने अपने प्रियजन को खो दिया। कई लोगों ने अपना घर छोड़ दिया। मुझे वास्तव में खेद है। मैं माफी मांगना चाहता हूं।

मणिपुर में मई 2023 से अक्टूबर 2023 तक गोलीबारी की 408 घटनाएं दर्ज की गईं। नवंबर 2023 से अप्रैल 2024 तक 345 घटनाएं हुईं। मई 2024 से अब तक 112 घटनाएं सामने आई हैं।’

जयराम रमेश ने पूछा- पीएम मोदी अब तक क्यों नहीं गए, माफी क्यों नहीं मांगी

तारीख- 31 दिसंबर
समय- दोपहर 4:00 बजे

बीरेन सिंह की इस प्रेस कांफ्रेंस की क्लिप को कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने X पर शेयर किया और सवाल पूछा- प्रधानमंत्री मणिपुर जाकर वहां ये बात क्यों नहीं कह सकते? वे जानबूझकर 4 मई 2023 से राज्य का दौरा नहीं कर रहे हैं, जबकि वे देश-दुनिया की यात्रा कर रहे हैं। मणिपुर के लोग इस उपेक्षा को समझ ही नहीं पा रहे हैं।

बीरेन का जवाब- नरसिम्हा राव के समय भी हिंसा थी, क्या वे गए थे

तारीख- 31 दिसंबर
समय- रात 9:30 बजे

जयराम के इस पोस्ट पर बीरेन सिंह ने जवाब दिया। उन्होंने लिखा- मणिपुर में नगा-कुकी के बीच हिंसा कई सालों तक जारी रही। 1992 से 1997 के बीच हिंसा काफी बढ़ गई थी। क्या पीवी नरसिम्हा राव, जो 1991 से 1996 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे और इस दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष थे। क्या वे माफी मांगने मणिपुर आए थे?

यह वो समय था जब पूर्वोत्तर भारत में सबसे ज्यादा खूनी जातीय संघर्ष हो रहा था। मैंने जो माफी मांगी है, वह उन लोगों के लिए अपना दुख प्रकट करना है जो विस्थापित हो गए हैं और बेघर हो गए हैं। एक मुख्यमंत्री के रूप में, यह एक अपील थी कि जो हुआ उसे माफ कर दें और भूल जाएं। हालाँकि, आपने इसमें राजनीति ला दी।

बीरेन सिंह के बयान पर अन्य नेताओं का रिएक्शन

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यह माफी बहुत पहले मांग लेनी चाहिए थी। शांति की बहाली के लिए न्याय बहुत जरूरी चीज है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार इसमें विफल रही है।

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मनोज झा, RJD सांसद

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दो समुदायों के संघर्ष में CM जब एक का पक्ष लेता हुआ पाया जाता है, तो यह अक्षम्य है। अगर वह वास्तव में सोचते हैं कि उन्होंने जो किया वह गलत था, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।

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संदीप दीक्षित, कांग्रेस नेता

मणिपुर में पिछले 2 महीने की घटनाएं

28 दिसंबर: थामनपोकपी और सानासबी में गोलबारी में एक महिला और वीडियो जर्नलिस्ट घायल हो गए।

27 दिसंबर: सनसाबी इलाके में उग्रवादियों से मुठभेड़ में एक पुलिसकर्मी और एक स्थानीय युवक घायल।

15 दिसंबर: बिहार के 2 मजदूरों की गोली मारकर हत्या। थौबल एनकाउंटर में 1 उग्रवादी ढेर, 6 गिरफ्तार।

17 नवंबर: जिरिबाम जिले में पुलिस की गोली से मैतेई प्रदर्शनकारी की मौत, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए।

11 नवंबर: सुरक्षाबलों ने जिरीबाम में 10 कुकी उग्रवादियों को मार गिराया था। इन्होंने 6 मैतेई को किडनैप किया था।

मणिपुर में जातीय हिंसा को 600 दिन से ज्यादा
मणिपुर में कुकी-मैतेई के बीच मई 2023 में हिंसा जारी है। इसे 600 से ज्यादा दिन बीत चुके हैं। अलग-अलग घटनाओं में दोनों ही समुदाय के 250 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। 1500 से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं। 60 हजार लोग घर छोड़कर रिलीफ कैंप में रह रहे हैं। अब तक 11 हजार FIR दर्ज की गईं हैं और 500 लोगों को अरेस्ट किया गया है।

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