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बोरवेल में चेतना, खुदाई पूरी, अब रैट माइनर्स नीचे उतरेंगे:69 घंटे बाद बच्ची के नजदीक पहुंचेगी टीम; मासूम की हालत को लेकर प्रशासन की चुप्पी
कोटपूतली14 मिनट पहले
कोटपूतली में 4 दिन से चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में पहली बार बचाव टीमें कुछ देर में चेतना (3) के नजदीक पहुंच जाएंगी। ऑक्सीजन और लाइफ सेविंग इक्युपमेंट से लैस रैट माइनर्स को पाइप से 170 फीट नीचे उतारा जा रहा है। इसके बाद वे एक 20 फीट की सुरंग खोदेंगे। बुधवार सुबह 8 बजे शुरू हुआ समानांतर गड्ढा खोदने का काम गुरुवार सुबह 10 बजे पूरा हुआ।
सोमवार दोपहर करीब 2 बजे से 700 फीट गहरे बोरवेल में फंसी चेतना 69 घंटे से भूखी-प्यासी है। मंगलवार के बाद से उसका मूवमेंट भी कैमरे में नहीं दिखा। उसकी वर्तमान कंडीशन को लेकिर अधिकारी कुछ भी नहीं कह रहे हैं। देसी जुगाड़ के कारण वह शुरुआती जगह से केवल 30 फीट ही ऊपर आ सकी है।
बीते करीब 48 घंटे से चेतना एक हुक 120 फीट की गहराई पर अटकी है। उसे बाहर निकालने की अब तक 4 कोशिशें फेल रही हैं। परिवार ने बुधवार को प्रशासन पर लापरवाही का भी आरोप लगाया था।
सबसे पहले जानिए- कहां हुआ हादसा
बुधवार रात 11 बजे कोटपूतली-बहरोड़ कलेक्टर कल्पना अग्रवाल घटनास्थल पर पहुंचीं। कलेक्टर छुट्टियों पर थीं। उन्होंने एनडीआरएफ इंचार्ज योगेश कुमार मीना से रेस्क्यू प्लान के बारे में बातचीत की।
बुधवार रात 11 बजे कोटपूतली-बहरोड़ कलेक्टर कल्पना अग्रवाल घटनास्थल पर पहुंचीं। कलेक्टर छुट्टियों पर थीं। उन्होंने एनडीआरएफ इंचार्ज योगेश कुमार मीना से रेस्क्यू प्लान के बारे में बातचीत की।
कलेक्टर ने बताया क्यों हो रही देरी
सोमवार दोपहर से चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को देखने के लिए कोटपूतली-बहरोड़ जिला कलेक्टर कल्पना अग्रवाल बुधवार देर रात मौके पर पहुंची। उन्होंने पूरे ऑपरेशन को लेकर अधिकारियों से बात की। कलेक्टर का कहना है कि रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है, इस ऑपरेशन को एक मिनट भी नहीं रोका गया है।
उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ की टीम पहले भी ऐसे रेस्क्यू ऑपरेशन को लीड कर चुकी है। अग्रवाल ने कहा कि- पाइलिंग मशीन के लिए काफी तैयारियां करनी पड़ती है। ये मशीन काफी बड़ी होती है। ये एक बड़े ट्रेलर पर लोड होती है। मशीन को यहां तक पहुंचाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। हमें सड़कें बनानी पड़ीं। कई बिजली के पोल हटाने पड़े। इस वजह से देरी हुई
रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़ी PHOTOS…
रात 3 बजे तक पाइलिंग मशीन से 150 फीट गड्ढा खोद दिया गया, लेकिन नीचे पत्थर आने की वजह से काम रोक दिया गया।
रात को बोरवेल के जरिए भी रेस्क्यू का काम रुका रहा। मौके पर एनडीआरएफ टीम के अलावां कोई मौजूद नहीं था।
हर 30 फीट की खुदाई के बाद सुरंग में एक 4 फीट व्यास का लोहे का पाइप डालकर वेल्डिंग की गई।
बुधवार रात चेतना की मां धोली देवी की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद डॉक्टर को बुलाकर चेकअप करवाया गया है। धोली देवी ने सोमवार से ही कुछ भी नहीं खाया-पीया है।
पाइलिंग मशीन ने बुधवार सुबह 8 बजे खुदाई शुरू की थी।
एनडीआरएफ की टीम भी लगातार प्लान-A के जरिए बच्ची को रेस्क्यू करने के लिए जुटी रही।
