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हरिद्वार में रोकी गई यति नरसिंहानंद की धर्म संसद:बोले-सुप्रीम कोर्ट के जजों से पूछूंगा हम ऐसे ही मरते रहेंगे; कोर्ट मुझे जेल भेजेगा, मैं तैयार हूं

हरिद्वार में रोकी गई यति नरसिंहानंद की धर्म संसद:बोले-सुप्रीम कोर्ट के जजों से पूछूंगा हम ऐसे ही मरते रहेंगे; कोर्ट मुझे जेल भेजेगा, मैं तैयार हूं

गाजियाबाद2 घंटे पहले

हरिद्वार के जूना अखाड़े में आज से शुरू होने वाली संतों की धर्म संसद को प्रशासन ने अनुमति नहीं दी है। इससे संत समाज में आक्रोश है। जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद ने कहा-प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के नाम पर गुंडागर्दी कर रहा है।

अब मैं सुप्रीम कोर्ट जाऊंगा और अनशन करूंगा। न्यायधीशों से पूछुूंगा कि हमारा क्या दोष है? क्या हम ऐसे ही मरते रहेंगे? सुप्रीम कोर्ट मुझे जेल भेजेगा या मेरा कत्ल करवाएगा, मैं तैयार हूं।

वहीं संत धर्म संसद को लेकर मुखर है। जिससे टकराव की आशंका बनी हुई है। संतों का कहना है अनुमति को लेकर रक्त से लिखे पत्र मुख्यमंत्री को भेजे हैं। धर्म संसद की अनुमति मिलनी चाहिए थी। यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था, इसमें बांग्लादेश में मारे गए हिंदुओं को श्रद्धांजलि देनी थी।

धर्म संसद में साधु संत और धर्म के ज्ञाता भाग ले रहे हैं।
धर्म संसद में साधु संत और धर्म के ज्ञाता भाग ले रहे हैं।
पढ़िए यति नरसिंहानंद क्या बोले

हरिद्वार में हो रही धर्म संसद की अनुमति न मिलने पर यति नरसिंहानंद और संत समाज में रोष है। यति नरसिंहानंद ने कहा-यहां उन लोगों को श्रद्धांजलि देनी थी, जो हिंदू बांग्लादेश में मारे गए हैं। पुलिस प्रशासन ने गुंडागर्दी दिखाते हुए पूरी ताकत लगाकर इसे खत्म कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के नाम पर सरकार व प्रशासन ने हमसे गुंडागर्दी की है। परसों हम अपने यज्ञ की पूर्ण आहूति करने के बाद यहां सेचल देंगे। सुप्रीम कोर्ट तक पैदल जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट में अनशन कर करेंगे। वहां न्यायधीशों से पूछेंगे कि हमारी क्या गलती है? क्या इसलिए की आपका अहंकर संतुष्ट होता है? हम ऐसे ही मारे जाते रहें? हमारी ऐसे ही हत्या ही होती रहे?

मैं सुप्रीम कोर्ट में आमरण अनशन करूंगा। सुप्रीम कोर्ट मुझे जेल में भेजेगा या मेरा कत्ल करवाएगा। इसके लिए मैं तैयार हूं। हमारे धैर्य की परिकाष्ठाएं पार हो चुकी हैं। मैं देखूंगा कि सुप्रीम कोर्ट के नाम पर यह गुंडागर्दी क्यों हो रही है? यति नरसिंहानंद का कहना है कि शनिवार तक महायज्ञ चल रहा है, और महायज्ञ की आहुति पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट तक पैदल पदयात्रा की जाएगी।

जानिए क्यों नहीं मिली अनुमति

दरअसल 3 साल पहले हरिद्वार में ऐसी ही धर्म संसद हुई थी। इसमें हेट स्पीच का मामला दिल्ली तक गूंजा था। जिसके बाद प्रशासन धर्म संसद को लेकर पूरी तरह सतर्क है। यह धर्म संसद भूपतवाला स्थित वेद निकेतन धाम में तीन दिन चली थी। इसका विषय ‘इस्लामिक भारत में सनातन का भविष्य’ था।

इसमें स्वामी अमृतानंद, स्वामी सत्यव्रतानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरि, स्वामी वेदांत प्रकाश सरस्वती, स्वामी परमानंद, स्वामी ललितानंद महाराज, पंडित अधीर कौशिक समेत कई राज्यों के करीब 500 महामंडलेश्वर-संत शामिल हुए थे।

हेट स्पीच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की गई थी। इस साल दिसंबर में भी हरिद्वार में धर्म संसद हो रही है। पहले यह यूपी के गाजियाबाद में होनी थी, लेकिन यूपी पुलिस के नोटिस देने और धर्म संसद की परमिशन नहीं देने पर इसके हरिद्वार में ले जाया गया है।

यति नरसिंहानंद ने बुधवार को उत्तराखंड के सीएम को खून से पत्र लिखा।
यति नरसिंहानंद ने बुधवार को उत्तराखंड के सीएम को खून से पत्र लिखा।
संत बोले-धर्म संसद कर अनुमति मिलनी चाहिए

सुप्रीम कोर्ट से यह पूछा जाएगा कि आखिर हमारा दोष क्या है? इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के बाहर ही धरना दिया जाएगा। वहीं प्रशासन के साथ हुई संतों की बैठक के बाद प्रशासन ने साफ-साफ कह दिया है कि धर्म संसद के आयोजन की अनुमति नहीं दी जा सकती। जबकि संतों का कहना है कि वह आयोजन सार्वजनिक स्थल पर नहीं बल्कि जूना अखाड़े में कर रहे हैं इसलिए उन्हें इसकी अनुमति मिलनी चाहिए।

संतों की ओर से कहा गया है कि वह कोई राजनीतिक या विद्वेष कार्यक्रम नहीं कर रहे, बल्कि बंग्लादेश में हो रहे हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ रोष को लेकर कार्यक्रम कर रहे हैं। इसलिए उन्हें जूना अखाड़े में विश्व धर्म संसद आयोजित करने की अनुमति मिलनी ही चाहिए।

जूना अखाड़ा में टेंट लगा है। जहां बगुलामुखी यज्ञ जारी है। इसी स्थल को धर्मसंसद के लिए निश्चित किया गया है। फिलहाल प्रशासन संतों के आयोजन पर नजर रखे है। पुलिस और इंटेलिजेंस ने भी संतों के आयोजन पर नजर गड़ा रखी है। हरिद्वार कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा ने बताया कि प्रशासन की ओर से धर्म संसद की अनुमति नहीं दी गई है। उसका पूरी तरह से पालन कराया जाएगा।

यति नरसिंहानंद और संत।
यति नरसिंहानंद और संत।
आखिर क्यों आयोजित हो रही धर्म संसद
महामंडलेश्वर का कहना है कि इसका उद्देश्य है हिंदू धर्म को बचाना। यदि धर्म नहीं बचेगा तो भारत की हालत आने वाले समय में बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसी हो जाएगी। सनातन धर्म हिंदू से है। बताया जा रहा है कि धर्म संसद में कालीचरण महाराज, श्री हरिगिरी जी महाराज और अन्य महामंडलेश्वर और धर्म के ज्ञाता भी शामिल होंगे।

12 दिसंबर से बाग्लामुखी महायज्ञ शुरू चल रहा है, जो दस दिन तक चलेगा। यह पूर्ण आहूति तक चलेगा। धर्म संसद 19 दिसंबर से शुरू होकर 21 दिसंबर तक चलेगी।

2021 में हरिद्वार धर्म संसद में जाना पड़ा था जेल
दिसंबर 2021 में विश्व धर्म संसद हरिद्वार के वेद निकेतन में आयोजित हुई थी। यह धर्म संसद 17 से 19 दिसंबर तक चली थी। यति नरसिंहानंद लगातार मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बयान देते रहे हैं। जहां पुलिस प्रशासन उनके बयान को हेट स्पीच मानता है। 3 साल पहले धर्म संसद खत्म होने के एक माह बाद हरिद्वार पुलिस ने उन्हें हेट स्पीच के मामले में जेल भेजा। जहां वह हरिद्वार में 32 दिन तक जेल रहे। इसमें जितेंद्र त्यागी भी जेल गए थे।

10 बार जेल गया, कभी खाना नहीं खाया
यति नरसिंहानंद का कहना है कि पिछले 21 साल में मुझे 10 बार जेल जाना पड़ा। गाजियाबाद में हस हाउस के विरोध में हमने लड़ाई लड़ी। जहां 2003 में पहली बार पुलिस ने अरेस्ट कर जेल भेजा। उनका कहना है कि कभी भी जेल का खाना नहीं खाया। मैं अपराधी नहीं हूं, मैं सनातनी हूं, और हिंदु धर्म के लिए हमेशा लड़ता रहूंगा। हरिद्वार जेल में मेरे लिए अपने फल बाहर से आते थे, मैं जेल का कुछ नहीं खाता।

यज्ञ में आहुति देते साधु-संत।
आखिर कौन हैं यति नरसिंहानंद गिरी…

यति नरसिंहानंद सरस्वती का असली नाम दीपक त्यागी है। वे उत्तर प्रदेश में जिला बुलंदशहर के हिरनोट गांव के मूल निवासी हैं। हापुड़ के चौधरी ताराचंद इंटर कॉलेज से शुरुआती पढ़ाई करके वे 1989 में केमिकल टेक्नोलॉजी की डिग्री लेने मॉस्को चले गए थे।

1994 में उन्होंने डिग्री हासिल की और 1996 में भारत लौट आए। दिसंबर 1996 में परिवार ने शादी की, भारत लौटने से पहले दीपक त्यागी ने मॉस्को में ही इंजीनियर के तौर पर नौकरी की। शादी के कुछ समय बाद ही घर छोड़ दिया।

साल-1998 में यति की मुलाकात भाजपा नेता बीएल शर्मा से हुई और इसके बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। घरेलू जीवन से संन्यास लेकर दीपक त्यागी ने अपना नाम दीपेंद्र नारायण सिंह रखा। बाद में वो यति नरसिंहानंद गिरि हो गए। साल-2007 से यति गाजियाबाद में डासना देवी मंदिर के पीठाधीश्वर हैं। फिलहाल हिंदुओं के सबसे बड़े सम्प्रदाय जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर हैं।

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