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मोदी बोले- कांग्रेस संविधान का शिकार करती रही:संविधान संशोधन करने का खून कांग्रेस के मुंह लगा, 6 दशक में इसे 75 बार बदला

मोदी बोले- कांग्रेस संविधान का शिकार करती रही:संविधान संशोधन करने का खून कांग्रेस के मुंह लगा, 6 दशक में इसे 75 बार बदला
नई दिल्ली12 घंटे पहले

पीएम नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संविधान पर चर्चा के दौरान कांग्रेस को संविधान का शिकार करने वाली पार्टी बताया। उन्होंने 1 घंटे 49 मिनट की स्पीच में कहा कि संविधान संशोधन करने का ऐसा खून कांग्रेस के मुंह लग गया कि वह समय-समय पर संविधान का शिकार करती रही। संविधान की आत्मा को लहूलुहान करती रही। करीब 6 दशक में 75 बार संविधान बदला गया।

उन्होंने कहा कि इतिहास कह रहा है कि नेहरू से लेकर राजीव गांधी तक सभी ने संविधान का दुरुपयोग किया। इनकी नई पीढ़ी भी उसी रास्ते पर है। नेहरू जी से राजीव गांधी तक कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों ने आरक्षण का विरोध किया। नेहरू जी ने लंबी-लंबी चिट्ठियां लिखीं।

मोदी बोले- इमरजेंसी आई, संवैधानिक व्यवस्थाओं को खत्म कर दिया। देश को जेलखाना बना दिया, अधिकारों को लूट लिया, प्रेस की स्वतंत्रता को ताले लगा दिए। कांग्रेस के माथे पर ये जो पाप है, वो कभी भी धुलने वाला नहीं है। जब लोकतंत्र की चर्चा होगी, ये पाप धुलने वाला नहीं है।

मोदी 5 बजकर 45 मिनट पर लोकसभा में पहुंचे थे। 5 बजकर 57 मिनट पर बोलना शुरू किया और 7 बजकर 46 मिनट भाषण खत्म किया।
4 आरोप लगाए, कहा- नेहरूजी ने संविधान संशोधन का बीज बोया, परिवार ने आगे बढ़ाया

1. 6 दशक में 75 बार संविधान बदला: संविधान संशोधन करने का ऐसा खून कांग्रेस के मुंह लग गया कि वह समय-समय पर संविधान का शिकार करती रही। संविधान की आत्मा को लहूलुहान करती रही। करीब 6 दशक में 75 बार संविधान बदला गया। जो बीज देश के पहले प्रधानमंत्री ने बोया था, उसे खाद-पानी देने का काम इंदिरा गांधी, राजीव गांधी ने किया। उनकी नई पीढ़ी उसे आगे बढ़ा रही।

2. कांग्रेस का पाप कभी धुलने वाला नहीं: संविधान यात्रा के 25 साल पूरे हो रहे थे, उसी वक्त हमारे देश में संविधान को नोच दिया गया। इमरजेंसी आई, संवैधानिक व्यवस्थाओं को खत्म कर दिया। देश को जेलखाना बना दिया, अधिकारों को लूट लिया, प्रेस की स्वतंत्रता को ताले लगा दिए। कांग्रेस के माथे पर ये जो पाप है, वो कभी भी धुलने वाला नहीं है। जब लोकतंत्र की चर्चा होगी, ये पाप धुलने वाला नहीं है।

3. ..क्योंकि कांग्रेस के पेट में पाप था: कांग्रेस ने लगातार संविधान की अवमानना की। उसके महत्व को कम किया। कांग्रेस इसके अनेक उदाहरणों से भरी है। बहुत कम लोग जानते होंगे, 370 का पता होगा, 35-A का कम लोगों को पता था। संसद में आए बिना संसद को ही अस्वीकार कर दिया गया। संविधान का पहला पुत्र संसद है, उसका भी गला घोंटने का काम किया। 35-A को थोप दिया, ये न होता तो जम्मू-कश्मीर की हालत ऐसी नहीं होती। राष्ट्रपति के आदेश पर यह काम हुआ और देश को अंधेरे में रखा, क्योंकि पेट में पाप था, जनता से छिपाना चाहते थे।

4. कांग्रेस को अपनी पार्टी का संविधान स्वीकार नहीं: जो लोग संविधान में लोगों के नाम ढूंढते हैं, कांग्रेस के एक अध्यक्ष हुआ करते थे अति पिछड़े समाज के थे। उनके अध्यक्ष सीताराम केसरी का कैसा अपमान किया था। कैसे बाथरूम में बंद कर दिया था। उठाकर फुटपाथ पर फेंक दिया। अपनी पार्टी के संविधान को ना मानना, लोकतंत्र को ना मानना, पूरी कांग्रेस पार्टी पर एक परिवार ने कब्जा कर लिया है।

पूरे गांधी परिवार पर: 75 साल में से 55 साल राज किया
कांग्रेस के एक परिवार ने संविधान को चोट पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। एक परिवार का उल्लेख इसलिए करता हूं कि 75 साल में से 55 साल एक ही परिवार ने राज किया है। देश को क्या-क्या हुआ है, ये जानने का अधिकार है। इस परिवार के कुविचार, कुरीति, कुनीति की परंपरा निरंतर चल रही है। हर स्तर पर इस परिवार ने संविधान को चुनौती दी है।

नेहरू पर: संविधान रास्ते में आए तो परिवर्तन करना चाहिए
1952 से पहले राज्यसभा भी नहीं थी। राज्यों में भी चुनाव नहीं थे। कोई जनादेश नहीं था। अभी-अभी तो संविधान निर्माताओं ने इतना मंथन किया था। 1951 इन्होंने ऑर्डिनेंस लाकर संविधान को बदला। अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला कर दिया गया। संविधान निर्माताओं की नहीं चलने दी।

अपने मन की चीजें, जो संविधान सभा के भीतर नहीं करवा पाए, पिछले दरवाजे से किया, चुनी हुई सरकार के प्रधानमंत्री नहीं थे। उन्होंने पाप किया। उसी दौरान प्रधानमंत्री नेहरू जी ने मुख्यमंत्रियों को एक चिट्ठी लिखी- अगर संविधान हमारे रास्ते के बीच में आ जाए तो हर हाल में संविधान में परिवर्तन करना चाहिए।

1951 में ये पाप किया गया। राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि गलत हो रहा है। स्पीकर ने भी कहा, आचार्य कृपलानी, जेपी जैसे महान लोगों ने भी रोकने को कहा। पंडित जी का अपना संविधान चलता था। उन्होंने सलाह नहीं मानी।

इंदिरा पर: उन्होंने इमरजेंसी थोपी, कुर्सी के लिए फैसला लिया
संसद संविधान के किसी भी आर्टिकल में जो मन आए कर सकती है और अदालत उसकी तरफ नहीं देख सकती। ये पाप 1971 में इंदिरा गांधी ने किया था। इस बदलाव ने इंदिरा जी की सरकार को मौलिक अधिकारों को छीनने का और न्यायपालिका पर नियंत्रण करने का अधिकार दिया था। इंदिरा जी के चुनाव को गलत नीति के कारण अदालत ने खारिज कर दिया।

उनको एमपी पद छोड़ने की नौबत आई तो उन्होंने गुस्से में देश में इमरजेंसी थोप दी, अपनी कुर्सी बचाने के लिए। उन्होंने 1975 में 39 बार संशोधन किया। उसमें राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, अध्यक्ष इनके चुनाव के खिलाफ कोई कोर्ट में जा ही नहीं सकता, ऐसा काम किया। पीछे का भी बदलाव कर दिया।

इमरजेंसी में लोगों के अधिकार छीने गए, हजारों लोगों को जेलों में डाल दिया गया। न्यायपालिका का गला घोंटा गया, अखबारों की स्वतंत्रता पर ताले लगा दिए। जस्टिस एचआर खन्ना ने उनके चुनाव में खिलाफ जजमेंट दिया, इतना गुस्सा भरा था कि जस्टिस खन्ना सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बनने थे, उन्हें चीफ जस्टिस नहीं बनने दिया।

राजीव पर: वोट बैंक के लिए शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट दिया
संविधान को चूर-चूर करने की परम्परा नेहरूजी ने शुरू की, इंदिराजी ने आगे बढ़ाया, राजीवजी ने खाद-पानी दी। उनके मुंह लहू लग गया था। अगली पीढ़ी भी इसी खिलवाड़ में जुटी है। सुप्रीम कोर्ट ने शाहबानों का जजमेंट दिया था। राजीव गांधी ने शाहबानो की उस भावना को सुप्रीम कोर्ट की भावना को नकार दिया।

राजीव जी ने वोट बैंक की भावना के आगे संविधान की भावना को नकार दिया। वृद्ध महिला का साथ देने की बजाय कट्टरपंथियों का साथ दिया। संसद में कानून बनाकर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलट दिया गया।

सोनिया पर: मनमोहन सरकार में PMO के ऊपर एडवाइजरी काउंसिल बैठा दी गई
एक किताब को कोट कर रहा हूं। उसमें लिखा है, ‘मुझे यह स्वीकार करना होगा, पार्टी अध्यक्ष सत्ता का केंद्र है। सरकार पार्टी के प्रति जवाबदेह है।’ ये मनमोहन सिंह ने कहा है। इतिहास में पहली बार संविधान को ऐसी गहरी चोट पहुंचा दी गई, संविधान निर्माताओं ने चुनी हुई सरकार और पीएम की कल्पना बनाई।

मनमोहन सरकार में प्रधानमंत्री के ऊपर एक गैर संवैधानिक नेशनल एडवाइजरी काउंसिल बैठा दी गई। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के बराबर अघोषित दर्जा दे दिया गया।

राहुल पर: एक अहंकारी व्यक्ति ने कैबिनेट का फैसला फाड़ दिया
एक और पीढ़ी आगे चलते हैं… उसने क्या किया। संविधान के तहत जनता सरकार चुनती है। सरकार का मुखिया कैबिनेट बनाता है। इस कैबिनेट का जो फैसला लिया, संविधान का अपमान करने वाले अहंकार से भरे लोगों ने पत्रकारों के सामने कैबिनेट के निर्णय को फाड़ दिया। दुर्भाग्य देखिए एक अहंकारी व्यक्ति कैबिनेट का फैसला फाड़ दे और कैबिनेट अपना फैसला बदल दे। ये कौन सी व्यवस्था है।

संविधान निर्माता धर्म के आधार पर आरक्षण के खिलाफ थे
जब संविधान निर्माण चल रहा था, तब निर्माताओं ने धर्म के आधार पर आरक्षण हो या ना हो, इस विषय पर घंटों-दिनों गहन चर्चा की। सबका मत बना कि भारत जैसे देश की एकता-अखंडता के लिए धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं हो सकता है। सत्ता सुख के लिए, सत्ता की भूख के लिए, वोट बैंक के लिए धर्म के आधार पर आरक्षण का नया खेल खेला है। कुछ जगह दे भी दिया। अब सुप्रीम कोर्ट से झटके लग रहे हैं।

ज्वलंत विषय समान नागरिक संहिता, ये विषय भी संविधान सभा के ध्यान में था। उसने UCC पर गहन चर्चा की, उन्होंने फैसला किया कि अच्छा होगा, जो सरकार चुनकर आए, वो उस पर फैसला करे। अंबेडकर ने धार्मिक आधार पर बने पर्सनल लॉ को खत्म करने की वकालत की थी। उस समय केएम मुंशी ने कहा था कि समान नागरिक संहिता राष्ट्रीय एकता और आधुनिकता के लिए अनिवार्य है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार कहा कि देश में UCC लाना चाहिए। सरकारों को आदेश दिए हैं। उसे ध्यान में रखते हुए हम पूरी ताकत से लगे हैं- सेकुलर सिविल कोड के लिए। आज कांग्रेस के लोग सुप्रीम कोर्ट का भी निरादर कर रहे हैं, क्योंकि उनकी राजनीति को सूट नहीं कर रहा। उनके लिए संविधान राजनीति, खेल खेलने, डराने का हथियार है।

मोदी ने कांग्रेस का ‘जुमला’ बताया, 11 संकल्प सदन में रखे

हमने (एनडीए) भी संविधान संशोधन किए हैं। देश की एकता के लिए, अखंडता के लिए, उज्ज्वल भविष्य के लिए, संविधान की भावना के प्रति पूर्ण समर्पण के साथ किए। देश का ओबीसी समाज तीन-तीन दशक से ओबीसी कमीशन के संवैधानिक दर्जे की मांग कर रहा था। उसे दर्जा देने के लिए हमने संविधान संशोधन किया है।
कांग्रेस के साथियों को एक शब्द प्रिय है। वो शब्द है जुमला, हमारे कांग्रेस के साथी को दिन-रात जुमला याद रहता है। देश को पता है कि हिंदुस्तान में अगर सबसे बड़ा जुमला कोई था और वो 4-4 पीढ़ी ने चलाया, वो था गरीबी हटाओ। ये ऐसा जुमला था कि उनकी राजनीति की रोटी सिंकती थी, लेकिन गरीब का हाल ठीक नहीं होता था।
1996 में सबसे बड़े दल के रूप में भाजपा जीतकर आई। राष्ट्रपति ने संविधान के तहत भाजपा को पीएम की शपथ के लिए बुलाया। 13 दिन सरकार चली। अगर हमें संविधान की आत्मा के प्रति भावना ना होती तो हम भी ये बांटो, ये दे-दो, ये पद दे दो। हम भी सत्ता सुख भोग सकते थे। अटल जी ने सौदेबाजी नहीं की, संविधान का रास्ता दिया। 13 दिन बाद इस्तीफा दे दिया।

प्रियंका बोलीं- पीएम का भाषण बोरिंग, गणित के डबल पीरियड में बैठने जैसा
प्रियंका गांधी ने लोकसभा में पीएम मोदी के 1 घंटा 49 मिनट के भाषण को बोरिंग करार दिया। उन्होंने कहा- मैंने सोचा था कि पीएम कुछ नया, कुछ अच्छा बोलेंगे। लेकिन मैं बोर हो गई। ये स्कूल में गणित के डबल पीरियड में बैठने जैसा था। पीएम ने एक भी बात नई नहीं कही। उनके भाषण के दौरान नड्डा हाथ मल रहे थे। अमित शाह सिर पर हाथ रखे थे। पीयूष गोयल सोने जा रहे थे।

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