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बच्चे को गोली मारी, टीचर को काटा, फिर सुलगा मणिपुर:एक-दूसरे के गांव जला रहे कुकी-मैतेई, CRPF की गोली से मरे 10 लोग कौन

बच्चे को गोली मारी, टीचर को काटा, फिर सुलगा मणिपुर:एक-दूसरे के गांव जला रहे कुकी-मैतेई, CRPF की गोली से मरे 10 लोग कौन

इंफाल13 घंटे पहलेलेखक: देवांशु तिवारी

‘11 नवंबर 2024, दोपहर के करीब 2:30 बज रहे होंगे। मैं लंच के लिए नानी के घर गया था। छोटा भाई बाहर बरामदे में खेल रहा था। मां और मौसी खाना बना रही थीं। अचानक जोर-जोर से चिल्लाने की आवाजें आने लगीं। मैं बाहर भागा। देखा कि 15 से 20 लड़के घरों में आग लगा रहे हैं। उन्होंने आर्मी की ड्रेस पहन रखी थी, हाथ में बंदूकें थीं।’

‘गांव के लोग बचने के लिए भाग रहे थे। मैं भाई को लेकर घर के अंदर गया और सबसे भागने के लिए कहा। तभी 4-5 लड़के घर में घुस आए। मेरी बहन और मौसी को धक्का मारकर गिरा दिया। मां और नानी को पीटा। उनके बाल पकड़कर घसीटने लगे।’

‘उन्होंने मां, बहन, मौसी और नानी को खूब मारा। फिर बंदूक दिखाकर बाहर खड़ी वैन में बैठने के लिए कहा। घर के बगल में CRPF कैंप है। मां ने मुझे और छोटे भाई को उस तरफ भागने का इशारा किया। हम कैंप की तरफ दौड़े, तो उन लड़कों ने हमारे ऊपर गोलियां चलाईं। हम जान बचाकर CRPF कैंप तक पहुंच गए। मैंने भाई को बचा लिया, लेकिन हमलावर मां को उठा ले गए।’

तेलम रोशन सिंह की उम्र सिर्फ 14 साल है। उनका परिवार मणिपुर के जकुराडोर गांव में रहता था। 3 मई, 2023 से कुकी और मैतेई के बीच हिंसा झेल रहा मणिपुर फिर सुलग रहा है। विधायकों-मंत्रियों के घरों पर हमले हो रहे हैं। घरों से लोगों को अगवा कर हत्या की जा रही है। बीते 20 दिन में ही 21 मौतें हो चुकी हैं। इस बार हिंसा का सेंटर जिरीबाम जिला है। यहां 7 नवंबर के बाद से तीन बड़ी घटनाएं हुई हैं।

असम के सिलचर से जिरिबाम सिर्फ 48 किमी दूर है। भास्कर रिपोर्टर ने 14 से 21 नवंबर के दौरान तीन बार जिरीबाम जाने की कोशिश की, लेकिन हिंसा वाली जगह बोरोबेकरा तक नहीं पहुंच सके।

बोरोबेकरा में भड़की हिंसा में ही तेलम रोशन सिंह ने अपना परिवार खो दिया। उनका गांव जिरीबाम टाउन से करीब 29 किलोमीटर दूर है। ये जगह असम और मणिपुर को अलग करने वाली जिरी और बराक नदी की तलहटी पर है।

20 दिन से जल रहा जिरीबाम, यहीं से शुरू हुई हिंसा
जंगल और पहाड़ों से घिरा जिरीबाम बीते 20 दिन से जल रहा है। भास्कर रिपोर्टर देवांशु तिवारी 23 नवंबर को मणिपुर की राजधानी इंफाल से 250 किमी दूर जिरीबाम के बोरोबेकरा गांव पहुंचे। मणिपुर में फिर से हिंसा भड़कने की शुरुआत इसी गांव से हुई है।

सफर मणिपुर की राजधानी इंफाल से शुरू हुआ था। इस दौरान कुल 250 किमी दूरी तय की।
11 नवंबर को यहां की तीन महिलाओं और तीन बच्चों को अगवा कर लिया गया। बाद में सभी की डेडबॉडी मिलीं। शरीर पर गोलियों के निशान थे। मरने वाले मैतेई थे और हमले का आरोप संदिग्ध कुकी मिलिटेंट्स पर है। इसी दिन एनकाउंटर में 10 कुकी की मौत हो गई। पुलिस इन्हें मिलिटेंट बता रही है। इससे पहले 7 नवंबर को एक महिला टीचर के हाथ-पैर काटकर गोली मार दी गई थी।

महिला टीचर का मर्डर, बदले के लिए गांव पर हमला और 18 मौतें
तेलम रोशन सिंह के गांव जकुराडोर पर हमले का सिरा 7 नवंबर को हुई घटना से जुड़ा है। असम-मणिपुर के बॉर्डर पर एक गांव है जायरॉन। यहां कुकी, हमार, नेपाली और बंगाली कम्युनिटी के लोग रहते हैं।

7 नवंबर को गांव पर करीब 50 लोगों ने हमला किया था। आरोप है कि इसी दौरान 31 साल की एक महिला टीचर से रेप किया गया, उसके हाथ-पैर काटकर गोली मारी और जिंदा जला दिया।

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने जिरीबाम में चल रही हिंसा से जुड़े तीन मामलों में केस दर्ज किया है। इनमें महिला टीचर की हत्या का मामला भी शामिल है।
घटना के बारे में पता करने हम जायरॉन पहुंचे। ये गांव बोरोबेकरा से 20 किमी दूर है। यहां हमें महिला टीचर के एक रिश्तेदार मिले। वे कैमरे पर नहीं आना चाहते थे, इसलिए हमने उनसे बिना कैमरे के ही बात की।

वे बताते हैं, ‘शाम के करीब 7:30 बजे थे। मैतेई ग्रुप अरामबाई टेंगोल के लोग गांव में घुसकर घरों को जलाने लगे। उनके पास बंदूकें और बम थे। रात 9 बजे तक उन्होंने 17 घरों में आग लगा दी। लोग बचने के लिए जंगल की तरफ भागे, लेकिन मीना (बदला हुआ नाम) गांव में ही फंस गईं।’

‘मीना हमार कम्युनिटी से थी। उसके तीन बच्चे हैं। प्रेग्नेंट होने की वजह से मीना स्कूल नहीं जा रही थी। गांव पर हमला हुआ तो वो तेजी से भाग नहीं पाई। अरामबाई टेंगोल के लोगों ने उसे पकड़ लिया। उसका रेप किया और हाथ-पैर काटकर गोली मार दी। उसका घर जला दिया। उसके पति, सास और ससुर जंगल में छिपे थे, इसलिए मीना को बचा नहीं पााए।’

जायरॉन गांव की मीना को इसी घर में जलाकर मार दिया गया। वे गांव में ही प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थीं।
जायरॉन गांव की मीना को इसी घर में जलाकर मार दिया गया। वे गांव में ही प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थीं।
मीना के पड़ोस में रहने वाले 24 साल के समकाइलिंग हमार बताते हैं, ‘हमारे गांव से सटी एक मुस्लिम बस्ती है। वहां के लोगों ने बताया कि उन्होंने 9-10 जिप्सियों से मैतेई मिलिटेंट को गांव में घुसते देखा था। जायरॉन गांव में विलेज डिफेंस फोर्स नहीं है, क्योंकि गांव के पास ही CRPF का कैंप है। उस दिन हमलावर घरों में आग लगा रहे थे, तो हमें बचाने कोई नहीं आया।’

जायरॉन गांव के लोग महिला टीचर से रेप का दावा कर रहे हैं, लेकिन पुलिस ने अब तक इसकी पुष्टि नहीं की है। हालांकि, पति की ओर से दर्ज कराई गए FIR में रेप की धाराएं जोड़ी गई हैं।

जिरीबाम के SP खमनम रॉबिनसन सिंह ने शुक्रवार, 22 नवंबर को जिला मजिस्ट्रेट कृष्ण कुमार को लेटर लिखकर असम के सिलचर जिले में महिला का पोस्टमॉर्टम कराने की परमिशन मांगी थी। उनका कहना है कि जिरीबाम में पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं और डेडबॉडी को इंफाल ले जाने में परेशानी होगी।

ये विजुअल जायरॉन गांव का है। यहां हमलावरों ने घरों में घुसकर आग लगा दी थी।
अगली घटना: जकुराडोर गांव पर हमला
तारीख: 11 नवंबर, 2024
जिरीबाम के बोरोबेकरा इलाके में पहुंचने के लिए 8 से 10 कुकी और मैतेई आबादी वाले गांव पार करना पड़ता है। यहां विलेज डिफेंस फोर्स के चेक पॉइंट्स बने हैं, जहां से बिना चेकिंग के कोई गाड़ी आगे नहीं बढ़ती। इस एरिया में कुकी गांव में मैतेई और मैतेई गांव में कुकी समुदाय के लोगों का जाना मना है। अगर कोई बॉर्डर क्रॉस करता है, तो उसकी मौत तय है।

हमने बोरोबेकरा जाने के लिए जिरीबाम में मुस्लिम ड्राइवर खोजा। सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लोग ही कुकी-मैतेई बॉर्डर को बिना रुकावट पार कर सकते हैं। हम 3 घंटे का सफर तय कर हिंसा वाले स्पॉट बोरोबेकरा पहुंचे। यहीं पुलिस स्टेशन और CRPF कैंप के करीब बसे जकुराडोर गांव में हिंसा हुई थी।जकुराडोर गांव से सामने ही CRPF का कैंप दिखता है। इसके बावजूद मिलिटेंट्स ने

गांव पर हमला किया।
जकुराडोर गांव से सामने ही CRPF का कैंप दिखता है। इसके बावजूद मिलिटेंट्स ने गांव पर हमला किया।
CRPF कैंप के सामने 15 घर जलाए, महिलाओं-बच्चों को ले गए
जकुराडोर मैतेई गांव है। यहां करीब 20 परिवार रह रहे थे। गांव से सिर्फ 50 मीटर दूर CRPF कैंप और 400 मीटर दूर पुलिस स्टेशन है। इसके बावजूद हमला कैसे हुआ, अब ये बताने के लिए गांव में कोई नहीं बचा है। सिर्फ जले मकान, गाड़ियां और उनका मलबा है।

हमने यहां CRPF कैंप के गेट पर पहरा दे रहे एक जवान से बात की। उन्होंने सिर्फ इतना कहा- जो हुआ, बहुत गलत हुआ। मैं कुछ नहीं बता पाऊंगा। आप पुलिस स्टेशन से पता कर लो।

हम बोरोबेकरा पुलिस स्टेशन पहुंचे। यहां थाना प्रभारी एस. सुरेश सिंह से मुलाकात हुई। सुरेश हिंदी नहीं बोल पाते, इसलिए उन्होंने हवलदार चंद्रशेखर साहू से बात करवाई। चंद्रशेखर ने 11 नवंबर की घटना का पूरा हाल बताया।

2 ऑटो और वैन में आए थे 20 हमलावर, घरों पर रॉकेट दागे
चंद्रशेखर बताते हैं, ‘दोपहर 2:30 बजे के आसपास 20 से 23 मिलिटेंट दो ऑटो और एक वैन से आए और मार्केट की तरफ से गांव में घुसे। इस रास्ते पर ऑटो और वैन चलती रहती हैं, इसलिए कोई ये अंदाजा नहीं लगा पाया कि गाड़ियों में कौन है। गांव में घुसते ही उन लोगों ने रॉकेट दागना शुरू कर दिया। एक घंटे में पूरा गांव जला दिया।’

बोरोबेकरा पुलिस के मुताबिक, हमला करने से पहले मिलिटेंट दो ग्रुप में बंट गए थे। एक ग्रुप ने 6 लोगों को बंधक बनाया और 10 लोगों के दूसरे ग्रुप ने घरों में आग लगाई। उनके पास SLR, इंसास राइफल, AK-47 और RPG रॉकेट लॉन्चर थे, उन्हीं से हमला किया।

इस दौरान मैतेई परिवार के 6 लोगों को अगवा किया गया। सभी की डेडबॉडी 11 से 18 नवंबर के बीच बराक नदी के पास मिली थीं। हमले में 2 और लोगों की मौत हुई है।

गांव के लोग अब कहां हैं? हवलदार चंद्रशेखर जवाब देते हैं कि सुरक्षा के लिहाज से सभी गांववालों को जिरीबाम के एक स्कूल में बने रिलीफ कैंप भेज दिया गया है। इसके बाद हम विक्टिम फैमिली से मिलने रिलीफ कैंप पहुंचे।

महिलाओं को सीने में, ढाई साल के बच्चे को सिर में गोली मारी
11 नवंबर को जिन महिलाओं और बच्चों को अगवा किया गया, वे तेलम उत्तम सिंह के परिवार के हैं। उत्तम उस दिन परिवार के साथ नहीं थे, इसलिए बच गए। 22 नवंबर की रात उत्तम सिंह ने सभी 6 लोगों का अंतिम संस्कार किया।

इनमें उनकी सास युरेम्बम रानी देवी, पत्नी तेलम थोइबी देवी, बेटी तेलम थजामनबी देवी, साली लैशराम हेइतोनबी देवी थे। लैशराम हेइतोनबी देवी के 2 बच्चों ढाई साल के चिंगखेंगनबा सिंह और 8 महीने के लंगंबा सिंह की भी अगवा कर हत्या कर दी गई।

युरेम्बम रानी देवी, हेइतोनबी देवी और चिंगखेंगनबा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आ गई है। इसके मुताबिक, हेइतोनबी के सीने में 3 गोलियां मारी गई थीं। रानी देवी के सिर, पेट, हाथ में एक-एक और सीने में दो गोलियों के निशान मिले हैं। चिंगखेंगनबा को सिर पर गोली मारी गई।

गुवाहाटी में मजदूरी करने वाले उत्तम सिंह कहते हैं, ‘11 नवंबर को मैं गुवाहाटी में था। पत्नी ने मुझे फोन करके बताया कि गांव पर हमला हुआ है। कुछ लोग घरों में घुसकर आग लगा रहे हैं। गोलियां चला रहे हैं। मैं सब काम छोड़कर जिरीबाम के लिए निकल गया। यहां पहुंचने से पहले ही पता चला कि मेरे परिवार को किडनैप कर लिया गया है।’

इसी रिलीफ कैंप में रेशमी देवी भी रह रही हैं। वे उत्तम सिंह की दूसरी साली की बेटी हैं। उनकी दुकान और घर में भी आग लगा दी गई। हमलावरों ने रेशमी पर भी गोलियां चलाई थीं। उन्होंने पुलिस स्टेशन के अंदर छिपकर खुद को बचाया।

रेशमी बताती हैं, ‘हम लोग दोपहर में खाना खाने के बाद दुकान पर थे। तभी हथियार लिए लोग घर में घुस आए। मेरी दादी, दोनों मौसी और तीनों बच्चों को कार में डालकर ले गए। मुझे याद नहीं है, लेकिन वे 10-12 लोग थे। कुछ लड़कियां भी थीं, जो बंदूक लेकर खड़ी थीं। मैं बचने के लिए पुलिस स्टेशन की तरफ भागी, तो मुझ पर गोली चलाई। गोली मेरे सिर के ऊपर से निकल गई।’

एनकाउंटर में मरे 10 लड़कों को पुलिस ने मिलिटेंट बताया, कुकी संगठनों ने डिफेंस वॉलंटियर
11 नवंबर को CRPF और पुलिस ने 10 संदिग्ध मिलिटेंट को मार गिराने का दावा किया था। इनमें 7 चुराचांदपुर और तीन फेरजावल जिले के थे। NIA की टीम इन लोगों के करीबियों की तलाश कर रही है। इसलिए उनका परिवार कहीं शिफ्ट हो गया है।

मारे गए लोगों की डेडबॉडी सिलचर मेडिकल कॉलेज लाई गई थी। असम के हमार सुप्रीम हाउस ग्रुप, हमार स्टूडेंट एसोसिएशन और इंडिजिनस ट्राइब एडवोकेसी कमेटी के मेंबर डेडबॉडी लेने पहुंचे थे। ये संगठन मुठभेड़ में मारे गए 10 लड़कों को हीरो मानते हैं और उनके परिवारों की मदद के लिए आगे आए हैं।

हमार स्टूडेंट एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी लाक्सुथक हमार कहते हैं, ‘जिरीबाम में मारे गए कुकी लोगों को मिलिटेंट कहना गलत है। वे विलेज वॉलंटियर्स थे। वे 7 नवंबर को जायरॉन गांव में हुई घटना के बाद गुस्से में थे और मैतेई संगठन अरामबाई टेंगोल के लोगों का पीछा कर रहे थे।

लाक्सुथक हमार कहते हैं, ‘जिरीबाम में हुई हिंसा हमार आबादी वाले जायरॉन गांव में हुई घटना का बदला थी। वहां अरामबाई टेंगोल के लोगों ने 17 घरों को आग लगा दी थी और एक महिला का मर्डर कर दिया था।’

CM बीरेन सिंह बोले- CRPF नहीं होती, तो ज्यादा मौतें होतीं
मणिपुर के CM एन बीरेन सिंह ने जिरीबाम हिंसा पर कहा कि बोरोबेकरा में 10 कुकी मिलिटेंट्स ने एक गांव और रिलीफ कैंप में घुसने की कोशिश की। वहां 115 लोग रह रहे थे। CRPF ने मिलिटेंट्स की प्लानिंग फेल कर दी। CRPF न होती, तो कई लोगों की जान चली जाती।’

बीरेन सिंह ने आगे कहा…

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कुकी मिलिटेंट ने रॉकेट लॉन्चर और AK-47 जैसे आधुनिक हथियारों से पुलिस कैंप पर हमला किया। मैतेई परिवार के 6 लोगों को अगवा कर मार दिया। ये घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।

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IG बोले- हमलावरों के हथियार और कपड़े उनके मिलिटेंट होने का सबूत
मणिपुर के IG आईके मुइवा ने कुकी संगठनों के दावों को गलत बताया है, जिसमें कहा गया है कि मुठभेड़ में मारे जाने वाले लोग उग्रवादी नहीं थे। मुइवा ने कहा कि बोरोबेकरा में मारे गए मिलिटेंट्स के पास मिले हथियार और उनकी ड्रेस साबित करती हैं कि वे मिलिटेंट थे।’

जिरीबाम में चल रही हिंसा पर पुलिस का पक्ष जानने हम SP रॉबिन्सन सिंह के ऑफिस गए। उन्हें कॉल किया, लेकिन उनकी तरफ से रिस्पॉन्स नहीं मिला। उनके ऑफिस में मिले सूचना अधिकारी ने बताया कि सर अभी बिजी हैं। CRPF के साथ हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं।

मणिपुर में हाल में हुईं हिंसा की बड़ी घटनाएं

इंफाल में मंत्री और विधायकों के घरों पर हमला
16 नवंबर को भीड़ ने मुख्यमंत्री बीरेन सिंह और 17 विधायकों के घर पर हमला कर दिया था। मंत्री एल सुसींद्रो के घर को भी निशाना बनाया गया। करीब 3 हजार लोग घर के बाहर जुट गए। सुसींद्रो मैतेई समुदाय से आते हैं। विधायकों के घरों पर हमले के दौरान 1.5 करोड़ रुपए के जेवर लूटे जाने की बात सामने आई है

दो महीने पहले इंफाल वेस्ट के कोत्रुक में ड्रोन से गिराए थे बम
दो महीने पहले 1 सितंबर को इंफाल से 22 किमी दूर कोत्रुक गांव में ड्रोन से बम गिराए गए थे। इसका आरोप संदिग्ध कुकी मिलिटेंट्स पर था। हमले में एक महिला सुरबाला समेत दो लोगों की मौत हो गई थी। मणिपुर में कुकी और मैतेई की बीच शुरू हुई हिंसा के बाद ये पहला मौका था, जब किसी गांव पर ड्रोन से अटैक किया गया हो।

ये वीडियो कोत्रुक पर ड्रोन से बम गिराने का बताया गया था। हालांकि सिक्योरिटी फोर्स या पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की। सोर्स: सोशल मीडिया
ये वीडियो कोत्रुक पर ड्रोन से बम गिराने का बताया गया था। हालांकि सिक्योरिटी फोर्स या पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की। सोर्स: सोशल मीडिया
दिल्ली में मिले थे कुकी-मैतेई लीडर, तय हुआ था अब न गोली चलेगी, न जान जाएगी
3 मई, 2023 के बाद से जारी हिंसा के बीच बीते 15 अक्टूबर को कुकी, मैतेई और नगा समुदाय के 20 विधायक दिल्ली में मिले थे। इन्हें गृह मंत्रालय ने बुलाया था। इस दौरान कुकी, मैतेई और फिर नगा नेताओं से बात की गई। सभी ने अपनी मांगें केंद्र के सामने रखी थीं।

कुकी प्रतिनिधियों ने सरकार के सामने 3 मांगें रखी थीं

पहली: भारत सरकार मणिपुर की लीडरशिप बदले यानी CM एन बीरेन सिंह को हटाया जाए।
दूसरी: कुकी इलाकों में अलग प्रशासन हो।
तीसरी: हथियारबंद ग्रुप्स को गैर कानूनी संगठन घोषित किया जाए।

मीटिंग के बाद सभी ने संकल्प लिया था कि अब मणिपुर में न तो एक भी गोली चलेगी और न ही किसी की जान जाएगी। तीनों समुदायों के प्रतिनिधियों ने इस पर सहमति दी। इसके बाद एक-दूसरे से हाथ भी मिलाए थे। इसके बावजूद हिंसा में कमी नहीं आई है।

इंफाल में आर्मी कैंप में काम करने वाला शख्स लापता
इंफाल वेस्ट में 56 साल के एक शख्स के लापता होने के बाद इलाके में तनाव है। शख्स का नाम लैशराम कमलबाबू सिंह है। वे सोमवार दोपहर काम के लिए कांगपोकपी के लीमाखोंग आर्मी कैंप के लिए निकले थे। इसके बाद लापता हो गए।

लैशराम 25 नवंबर से लापता हैं। उन्हें ढूंढने के लिए पुलिस और सेना सर्च ऑपरेशन चला रही है।
मंगलवार को कमलबाबू को ढूंढने के लिए लोग लीमाखोंग जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद भीड़ भड़क गई और सड़कें ब्लॉक कर दीं।

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