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सैफई मेडिकल कॉलेज के 3 डॉक्टर समेत 5 की मौत:कार डिवाइडर से टकराई, फिर ट्रक ने रौंदा; लखनऊ में शादी से लौट रहे थे

सैफई मेडिकल कॉलेज के 3 डॉक्टर समेत 5 की मौत:कार डिवाइडर से टकराई, फिर ट्रक ने रौंदा; लखनऊ में शादी से लौट रहे थे

कन्नौज3 घंटे पहले

कन्नौज में सड़क हादसे में सैफई मेडिकल कॉलेज के 3 डॉक्टर, एक लैब टेक्नीशियन और एक क्लर्क की मौत हो गई। हादसा लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर बुधवार तड़के 3.30 बजे हुआ। 100 की स्पीड में चल रही स्कार्पियो डिवाइडर से टकराकर दो पलटी खाते हुए दूसरी लेन में आ गई। फिर ट्रक ने स्कार्पियो को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि स्कार्पियो कई मीटर तक घिसटती चली गई।

स्कार्पियो में 6 लोग सवार थे, 5 की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि एक की हालत गंभीर है। मरने वाले 3 डॉक्टर सैफई मेडिकल कॉलेज से पीजी कर रहे थे। मंगलवार को एक शादी में शामिल होकर लखनऊ से लौट रहे थे। लौटते वक्त हादसा हुआ।

पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में ड्राइवर को झपकी आने और ओवर स्पीड की वजह से हादसा हुआ है। स्कार्पियो ने पहले डिवाइडर को तोड़ा फिर कई पलटी खाते हुए दूसरी लेन में पहुंच गई। उस लेन में आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने स्कार्पियो को चपेट में ले लिया। सुबह 3:43 बजे कंट्रोल रूम के नंबर पर हादसे की सूचना मिली।

टक्कर इतनी भीषण थी कि स्कार्पियो बुरी तरह पिचक गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह से गाड़ी को काटकर सभी शवों और घायल को बाहर निकाला। हादसे की सूचना मिलते ही मेडिकल कॉलेज यूनिवर्सिटी का स्टाफ मौके पर पहुंच गया। सभी को जिला हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां 5 लोगों को मृत घोषित कर दिया।

हादसे की तस्वीरें…

हादसे के बाद स्कार्पियो बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई।
हादसे के बाद स्कार्पियो बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई।
हादसे की सूचना पर कन्नौज जिला हॉस्पिटल पहुंचे डॉक्टरों के परिजन।
हादसे की सूचना पर कन्नौज जिला हॉस्पिटल पहुंचे डॉक्टरों के परिजन।
हादसे में इन 5 की मौत हुई…

1- डॉक्टर अनिरुद्ध वर्मा (29) पुत्र पवन कुमार वर्मा। निवासी A-5 राधा विहार एक्सटेंशन कमला नगर, आगरा। मेडिकल कॉलेज से बायोकेमेस्ट्री से पीजी कर रहे थे।
2- डॉक्टर अरुण कुमार पुत्र अंगद लाल। निवासी- तेरा मल मोतीपुर कन्नौज। बायोकेमेस्ट्री से पीजी कर रहे थे।
3- डॉक्टर नारदेव पुत्र राम लखन गंगवार। निवासी नवाबगंज, बरेली। बायोकेमेस्ट्री से पीजी कर रहे थे।
4- राकेश कुमार (38) पुत्र कलुआ सिंह। निवासी जीवनपुर थाना कोतवाली देहात जनपद बिजनौर। मेडिकल कॉलेज में क्लर्क की पोस्ट पर तैनात थे।
5- संतोष कुमार मौर्य पुत्र जीत नारायण। निवासी राजपुरा भाग 3 भदोही संत रविदास नगर। मेडिकल कॉलेज में लैब टेक्नीशियन पद पर तैनात थे।

एक अन्य डॉ. जयवीर की हालत गंभीर है। वह माइक्रो बायोलॉजिस्ट की पढ़ाई कर रहे थे। हादसे में सिर और चेस्ट में गंभीर चोट है। सैफई ट्रामा सेंटर में एडमिट है। HICU में इलाज चल रहा है। स्थिति गंभीर बनी हुई है।​​

हादसे में घायल डॉटक्टर को अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
हादसे में घायल डॉटक्टर को अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
सलिल बोले- एक घंटे तक रात में हाईवे पर दोस्त का इंतजार किया
कन्नौज के रहने वाले सलिल कुमार ने बताया- हादसे में मौत का शिकार हुए डॉ. अरुण उनके दोस्त थे। दोनों लोग पार्टनरशिप में कन्नौज में कन्नौजिया हॉस्पिटल चलाते हैं। मंगलवार शाम को डॉ. अरुण कन्नौज स्थित अपने हॉस्पिटल में थे। उन्होंने मुझसे कहा-सैफई मेडिकल कॉलेज में साथ तैनात डॉ. चेतन की शादी है। जिसमें शामिल होने के लिए लखनऊ जाना पड़ेगा।

अरुण के 5 मित्र सैफई से एक कार से लखनऊ के लिए निकले थे। उन्हीं के साथ अरुण को भी लखनऊ जाना था। इसलिए मैं उनको रात 10 बजे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के फगुहा कट के पास छोड़ने गया था। जहां से अरुण अपने मित्रों के साथ कार से लखनऊ निकल गए।

डॉक्टर सलिल कुमार ने बताया पांचों लोग मेरे साथ पीजी कर रहे थे।
डॉक्टर सलिल कुमार ने बताया पांचों लोग मेरे साथ पीजी कर रहे थे।
सलिल ने बताया- जाते वक्त अरुण ने मुझसे कहा था कि रात 12 से 1 बजे तक वापस लौट आएंगे। रात 2:45 बजे अरुण ने फोन कर बताया कि लखनऊ से लौट रहे हैं, अरौल कट के पास आ गए हैं। 10 से 15 मिनट में तिर्वा कट पर पहुंच जाएंगे। मैं उन्हें लेने के लिए एक्सप्रेस-वे के कट पर पहुंच गया।

तीन बजे डॉक्टर अरुण का फोन स्विच ऑफ हो गया
अरुण को फोन किया तो मोबाइल स्विच ऑफ बताने लगा। थोड़ी टेंसन हुई, लेकिन फिर सोचा कि बैटरी लो हो गई होगी। रात के सन्नाटे में सड़क किनारे खड़े होकर एक घंटे इंतजार किया। इसके बाद टोल प्लाजा पर जाकर कर्मियों से बात की तो पता चला कि एक कार का भीषण एक्सीडेंट हो गया है।

घायलों को पुलिस तिर्वा मेडिकल कालेज लेकर गई है। कुछ ही देर में क्रेन एक्सीडेंट वाली कार लेकर भी टोल गेट पर पहुंच गई। जब कार का नम्बर देखा तो होश उड़ गए। आनन फानन में मेडिकल कॉलेज पहुंच कर देखा तो मित्र की डेडबॉडी रखी हुई थी। उसके साथ 4 अन्य डाक्टरों के भी शव थे।

हादसे के बाद सभी को अस्पताल लाया गया, जहां 5 को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
हादसे के बाद सभी को अस्पताल लाया गया, जहां 5 को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
मृतक डॉक्टर अरुण के पिता किसान हैं। अरुण कुल चार भाई हैं। चार भाइयों के बीच 6 बहनें भी हैं। अरुण की अभी शादी नहीं हुई थी। अरुण का एक भाई कानपुर में रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। बहनें भी अलग-अलग जगह अपनी पढ़ाई कर रही हैं। वहीं, लैब टेक्नीशियन संतोष कुमार मोर्य के के दो भाई हैं। छोटा भाई इंजीनियर है। दुबई में रहता है। पिता जीत नारायण आंख के डॉक्टर हैं। तीन बहन है। सभी की शादी हो चुकी है।

100 की स्पीड में डिवाइडर से टकराई कार

डॉ. प्रियंका बाजपेयी, सीओ तिर्वा ।
डॉ. प्रियंका बाजपेयी, सीओ तिर्वा ।
सीओ तिर्वा डॉ. प्रियंका बाजपेयी ने बताया कि तिर्वा के सिकरोरी गांव के सामने तेज रफ्तार एक स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर डिवाइडर को तोड़कर दूसरी साइड जाकर सामने से आ रहे ट्रक से टकरा गई। हादसे में स्कॉर्पियो में बैठे पांच लोगों का मौत हो गई। एक घायल हो गया।

हादसे को लेकर अखिलेश ने पूछे सवाल

हर एक जान अनमोल होती है, लेकिन जान बचाने वाले डॉक्टरों की जान जाना और भी अधिक दुखद घटना है। श्रद्धांजलि!

भाजपा सरकार को ये सोचना चाहिए कि एक्सप्रेसवे पर अचानक हादसों की संख्या क्यों बढ़ गई है-

क्या भाजपा सरकार, सपा के समय में बने इस विश्वस्तरीय एक्सप्रेसवे की देखरेख करने की योग्यता और क्षमता नहीं रखती है या फिर जानबूझकर ऐसा किया जा रहा है।
क्या हाईवे की पुलिसिंग कोने में गाड़ी लगाकर, मोबाइल देखने के लिए ही रह गयी है। जब मोबाइल से सिर उठाएंगे तब तो देखेंगे कि कौन गलत-सही गाड़ी चला रहा है।
⁠क्या स्पीड पर निगाह रखनेवाली CCTV टेक्नॉलॉजी केवल चालान काटकर पैसा कमाने के लिए है या चेतावनी देकर जान बचाने के लिए भी है।
क्या जानवरों की आवा-जाही के नियंत्रण का कोई भी उपाय सरकार के पास नहीं है, जो सैकड़ों बार हादसों का कारण बन रहे हैं।
भाजपा राज में ‘लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे‘ के प्रति द्वेष भरा सौतेला व्यवहार किया जा रहा है, जिसकी क़ीमत जनता अपनी जान गंवाकर चुका रही है।

सपा के लिए ‘एक्सप्रेसवे’ एक बड़ी सोच का ठोस रूप था। जिसका लक्ष्य सुरक्षा के साथ आवागमन-परिवहन को गतिमान बनाकर, बीच के सभी क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था, कृषि और कारोबार को प्रगति और विकास के मार्ग से जोड़ना रहा, लेकिन भाजपा के लिए ये केवल करोड़ों का टोल कमाने का ज़रिया भर बनकर रह गया है। ये टोल कलेक्शन का काम भी प्राइवेट कंपनी को ही दिया गया है, और क्यों दिया गया है, ये समझाने की ज़रूरत जनता को नहीं है।

अगर सरकार में कोई भी एक ज़िम्मेदार हो तो जवाब भले न दे पर जनता के जीवन को बचाने के उपाय ज़रूर करें।

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