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संभल हिंसा- 100 पत्थरबाजों के पोस्टर जारी:महिलाओं ने भी छत से पत्थर फेंके; मंत्री बोले- उपद्रवियों से नुकसान की भरपाई करेंगे

संभल हिंसा- 100 पत्थरबाजों के पोस्टर जारी:महिलाओं ने भी छत से पत्थर फेंके; मंत्री बोले- उपद्रवियों से नुकसान की भरपाई करेंगे

संभल29 मिनट पहले

उत्तरप्रदेश की संभल हिंसा मामले में पुलिस ने बुधवार को 100 पत्थरबाजों के पोस्टर जारी किए। इनमें ज्यादातर आरोपी हाथ में पत्थर लिए हैं। मुंह बांधे हैं। पुलिस ने बताया कि अभी और वीडियो, CCTV और ड्रोन फुटेज की जांच की जा रही है। आगे और भी पोस्टर जारी किए जाएंगे। साथ ही सड़कों पर पोस्टर और होर्डिंग्स भी लगाए जाएंगे।

पुलिस ने अब तक 4 महिलाओं समेत 27 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है। इन्हें कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। संभल पुलिस ने दीपासराय इलाके का एक फुटेज भी जारी किया। इसमें वह छत से पत्थर फेंकते नजर आ रही है।

संभल में 24 नवंबर को जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान पथराव और हिंसा हुई थी। इसमें 4 लोगों की मौत हो गई थी। इस दौरान कई घंटे तक पथराव हुआ था। इसके बाद से इलाके में अभी भी तनाव बना हुआ है। जगह-जगह पुलिसबल तैनात है।

सपा सांसद के घर के पास महिलाओं ने छत से पत्थर फेंके

संभल हिंसा का एक और वीडियो सामने आया है। इसमें सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के घर के पास कुछ महिलाएं छतों से पुलिस पर पत्थर मारते नजर आ रही हैं। कमिश्नर आंजनेय सिंह का कहना है- पत्थरबाजी में शामिल किसी भी अराजक तत्व को बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वह पुरुष हों या महिलाएं।

वहीं, बुधवार को यूपी के आबकारी राज्यमंत्री नितिन अग्रवाल ने कहा, ‘कानून बिगाड़ने वालों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। पत्थरबाजी करने वाले, दंगा भड़काने वाले उपद्रवियों के पोस्टर सार्वजनिक स्थान पर लगाए जाएंगे। सार्वजनिक संपत्ति का जो नुकसान हुआ है। उसकी भरपाई उपद्रवियों से कराई जाएगी।’

इधर, योगी सरकार हिंसा में जिन-जिन लोगों के नाम सामने सामने आए हैं, उनकी पहचान के बाद उनसे नुकसान की वसूली की तैयारी कर रही है। गृह और पुलिस विभाग इसमें मिलकर काम कर रहा है।

पुलिस ने नाम लिखे 2 फोटो जारी किए

अब देखिए वो फोटो जो पुलिस ने जारी किए, जिनकी पहचान की जा रही है..

6 दिन में 2 बार सर्वे, लोग भड़के

19 नवंबर: संभल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में हिंदू पक्ष ने 19 नवंबर को याचिका लगाई। 95 पेज की याचिका में हिंदू पक्ष ने दो किताब और एक रिपोर्ट को आधार बनाया है। इनमें बाबरनामा, आइन-ए-अकबरी किताब और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की एक 150 साल पुरानी रिपोर्ट शामिल है। संभल के सिविल कोर्ट ने उसी दिन कमिश्नर सर्वे का आदेश दिया था। इस आदेश के कुछ ही घंटों बाद उसी दिन कमिश्नर टीम ने सर्वे किया था। सर्वे की रिपोर्ट एक सप्ताह में सौंपनी है। सिविल कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ जामा मस्जिद पक्ष ने अपील दाखिल की है। मामले पर अगली सुनवाई 29 नवंबर को होगी। पढ़ें पूरी खबर…
24 नवंबर: रविवार सुबह 6.30 बजे डीएम-एसपी के साथ दोबारा से टीम जामा मस्जिद का सर्वे करने पहुंची थी। टीम देखकर मुस्लिम समुदाय के लोग भड़क गए। कुछ ही देर में दो से तीन हजार लोग जामा मस्जिद के बाहर पहुंच गए। पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो कुछ लोगों ने पथराव कर दिया। इसके बाद हिंसा भड़क गई। पढ़ें पूरी खबर…
संभल की मस्जिद का विवाद क्या है?

हिंदू पक्ष काफी वक्त से संभल की जामा मस्जिद की जगह पर पहले मंदिर होने का दावा कर रहा है। 19 नवंबर को 8 लोग मामले को लेकर कोर्ट पहुंचे और एक याचिका दायर की। इनमें सुप्रीम कोर्ट के वकील हरिशंकर जैन और उनके बेटे विष्णुशंकर जैन प्रमुख हैं। ये दोनों ताजमहल, कुतुब मीनार, मथुरा, काशी और भोजशाला के मामला भी देख रहे हैं।

इनके अलावा याचिकाकर्ताओं में वकील पार्थ यादव, केला मंदिर के महंत ऋषिराज गिरी, महंत दीनानाथ, सामाजिक कार्यकर्ता वेदपाल सिंह, मदनपाल, राकेश कुमार और जीतपाल यादव का नाम शामिल है। हिंदू पक्ष का दावा है कि ये जगह पहले श्रीहरिहर मंदिर हुआ करती थी, जिसे बाबर ने 1529 में तुड़वाकर मस्जिद बनवा दिया।

संभल कोर्ट में हिंदू पक्ष ने याचिका लगाई। 95 पेज की याचिका में हिंदू पक्ष ने दो किताब और एक रिपोर्ट को आधार बनाया है। इनमें बाबरनामा, आइन-ए-अकबरी किताब और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की 150 साल पुरानी एक रिपोर्ट शामिल है।

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