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महाराष्ट्र में BJP को 80-90 सीटें, कांग्रेस को 58-60:महाविकास अघाड़ी को बहुमत के आसार, फेल होते दिख रहे शिंदे-अजित

महाराष्ट्र में BJP को 80-90 सीटें, कांग्रेस को 58-60:महाविकास अघाड़ी को बहुमत के आसार, फेल होते दिख रहे शिंदे-अजित

मुंबई16 मिनट पहलेलेखक: वैभव पलनीटकर, याकूत अली और सृष्टि मिश्रा

5 साल की सियासी उठापटक के बाद महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव हुए। अब कुछ सवाल हैं। क्या BJP के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन दोबारा सरकार बना पाएगा या कांग्रेस के महाविकास अघाड़ी की सरकार में वापसी होगी, वोटर दो हिस्सों में बंटी शिवसेना और NCP में से किसे चुनेंगे।

मराठा आरक्षण आंदोलन, मराठा Vs OBC के मुद्दे और लाडकी बहिन जैसी योजना का असर क्या रिजल्ट पर भी दिखेगा। इन सवालों का जवाब जानने के लिए भास्कर रिपोर्टर्स बीते एक महीने में मुंबई से लेकर कोंकण, पश्चिम महाराष्ट्र से मराठवाड़ा, उत्तर महाराष्ट्र से विदर्भ तक वोटर्स से मिले। पॉलिटिकल एक्सपर्ट, जर्नलिस्ट, पॉलिटिकल PR करने वाली एजेंसियों से जुड़े लोगों से बात की। पढ़िए भास्कर रिपोर्टर्स पोल…

BJP सबसे बड़ी पार्टी, सबसे ज्यादा फायदे में कांग्रेस
महाराष्ट्र में 20 नवंबर को एक ही फेज में सभी 288 सीटों पर वोटिंग हुई। रिजल्ट 23 नवंबर को आएगा। कवरेज के दौरान मिले इनपुट से समझ आया कि महायुति या महाविकास अघाड़ी दोनों को बहुमत के लिए जरूरी 145 सीटें मिलना मुश्किल है।

BJP को सबसे ज्यादा 80-90 सीटें मिल सकती हैं। 2019 में उसे 105 सीटें मिली थीं। 58-60 सीटों के साथ कांग्रेस दूसरे नंबर पर रह सकती है। पिछले चुनाव में उसकी 44 सीटें थीं। चुनाव में शरद पवार का मैजिक चलता दिख रहा है। 87 कैंडिडेट उतारने वाली उनकी पार्टी NCP (SP) 50-55 सीटें जीत सकती है।

शिवसेना (शिंदे गुट) और शिवसेना (उद्धव गुट) 30-35 सीटें जीतकर बराबरी पर रह सकती हैं। महायुति के लिए कमजोर कड़ी अजित पवार की पार्टी NCP बन रही है। उसके सिर्फ 15-20 सीटों पर जीतने की संभावना है। छोटी पार्टियां और निर्दलीय को 20 से 25 सीटें मिल सकती हैं। ऐसे में ये किंगमेकर बन सकते हैं।

राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के 2-4 कैंडिडेट जीत सकते हैं। समाजवादी पार्टी को भी एक सीट मिल सकती है। कांग्रेस, NCP (शरद पवार) और शिवसेना (उद्धव) का गठबंधन महाविकास अघाड़ी, महायुति से 10 सीटें ज्यादा हासिल कर सकता है। ये भी मुमकिन है कि इस गठबंधन को बहुमत मिल जाए।

महाविकास अघाड़ी
उद्धव की शिवसेना कमजोर, विदर्भ में कांग्रेस को बढ़त
2019 के चुनाव में चौथे नंबर पर रही कांग्रेस इस बार सहयोगी पार्टियों पर भारी दिख रही है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 13 सीटें जीतकर चौंका दिया था। विदर्भ की 62 सीटों में से कांग्रेस करीब 50 सीटें जीत सकती है। गठबंधन में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 101 कैंडिडेट उतारे हैं।

महाविकास अघाड़ी की दूसरी बड़ी पार्टी शिवसेना (उद्धव गुट) सबसे कमजोर साबित हो सकती है। पार्टी ने 95 कैंडिडेट उतारे हैं। इनमें से एक तिहाई के ही जीतने के चांस हैं। शरद पवार की पार्टी NCP (SP) पश्चिमी महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में मजबूत दिख रही है। उसे मराठा वोट का फायदा मिल सकता है।

महायुति: BJP का स्ट्राइक रेट अच्छा, अजित पवार बिगाड़ सकते हैं खेल
BJP के नेतृत्व वाला महायुति बहुमत से थोड़ा पीछे रह सकता है। उत्तरी महाराष्ट्र, कोंकण और मुंबई में BJP अच्छा कर सकती है। हालांकि विदर्भ में पार्टी को नुकसान होता दिख रहा है। पिछले चुनाव में BJP ने यहां 29 सीटें जीती थीं। पार्टी इस बार 149 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

अलायंस की दूसरी बड़ी पार्टी शिवसेना (शिंदे गुट) मुंबई, कोंकण और मराठवाड़ा में मजबूत है। पार्टी ने 81 सीटों पर कैंडिडेट उतारे हैं। महायुति के पीछे रहने की वजह अजित पवार की NCP बन सकती है। पश्चिम महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के ग्रामीण इलाकों में पार्टी शरद पवार से पिछड़ती दिख रही है।

लोकसभा चुनाव में भी अजित पवार की पार्टी सिर्फ रायगढ़ सीट जीत पाई थी। विधानसभा चुनाव में पार्टी 59 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

किसी अलायंस को बहुमत नहीं मिला, तो निर्दलीय बनवाएंगे सरकार
नेशनल लेवल पर INDIA ब्लॉक में शामिल समाजवादी पार्टी महाराष्ट्र में अलग चुनाव लड़ रही है। उसे एक सीट मिल सकती है। राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना 2-4 सीटों पर मजबूत है। एक सीट बाबा अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर की पार्टी बहुजन विकास अघाड़ी को मिल सकती है। 2019 में इस पार्टी ने 3 सीटें जीती थीं।

पिछले चुनाव में 13 निर्दलीय कैंडिडेट जीतकर आए थे। इस बार ये संख्या 20 से ज्यादा रह सकती है, यानी बहुमत न मिलने की स्थित में दोनों अलायंस को सरकार बनाने के लिए निर्दलीयों की जरूरत पड़ेगी।

एक्सपर्ट बोले- ‘बंटेंगे तो कटेंगे ‘ जैसे बयान महायुति के लिए चैलेंज बने
मराठी अखबार लोकसत्ता के एडिटर गिरीश कुबेर कहते हैं, ‘चुनाव के पहले विपक्ष और सत्ता पक्ष, दोनों के पास बड़ा मुद्दा नहीं था। यूपी के CM योगी आदित्यनाथ ने बंटेंगे तो कटेंगे की बात छेड़ दी। यही बयान महायुति के सामने चुनौती बन गया। सहयोगी पार्टियां NCP (अजित) और शिवसेना (शिंदे) दलितों-मुसलमानों को साथ लाना चाहती थीं। योगी के बयान से उनका नुकसान हुआ है।’

‘लोकसभा चुनाव में महायुति और महाविकास अघाड़ी के वोट में सिर्फ 1% का फर्क था, लेकिन महाविकास अघाड़ी ने 13 सीटें ज्यादा जीती थीं। BJP के लिए सुरक्षित इलाका विदर्भ है। 2019 में BJP ने यहां 29 सीटें जीती थीं, BJP को भी लगता है कि इससे ज्यादा सीटें नहीं मिल सकतीं।’

‘पश्चिम महाराष्ट्र और विदर्भ में शरद पवार का प्रभाव है। उत्तरी महाराष्ट्र में कांटे की टक्कर है। मराठवाड़ा में BJP के लिए हालात बुरे हैं। मुंबई और ठाणे-कोंकण रीजन में करीब 75 सीटें हैं। महायुति की सबसे ज्यादा उम्मीद यहीं है।’

सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से BJP+ को नुकसान
मराठी डेली पुढारी के पॉलिटिकल एडिटर प्रमोद चुंचूवार का मानना है कि महाविकास अघाड़ी 150 से ज्यादा सीट जीतेगा, लेकिन ये बॉर्डर लाइन विक्ट्री होगी। कई सीटों पर महाविकास अघाड़ी और महायुति की नेक टु नेक फाइट है। इस चुनाव में ध्यान देने वाली बात ये भी है कि BJP के साथ वे नेता खड़े हैं, जो सेक्युलर हुआ करते थे। इनमें मिलिंद देवड़ा, अशोक चव्हाण और अजित पवार शामिल हैं।

प्रमोद चुंचूवार कहते है, ‘ये नेता बांटने की राजनीति नहीं करते। बंटेंगे तो कटेंगे वाले बयान पर अजित पवार और पंकजा मुंडे कह चुके हैं कि ये सब महाराष्ट्र में नहीं चलने वाला है। पहले भी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश की गई है, तब महाराष्ट्र के लोगों ने इसे नकार दिया है।’

‘ये चुनाव लोकल मुद्दों पर लड़ा गया है। संविधान का मामला बड़ा साबित हो सकता है क्योंकि यहां विधायक पार्टी का अपहरण कर रहे हैं। पार्टी और सिंबल तक छीन लिया। संविधान के मसले पर BJP कमजोर नजर आ रही है।’

1995 में 45 निर्दलीय सरकार में शामिल थे, इस बार भी ऐसा मुमकिन
मुंबई में रहने वाले सीनियर जर्नलिस्ट राजेंद्र साठे कहते हैं, ‘दोनों गठबंधन बहुमत से पीछे रह जाएंगे, तब निर्दलीय विधायक सरकार बनाने में मदद करेंगे। 1995 में पहली बार महाराष्ट्र विधानसभा में 45 निर्दलीय कैंडिडेट चुनकर आए थे और सभी सरकार में शामिल हुए थे। नंबर गेम में फिर वैसा ही देखने को मिलेगा, लेकिन नंबर 45 से काफी कम करीब 20-25 होंगे।’

चुनाव के बाद राज ठाकरे और अजित पवार का क्या होगा?
राज ठाकरे ने अनुमान लगाया है कि चुनाव के बाद BJP का मुख्यमंत्री होगा। 2029 में उनकी पार्टी मनसे अपना मुख्यमंत्री बनाने में कामयाब होगी। राज ठाकरे के बयान से ये तो साफ है कि महायुति की सरकार बन रही है।

सीनियर जर्नलिस्ट राजेंद्र साठे मानते हैं कि…

अजित पवार के बारे में वे कहते हैं, ‘अजित भले ही महायुति का हिस्सा हैं, लेकिन कई बार वे पुराने सहयोगियों की तारीफ या साथी दलों के बयानों से असहमति जता चुके हैं। उनके कितने उम्मीदवार जीतेंगे, ये एक सवाल है क्योंकि शरद पवार चुनाव में पूरी ताकत लगा रहे हैं।’

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लग रहा है कि अजित पवार के 10-15 से ज्यादा उम्मीदवार जीतकर नहीं आएंगे। अजित पवार आज नहीं तो कल शरद पवार के पास वापस चले जाएंगे।

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हालांकि सीनियर जर्नलिस्ट संदीप सोनवलकर सीटों के बारे में अलग दावा करते हैं। वे कहते हैं कि महायुति की करीब 136 सीटें आती दिख रही हैं। वहीं, महाविकास अघाड़ी को 126 सीटें मिलने की संभावना है।

5 मुद्दे, जिनका चुनाव पर असर दिखा

1. विदर्भ-मराठवाड़ा में सोयाबीन और कपास किसानों की नाराजगी
विदर्भ और मराठवाड़ा में पानी की कमी है। यहां गेहूं, गन्ना, चावल के बजाय सोयाबीन और कपास की खेती ज्यादा होती है। दोनों फसलों में कम पानी लगता है। नवंबर में सोयाबीन की फसल कट जाती है और कपास खेत में पककर तैयार होता है। सोयाबीन और कपास दोनों का मौजूदा भाव MSP से नीचे है। इससे किसान नाराज हैं।

विदर्भ में विधानसभा की 62 और मराठवाड़ा में 46 सीटें हैं। विदर्भ कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ रहा है। यहां की 36 सीटों पर BJP और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। मराठवाड़ा में किसानों के बीच शरद पवार की अच्छी छवि महाविकास अघाड़ी को फायदा पहुंचाएगी।

2. मराठा बनाम OBC: मराठा वोट नहीं बंटे, तो महाविकास अघाड़ी को फायदा
महाराष्ट्र के गांवों में 2 साल से मराठा आरक्षण आंदोलन चल रहा है। यहां आंदोलन शुरू करने वाले मनोज जरांगे पाटिल का प्रभाव है। पहले मनोज जरांगे ने कैंडिडेट उतारने का फैसला लिया था, लेकिन आखिरी वक्त पर उन्होंने नॉमिनेशन वापस ले लिए।

अगर मनोज जरांगे पाटिल के कैंडिडेट चुनाव लड़ते, तो मराठा वोट तीन हिस्सों में बंट जाते। एक हिस्सा मनोज जरांगे को, दूसरा महाविकास अघाड़ी को और तीसरा छोटा हिस्सा महायुति को मिलता। इससे सबसे ज्यादा नुकसान महाविकास अघाड़ी को होता।

एक्सपर्ट मानते हैं कि आखिरी वक्त पर मनोज जरांगे के नामांकन वापस लेने से मराठा वोट दो हिस्सों में ही बटेंगे। इसका बड़ा हिस्सा शरद पवार और कांग्रेस को मिल सकता है।

3. लाडकी बहिन योजना और महिला वोटर्स
लोकसभा चुनाव में हार मिलने के बाद शिंदे सरकार ने महिलाओं के लिए लाडकी बहिन योजना शुरू की थी। इसमें महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए मिलते हैं। सरकार बनने के बाद इसे 2100 रुपए करने का वादा किया है।

ये योजना मध्य प्रदेश की तर्ज पर शुरू की गई थी। वहां विधानसभा चुनाव में इसी योजना के बलबूते BJP ने बड़ी जीत हासिल की थी। दूसरी तरफ महाविकास अघाड़ी ने वादा किया है कि उसकी सरकार बनी, तो महिलाओं को हर महीने 3 हजार रुपए मिलेंगे।

4. धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट
मुंबई की सबसे बड़ी स्लम धारावी के रीडेवलपमेंट का मुद्दा चुनाव से पहले ही गरमा गया था। इसका प्रोजेक्ट अडाणी ग्रुप की कंपनी को मिला है। उद्धव ठाकरे ने प्रोजेक्ट को रद्द करने का वादा किया है। कांग्रेस पहले से गौतम अडाणी के बहाने BJP को घेरती रही है।

महाविकास अघाड़ी में शामिल शरद पवार गौतम अडाणी के दोस्त रहे हैं। चुनाव के दौरान अजित पवार ने एक इंटरव्यू में 2019 में हुई मीटिंग का जिक्र किया, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह, देवेंद्र फडणवीस, शरद पवार और अजित पवार के साथ गौतम अडाणी भी मौजूद थे। शरद पवार ने भी ये बात मानी, लेकिन BJP मौन रही।

5. ‘एक हैं तो सेफ हैं’ जैसे नारों से ध्रुवीकरण की कोशिश
यूपी के CM योगी के ‘बटेंगे तो कटेंगे’ से शुरू हुई नारे की राजनीति PM मोदी के ‘एक हैं तो सेफ हैं’ नारे तक गई। चुनाव के पहले BJP ने अखबारों में विज्ञापन भी दिए।

पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रो. जयदेव डोले कहते हैं, ‘चुनाव पर जाति का फैक्टर हावी दिख रहा था। BJP ने चुनावी रणनीति में बदलाव करके बंटेंगे तो कटेंगे जैसे नारे के जरिए हिंदुओं को एकजुट करने और जाति के समीकरण तोड़ने की कोशिश की।’

एक्सपर्ट ये भी मान रहे हैं कि ‘बटेंगे तो कटेंगे’ नारे की वजह से मुस्लिम वोटों में ध्रुवीकरण हुआ, जिसका फायदा महाविकास अघाड़ी को मिला है।

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