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निर्मला सीतारमण बोलीं- पितृसत्ता लेफ्ट का बनाया कॉन्सेप्ट:अगर ये महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकता, तो इंदिरा गांधी पीएम कैसे बनीं

निर्मला सीतारमण बोलीं- पितृसत्ता लेफ्ट का बनाया कॉन्सेप्ट:अगर ये महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकता, तो इंदिरा गांधी पीएम कैसे बनीं

बेंगलुरु4 घंटे पहले
बेंगलुरु में राष्ट्रीय MSME क्लस्टर आउटरीच कार्यक्रम के दौरान लोगों को संबोधित करतीं निर्मला सीतारमण।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पितृसत्ता को लेकर अपनी राय दी है। उन्होंने कहा कि अगर पितृसत्ता भारत में महिलाओं को अपनी इच्छाओं को पूरा करने से रोकती, तो इंदिरा गांधी कैसे प्रधानमंत्री बन पाईं?

बेंगलुरु के CMS बिजनेस स्कूल में शनिवार को स्टूडेंट्स से बातचीत के दौरान उन्होंने ये बात कही। महिला सशक्तिकरण को लेकर एक सवाल का जवाब देते हुए सीतारमण ने कहा कि पितृसत्ता का विचार लेफ्टिस्ट पार्टियों ने बनाया है।

सीतारमण ने महिलाओं को सलाह दी कि वे आकर्षक जटिल शब्दों के जाल में न उलझें। अगर आप अपने लिए खड़े होते हैं और तर्कसंगत तरीके से बात रखते हैं, तो पितृसत्ता आपको अपने सपने पूरे करने से नहीं रोक सकती। हालांकि उन्होंने यह माना कि महिलाओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं मौजूद नहीं हैं और इसमें बदलाव की जरूरत है।

MSME मंत्री जीतन राम मांझी इस कार्यक्रम से वर्चुअली जुड़े। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी और MSME और श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे भी इस मौके पर मौजूद रहीं।

निर्मला बोलीं- मोदी सरकार ने इनोवेटर्स के लिए बेहतर माहौल बनाया इस कार्यक्रम में निर्मला ने केंद्र सरकार की तरफ से इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों और युवाओं के लिए मौजूद सरकारी योजनाओं के बारे में बातचीत की।

निर्मला ने इनोवेशन के मौकों को लेकर कहा कि मोदी सरकार ऐसा माहौल बना रही है जो इनोवेटर्स के लिए अच्छा है। हमारी सरकार सिर्फ नीतियां बनाकर इनोवेशन को सपोर्ट नहीं करती है। सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि ऐसे इनोवेशन को बाजार भी मिले।

सीतारमण बोलीं- सरकार ने MSME के लिए सपोर्ट मैकेनिज्म तैयार किया वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) के लिए सपोर्ट मैकेनिज्म तैयार किया है। इसके तहत MSME को सरकारी खरीद में प्राथमिकता दी जाती है।

उन्होंने बताया कि सभी सरकारी खरीद का 40% हिस्सा MSME से आता है। इसी कारण भारत में आज 2 लाख से ज्यादा स्टार्टअप हैं और 130 से ज्यादा यूनिकॉर्न बन चुके हैं। इस क्षेत्र में अवसर बहुत हैं, जिनका पूरी तरह लाभ नहीं उठाया गया है।

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