कैमरे पर पहली बार डिजिटल अरेस्ट करने वाले लुटेरे:भास्कर रिपोर्टर 6 घंटे कैद रहा, हर साजिश रिकॉर्ड की; कैसे फंसते हैं हाईप्रोफाइल लोग, पार्ट-1
देशभर में डिजिटल अरेस्ट करने वाले ऑनलाइन लुटेरे। कभी फर्जी IPS ताे कभी CBI अफसर बनकर हाईप्रोफाइल लोगों को देशद्रोही, आतंकी, रेपिस्ट, स्मगलर बताकर लाखों-करोड़ों रुपए लूट लेते हैं। घंटों घर में कैद रहने को मजबूर कर देते हैं।
आज तक ये लुटेरे नहीं पकड़े गए। पहली बार देखें इन लुटेरों के चेहरे। इन लुटेरों का सच सामने लाने के लिए भास्कर रिपोर्टर रावत प्रवीण सिंह ने खुद को डिजिटल अरेस्ट कराया। 6 घंटे तक मेंटल और फिजिकल टॉर्चर सहा, ताकि इनके खिलाफ सबूत जुटा सके।
पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
8 दिन तक कोशिश के बाद एक कॉल के साथ शुरू हुआ डिजिटल अरेस्ट भास्कर रिपोर्टर ने डिजिटल अरेस्ट का पैटर्न समझने और लुटेरों तक पहुंचने के लिए इनका शिकार हुए लोगों और इंवेस्टिगेशन ऑफिसर से बात की। सामने आया कि सोशल मीडिया पर बैंक का क्रेडिट स्कोर जानने वाले लिंक से ये लोगों को फंसाते हैं।
भास्कर रिपोर्टर ने 5 दिन सोशल मीडिया पर बैंक के इन क्रेडिट स्कोर वाले लिंक पर क्लिक किया। वहां आधार कार्ड और पैन कार्ड डिटेल मांगी गई, जो शेयर भी कर दी।
आठवें दिन सुबह 6 बजे एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल रिसीव करने के साथ ही डिजिटल अरेस्ट शुरू हो गया।
सुबह 6 बजे: पहली धमकी-आपके नाम से लिए फोन नंबर के खिलाफ 17 शिकायतें-FIR 22 अक्टूबर को सुबह 6 बजे 9892902670 से भास्कर रिपोर्टर के मोबाइल पर कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को भारतीय टेलीकॉम सर्विस का अधिकारी बताया। उसने भास्कर रिपोर्टर से कहा- ‘प्रवीण सिंह! आपके आधार कार्ड से मुंबई में ये 8451879980 मोबाइल नंबर लिया गया है। इस नंबर के खिलाफ अंधेरी पुलिस स्टेशन में 17 शिकायतें और FIR दर्ज हैं।’
‘CBI 2 घंटे में मोबाइल नंबर बंद कर देगी। आप ऐसा नहीं चाहते तो अंधेरी पुलिस स्टेशन में अगले दो घंटे में नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) देनी होगी।’
भास्कर रिपोर्टर ने कहा- ‘मैं दो घंटे में मुंबई नहीं पहुंच पाऊंगा। ये नंबर मेरा नहीं है।’ इस पर फोन करने वाले ने कहा- मैं आपका नंबर अंधेरी पुलिस स्टेशन के अधिकारी को दे रहा हूं। वो आपको वॉट्सऐप कॉल करेंगे।
(इतना कहकर उसने फोन काट दिया)
10 मिनट बाद खुद को IPS संदीप झा बताने वाला का वीडियो कॉल 10 मिनट बाद 997257930 नंबर से रिपोर्टर के वॉट्सऐप पर वीडियो कॉल आया। रिपोर्टर ने लैपटॉप से कॉल रिसीव किया। सामने बैठा व्यक्ति पुलिस की वर्दी में था। पीछे पुलिस स्टेशन जैसा सेटअप। उसने खुद को IPS संदीप झा बताया।
रिपोर्टर से कहा- ‘कैमरे पर आधार कार्ड दिखाइए। डिजिटल वैरिफिकेशन होगा। आपके नाम से जारी जिस नंबर का मिस यूज हो रहा है, उसे बंद करा देंगे।’
(इसके बाद फर्जी IPS का कैमरा बंद हो गया, लेकिन भास्कर रिपोर्टर को कैमरा ऑन रखने की हिदायत दी। उसने फर्जी पुलिसकर्मी प्रदीप सावंत को बुलाया।)
सुबह 7 बजे: फर्जी इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर ने शुरू किया डिजिटल अरेस्ट फर्जी इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर ने भी कैमरा ऑन नहीं किया। रिपोर्टर को धमकी भरे लहजे में कहा- ‘कैमरा ऑन रखना और जो पूछ रहा हूं, उसका जवाब देते रहना।
रिपोर्टर ने टेलिकॉम कंपनी से आए फोन के बारे में बताया। फर्जी इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर ने पूछा- ‘क्या आप ऑनलाइन कंप्लेंट दर्ज कराना चाहते हैं?’
रिपोर्टर ने हां में जवाब दिया तो फर्जी अफसर बोला- ‘आपका स्टेटमेंट लेंगे, जो कोर्ट में पेश होगा। स्टेटमेंट के समय किसी दूसरे की न तो आवाज आनी चाहिए और न वीडियो में कोई नजर आना चाहिए।’
रिपोर्टर ने बताया घर पर हूं तो फर्जी अफसर ने आस-पास का 360 डिग्री एंगल व्यू दिखाने को कहा। किचन, बालकनी…यहां तक कि बाथरूम के भी वीडियो देखे। असल में वो ये सुनिश्चित करना चाहता था कि वहां कोई और तो मौजूद नहीं है।
इसके बाद उसने रिपोर्टर से कहा- ‘अपना फोन बंद कर दो। आप लैपटॉप से जुड़े हो, किसी का फोन आएगा तो डिस्टर्ब हो जाएंगे।’
पूछा- लैपटॉप में बैटरी कितनी, टाइम क्या हुआ है मोबाइल बंद कराने के बाद ठग से सबसे पहले पूछा लैपटॉप की बैटरी कितने प्रतिशत चार्ज है।
फिर सख्त लहजे में कहा- ‘आपका आधार मुंबई कैसे गया? बायोमैट्रिक से सत्यापन कैसे हुआ? आपको पता है 2 से 3 साल की जेल भी हो सकती है।’
रिपोर्टर ने जवाब दिया- मैं कभी मुंबई गया ही नहीं तो ठग ने सवालों की बौछार शुरू कर दी…
- अपना आधार कहां दिया था?
- किस कंपनी में जॉब करते हो, पहले कहां करते थे?
- परिवार में कौन-कौन है?
- पढ़े-लिखे हो, फिर भी मुंह उठाकर किसी को भी अपना आधार दे देते हो ?
सुबह 8 बजे : रिकॉर्डिंग का शक हुआ तो बोला- तुम्हारे नंबर से अश्लील वीडियो भेजे जा रहे बातचीत के दौरान ठग को शक हो गया कि रिपोर्टर उसका वीडियो बना रहा है। उसने धमकाते हुए कहा- तुम्हारे मोबाइल नंबर से लड़कियों को अश्लील वीडियो भेजे जा रहे हैं। रुको, आधार कार्ड हेडक्वार्टर से वैरिफाई करते हैं।
इसके बाद अगली आवाज वायरलैस की थी-…सीआई…सीआई…दिस इज प्रदीप सावंत रिपोर्ट… प्लीज चैक आधार नंबर…।
इसके बाद भी ठग ने कई सवाल पूछे- माता-पिता कहां रहते हैं? शादी हो गई क्या? रिपोर्टर ने इन सभी सवालों के गलत जवाब दिए।
ठग बोला- तुम्हारे खिलाफ 6.80 करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग का केस इसी बीच वायरलैस से ठग के एक साथी की आवाज आई-
जो आधार नंबर बताया है, वह प्रवीण सिंह के नाम का है। इसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस है। हरियाणा, पंजाब, गुजरात, असम, यूपी में कई मामले दर्ज है। आधार कार्ड इसी के नाम का है। इस आदमी को जल्दी अरेस्ट करो, हाईकमान से ऑर्डर है।

रिपोर्टर समझ गया था कि अब ठगों ने अपना खेल शुरू कर दिया है। उसने डरने का दिखावा करते हुए कहा- ‘सर, मेरा इस केस से कोई लेना-देना नहीं है।’
तभी दूसरी तरफ से आवाज आई– ‘ऑफिसर बिना टाइम वेस्ट किए इस आदमी को गिरफ्तार करो। ये नरेश गोयल मनी लॉन्ड्रिंग केस में शामिल है। इसके खाते से लास्ट ट्रांजेक्शन 6 करोड़ 80 लाख रुपए का हुआ है।’
सुबह 10 बजे: दूसरी बार रिकॉर्डिंग का शक हुआ तो गाली दी ये पूरी बातचीत सुबह 10 बजे तक चली। इस दौरान रिपोर्टर को न उठने दिया और न जगह से हिलने दिया। रिपोर्टर स्पाई कैमरे से लगातार सारी बातें रिकॉर्ड कर रहा था। इस बीच ठग को शक हो गया कि उसकी रिकॉर्डिंग की जा रही है।
ठग भड़क गया और गाली देते हुए पूछा- नरेश को कब से जानते हो?
रिपोर्टर ने कहा कि वो किसी नरेश गोयल को नहीं जानता। ठग लगातार चिल्ला रहा था। गाली दे रहा था। बोला-
तुम नहीं जानते तो बैंक अकाउंट कैसे खुला? 6 करोड़ रुपए का ट्रांजैक्शन कैसे हुआ? दो अरेस्ट वारंट हैं तुम्हारे नाम के, अरेस्ट करूं क्या?

धमकाया: 15 मिनट में पुलिस घर पहुंच जाएगी, लोकेशन मंगवाई रिपोर्टर ने डरने का दिखावा करते हुए गिरफ्तार न करने की गुहार लगाई। ठग ने पूछा-क्या जॉब करते हो? रिपोर्टर ने बताया- ‘मेडिकल इक्विपमेंट की डिलीवरी का काम करता हूं। 19 हजार सैलरी है।’
ठग ने फिर धमकी दी–
90 दिन तक वकील नहीं कर पाओगे। न ही परिवार से मिल सकोगे। लोकेशन शेयर करो। 15 मिनट में तुम्हारे घर पुलिस पहुंच जाएगी। अभी तुम्हें अरेस्ट कराता हूं। तेरे अकाउंट में अपराधियों और राजनेताओं का पैसा भी आया है। तेरे खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी हो चुका है।

सुबह 11 बजे : रिपोर्टर ने पानी पीने के लिए पूछा तो गाली दी सुबह के 11 बज चुके थे। रिपोर्टर 5 घंटे से डिजिटल अरेस्ट था। इस दौरान न पानी पीने दिया और न कुछ खाने दिया। रिपोर्टर बोला- ‘सुबह से पानी तक नहीं पीया। चक्कर आ रहे हैं। पानी पीने जा सकता हूं क्या?’
ठग ने गाली देते हुए कहा- चुपचाप कैमरे के सामने बैठा रह। तेरे पिता को पता चलेगा तो क्या होगा? ऐसा क्राइम करने से पहले सोचा था? नरेश गोयल के घर से तुम्हारा एटीएम कार्ड मिला है। करघर ब्रांच से अकाउंट तुमने नहीं तो क्या मैंने खुलवाया है?
इसके बाद रिपोर्टर से प्रॉपर्टी और बैंक बैलेंस के बारे में पूछा। परिवार के बारे में पूछताछ की। रिपोर्टर ने कहा-अकेला रहता हूं तो ठग बोला- ‘मेरी पोस्टिंग अभी दिल्ली से मुंबई हुई है। मैं परिवार के साथ रहता हूं। तुम अपराधी हो, इसलिए अकेले रहते हो।’
सुबह 12 बजे : रिपोर्टर ने बताया- दैनिक भास्कर में हूं तो कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया ठग ने शेयर और क्रिप्टो में इन्वेस्टमेंट के बारे में पूछा। रिपोर्टर ने बताया कि वह इस बारे में नहीं जानता। इस पर पूछा- नरेश गोयल से 6 करोड़ 80 लाख रुपए क्यों लिए थे?
जवाब नहीं दिया तो रिपोर्टर को धमकाते हुए-एटीएम, ऑनलाइन अकाउंट, चैक बुक, यूपीआई से लिंक मोबाइल नंबर और यूपीआई ऐप की जानकारी मांगी। कहा- पैसों के बारे में कुछ भी छिपाया तो सख्त कार्रवाई होगी।
रिपोर्टर ने बैंक और यूपीआई से जुड़ी जानकारी देने से मना कर दिया। ठग ने पिता का नंबर मांगा। कहा- तुम्हारे क्राइम के बारे में तुम्हारे पिता को बताता हूं।
कंपनी के मैनेजर के भी नंबर मांगे। कहा- तेरी नौकरी चली जाएगी। दूसरी जगह भी नौकरी करने लायक नहीं बचेगा। समाज में परिवार में इज्जत खराब हो जाएगी।
आखिर 12 बजे तक ठगों ने डरा-धमका कर रिपोर्टर के बैंक अकाउंट की जानकारी ली। रिपोर्टर ने समझदारी दिखाते हुए उस अकाउंट से पहले ही सारे पैसे निकाल लिए थे। ठगों ने अकाउंट देखा तो उनका गुस्सा और बढ़ गया।
रिपोर्टर को गाली देकर पूछा- सच-सच बता, क्या करता है?
रिपोर्टर ने कहा- दैनिक भास्कर में जर्नलिस्ट हूं।
ये सुनते ही ठगों ने वीडियो कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया।
इसलिए जरूरी था ये इंवेस्टिगेशन
कौन है नरेश गोयल, जिसके नाम से लोगों को ठगा जा रहा
- नरेश गोयल का उद्योग जगत में बड़ा नाम था। उन्होंने 1993 में जेट एयरवेज की स्थापना की थी।
- 2005 में जेट एयरवेज के IPO के बाद फोर्ब्स ने नरेश गोयल को 1.9 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ भारत का 16वां सबसे अमीर शख्स बताया था।
- गोयल को 1 सितंबर, 2023 को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था।
- ED ने आरोप लगाया कि गोयल ने केनरा बैंक द्वारा जेट एयरवेज को दिए गए 538.62 करोड़ रुपए के ऋण की हेराफेरी की।
कुछ ही समय में दूसरे खाते में पहुंच जाते हैं रुपए
- ज्यादातर मामलों में लोग सोशल मीडिया पर आने वाले खरीदारी, क्रेडिट स्कोर व अन्य लिंक पर क्लिक करने की गलती करते हैं। दूसरी गलती अनजान लिंक पर अपने आधार और पैन कार्ड से जुड़ी डिटेल साझा करना।
- इससे ठगों के पास आपसे जुड़ी तमाम जरूरी सूचनाएं पहुंच जाती हैं। इसके बाद ठग उन लोगों को अलग-अलग माध्यम से फोन करते हैं।
- 6 से 24 घंटे तक कैमरे के सामने बैठाकर रखते हैं। केस में फंसाने के नाम पर अलग-अलग इंक्वारी का हवाला देते हुए उनके सभी निवेश व खातों के बारे में जानकारी ले लेते हैं।
- डरा धमका कर पीड़ित से अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करवा देते हैं। कुछ ही समय में उन खातों से पैसे निकाल कर दूसरे खातों में ट्रांसफर कर लेते हैं।
रुपए ट्रांसफर के लिए किराए पर लेते हैं अकाउंट कुड़ी थानाधिकारी राजेंद्र चौधरी ने बताया कि हाल में महिला डॉक्टर नम्रता माथुर के साथ भी डिजिटल अरेस्ट का मामला सामने आया था। पुलिस ने इस केस में उन पांच लोगों को गिरफ्तार किया, जिनके खाते में डिजिटल अरेस्ट के बाद पैसे ट्रांसफर हुए।
बाद में पता चला कि इन सभी युवकों ने अपने खातों को ठगों को किराए पर दे रखा था। अभी मामले में इंवेस्टिगेशन चल रही है। जांच पूरी हाेने के बाद ही खुलासा हो पाएगा कि डिजिटल अरेस्ट के अलग-अलग मामलों में कितने गिरोह सक्रिय हैं।
