शहडोल में जन्मे दो शरीर दिल एक वाले जुड़वा बच्चे:मां बोली- शादी के 6 साल बाद हुए; डॉक्टर ने कहा- एक लाख में ऐसा एक केस होता है
शहडोल मेडिकल कॉलेज में रविवार शाम को दो जिस्मों के साथ एक दिल वाले नवजात बच्चे पैदा हुए हैं। दोनों नवजातों के जिस्म आपस में जुड़े हुए हैं। बच्चों की मां स्वस्थ है। वहीं सीने में एक दिल लेकर आपस में जुड़े नवजातों को देखकर परिजन की चिंता बढ़ गई। नवजात बच्चों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। मेडिकल कालेज प्रबंधन इन्हें रीवा या जबलपुर भेजने की तैयारी कर रहा है।
अनूपपुर जिले के कोतमा की रहने वाली वर्षा जोगी (25) पति रवि जोगी को परिजन रविवार को प्रसव के लिए मेडिकल कॉलेज लेकर आए थे। यहां शाम करीब 7 बजे प्रसूता का सीजेरियन किया गया। इस दौरान जुड़वा बच्चे पैदा हुए। परिजन ने बताया कि रूटीन चेकअप के दौरान डॉक्टर यह बता रहे थे कि बच्चे जुड़वा हैं, लेकिन दोनों जुड़े हैं ये नहीं बताया था। वहीं, डॉक्टर कह रहे हैं कि दुनिया में 1 लाख में से ऐसा एक बच्चा पैदा होता है।
परिजन ने कहा- बच्चों का पालन-पोषण कैसे करेंगे नवजातों को जन्म देने वाली मां समेत परिवार के लोग ऐसी हालत में जुड़वा बच्चों को देखकर चिंता में पड़ गए हैं। उन्हें समझ में ही नहीं आ रहा है की शरीर से एक-दूसरे से जुड़े बच्चों का पालन-पोषण कैसे करेंगे। इनका भविष्य और स्वास्थ्य का क्या होगा।
2018 में की थी लव-मैरिज नवजात के पिता रवि और मां वर्षा ने 2018 में लव मैरिज की थी। शादी से घर वाले खुश नहीं थे। इस कारण दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली। दोनों रायपुर चले गए। वहां मजदूरी करके जीवन यापन कर रहे थे। रवि ने बताया कि शादी के कुछ साल बाद परिवार के साथ रिश्ते सामान्य हो गए थे।
खून की कमी के कारण थी समस्या रवि ने बताया कि मेरी पत्नी को खून की कमी थी। इस कारण गर्भधारण करने में समस्या हो रही थी। रायपुर में इलाज भी करवा रहे थे। अनूपपुर में कुछ डॉक्टर्स को दिखाया। वहां बताया गया था कि बच्चे जुड़वां हैं, लेकिन इस स्थिति में हैं, यह नहीं बताया था।
आर्थिक स्थिति के कारण रेफर में दिक्कत प्रभावित परिवार की आर्थिक स्थिति कमजाेर है। इस कारण वो नवजात को बेहतर इलाज के लिए बाहर नहीं ले जा सकते। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स ने परिजन से रेफर को लेकर बात की थी, लेकिन परिजन ने मना कर दिया
शारीरिक बनावट ऐसी की ऑपरेशन भी मुश्किल मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉक्टर नागेंद्र सिंह ने कहा कि दोनों बच्चे सीने से जुड़े हुए हैं। इनका शरीर सामान्य तरीके से विकसित नहीं हो सका है। बनावट के कारण ऑपरेशन भी कठिन है। नवजातों का शरीर सीने के पास से आपस में जुड़ा है, लेकिन दिल एक होने के कारण स्थिति सामान्य नहीं है। फिलहाल नवजातों को एसएनसीयू वार्ड में रखा गया है।
बच्चे छाती से जुड़े हैं। इस कंडीशन को थोराइगोपेसिस कहा जाता है। एक लाख में से इस तरह का एक बच्चा पैदा होता है। ऐसे बच्चों की स्थिति खराब होती है। बच्चों को प्राइमरी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। बच्चाें के माता-पिता कहीं ले जाने को तैयार नहीं हैं। बच्चों की जांच की जा रही है, कहीं और कोई विकृति तो नहीं है। बच्चे एसएनसीयू में भर्ती हैं।
डॉक्टर बोले-ऐसे नवजातों को सीमंस ट्विन्स कहते हैं मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉक्टर नागेन्द्र सिंह ने बताया कि ऐसे मामले यदाकदा ही सामने आते हैं। ऐसे नवजातों को सीमंस ट्विंस भी कहा जाता है। जिसमें दो अलग अलग भ्रूण शुरुआती अवस्था में गर्भ के अंदर एक-दूसरे से चिपक जाते हैं, जिससे ऐसी स्थिति बन जाती है। ऐसे बच्चे का जीवन आगे स्थिर रह पाना बड़ा ही कठिन होता है।
ऐसे बच्चों को कोन्जाॅइंड ट्विंस कहा जाता है दोनों के दो सिर, दो चेहरे हैं, लेकिन पैर दो और किडनी, लिवर व ब्लैडर एक-एक हैं। इन्हें अलग नहीं किया जा सकता। ऐसे बच्चों को कोन्जाॅइंड ट्विंस भी कहा जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि दुनिया में 2 लाख में से एक बच्चा ऐसा पैदा होता है। ऐसे 95 फीसदी बच्चे जन्म के एक साल के भीतर दम तोड़ देते हैं। एक अनुमान ये भी है कि 2 लाख में से केवल 1 जुड़वां बच्चा ऐसा होता है जो लंबा जीवन जीता है।
