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चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र की DGP का ट्रांसफर किया:विपक्ष की शिकायत पर एक्शन, कांग्रेस ने कहा था- रश्मि निष्पक्ष चुनाव नहीं होने दे रहीं

चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र की DGP का ट्रांसफर किया:विपक्ष की शिकायत पर एक्शन, कांग्रेस ने कहा था- रश्मि निष्पक्ष चुनाव नहीं होने दे रहीं

मुंबई1 घंटे पहले
1988 बैच की महाराष्ट्र कैडर की IPS ऑफिसर रश्मि शुक्ला के नाम महाराष्ट्र की पहली महिला DGP होने का रिकॉर्ड है।

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की वोटिंग से 16 दिन पहले चुनाव आयोग ने DGP रश्मि शुक्ला का ट्रांसफर कर दिया है। चुनाव आयोग ने सोमवार सुबह चीफ सेक्रेटरी को रश्मि के ट्रांसफर के निर्देश देते हुए कहा कि कैडर में अगले सबसे सीनियर IPS अधिकारी को उनका प्रभार सौंपा जाएगा।

साथ ही आयोग ने चीफ सेक्रेटरी को निर्देश दिए कि महाराष्ट्र के नए DGP की नियुक्ति के लिए कल (5 नवंबर) दोपहर 1 बजे तक तीन IPS अधिकारियों का पैनल भेजें। रश्मि शुक्ला के खिलाफ महाराष्ट्र के विपक्षी गठबंधन ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी। कांग्रेस ने कहा था कि रश्मि चुनाव को निष्पक्ष तरीके से नहीं होने दे रही हैं।

रश्मि के ट्रांसफर को लेकर शरद पवार ने कहा है कि चुनाव आयोग ने सही फैसला किया है। हम इस फैसले का स्वागत करते हैं।

1988 बैच की IPS ऑफिसर रश्मि शुक्ला के नाम महाराष्ट्र की पहली महिला DGP बनने का भी रिकॉर्ड है। रश्मि सशस्त्र सीमा बल की महानिदेशक और महाराष्ट्र इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट की प्रमुख भी रह चुकी हैं।

विपक्ष का आरोप- रश्मि भाजपा के लिए काम कर रहीं

  • शिवेसना (शिंदे) नेता संजय राउत: DGP रश्मि शुक्ला पर बहुत गंभीर आरोप हैं। रश्मि भाजपा के लिए काम करती हैं। 2019 में जब हमारी सरकार थी, तब ये हमारे सारे फोन टैप करवा रही थीं। हमारी पूरी जानकारी फडणवीस को दी जाती थी। क्या हम उनसे निष्पक्ष चुनाव करवाने की उम्मीद कर सकते हैं? चुनाव की बागडोर उन्हें नहीं दी जानी चाहिए। ​
  • कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले: पिछले कुछ दिनों में विपक्षी दलों के खिलाफ राजनीतिक हिंसा में बढ़ोतरी हुई है। महाराष्ट्र में कानून व्यवस्था भी खराब हुई है। DGP कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और NCP (SP) के खिलाफ भेदभाव करती हैं। राज्य खुफिया विभाग के आयुक्त के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने फोन टैपिंग कराई थी।

रश्मि पर संजय राउत की फोन टैपिंग का आरोप, मुंबई में FIR दर्ज हुई थी महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी सरकार के दौरान रश्मि शुक्ला राज्य खुफिया विभाग की प्रमुख थीं, तब उन पर शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत और NCP नेता एकनाथ खडसे के फोन टैप करने का आरोप लगा था। इसे लेकर उनके खिलाफ मुंबई में FIR भी दर्ज कराई गई थी।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने अधिकारियों को निष्पक्ष रहने की चेतावनी दी थी सीईसी राजीव कुमार ने पहले समीक्षा बैठकों और राज्य में विधानसभा चुनावों की घोषणा के दौरान अधिकारियों को न केवल निष्पक्ष रहने की चेतावनी दी थी, बल्कि अपने कर्तव्यों का पालन करते समय उनके आचरण में गैर-पक्षपाती होने की भी चेतावनी दी थी।

झारखंड में भी विधानसभा चुनाव से पहले DGP का ट्रांसफर महाराष्ट्र के साथ झारखंड में भी आचार संहिता लगी हुई है। 19 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने झारखंड के भी डीजीपी अनुराग गुप्ता का ट्रांसफर किया था। चुनाव आयोग ने DGP को तत्काल प्रभाव से हटाने के बाद उनकी रैंक के सबसे सीनियर अधिकारी को इसका प्रभार सौंपा था।

महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरण पर एक नजर…

लोकसभा चुनाव में भाजपा 23 से 9 सीटों पर सिमटी लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की 48 सीटों में से INDIA गठबंधन को 30 और NDA को 17 सीटें मिलीं।। इनमें भाजपा को 9, शिवसेना को 7 और NCP को सिर्फ 1 सीट मिली थी। भाजपा को 23 सीटों का नुकसान हुआ। 2019 के लोकसभा चुनाव से NDA को 41 जबकि 2014 में 42 सीटें मिली थीं।

लोकसभा चुनाव के हिसाब से भाजपा को नुकसान का अनुमान महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में भी अगर लोकसभा चुनाव जैसा ट्रेंड रहा तो भाजपा को नुकसान होगा। भाजपा 60 सीटों के आसपास सिमटकर रह जाएगी। वहीं, विपक्षी गठबंधन के सर्वे में MVA को 160 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। भाजपा के लिए मराठा आंदोलन सबसे बड़ी चुनौती है। इसके अलावा शिवसेना और NCP में तोड़फोड़ के बाद उद्धव ठाकरे और शरद पवार के साथ लोगों की सिम्पैथी है।

विधानसभा चुनाव- 2019

  • 2019 में BJP-शिवसेना गठबंधन था। BJP ने 105 सीटें और शिवसेना ने 56 सीटें जीतीं। गठबंधन से NCP को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं। भाजपा-शिवसेना आसानी से सत्ता में आ जाती, पर मनमुटाव के कारण गठबंधन टूट।
  • 23 नवंबर 2019 को फड़नवीस ने मुख्यमंत्री और अजीत पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि, बहुमत परीक्षण से पहले 26 नवंबर को ही दोनों ने इस्तीफा दे दिया।
  • 28 नवंबर को शिवसेना (अविभाजित), NCP (अविभाजित) और कांग्रेस की महाविकास अघाड़ी सत्ता में आई।
  • इसके बाद शिवसेना (अविभाजित) और NCP (अविभाजित) में फूट पड़ गई और ये दो पार्टियां चार धड़ों में बंट गई। फिर भी लोकसभा चुनाव में शरद पवार और उद्धव ठाकरे को फायदा हुआ। अब इसी पृष्ठभूमि पर विधानसभा चुनाव भी हो रहा है। पूरी खबर पढ़े…

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