जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग आतंकी हमले के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) चीफ फारूक अब्दुल्ला ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने शुक्रवार को कहा, ‘पाकिस्तान को हिंसा बंद करके भारत के साथ दोस्ती का रास्ता तलाशना चाहिए।’
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने की जगह अपनी दुर्दशा पर ध्यान देना चाहिए, अपनी बेहतरी के लिए काम करना चाहिए। मैं पिछले 30 सालों से यह देख रहा हूं, जम्मू-कश्मीर में निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं।
फारूक बोले, ‘गुलमर्ग जैसे हमले तब तक होते रहेंगे जब तक भारत और पाकिस्तान दोस्ती का रास्ता नहीं खोज लेते। आप जानते हैं कि वे (आतंकवादी) कहां से आते हैं। ये तब तक नहीं रुकेगा जब तक इस परेशानी से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिल जाता।’
दरअसल, गुरुवार की देर रात 3 से ज्यादा आतंकियों ने 18 राष्ट्रीय राइफल्स के वाहन पर हमला किया था। इसमें 2 पोर्टर और 3 जवान शहीद हो गए थे।
मैं शहीदों के परिवार से माफी मांगता हूं अब्दुल्ला ने कहा कि मैं गुलमर्ग हमले के शहीद जवानों और मृतक कुलियों को श्रद्धांजलि देता हूं। उनके परिवारों से माफी मांगता हूं।
अब्दुल्ला से पूछा गया कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में हुए रिकॉर्ड मतदान से क्या पाकिस्तान हताश है, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि क्या हुआ।
उन्होंने कहा कि लोगों ने विधानसभा चुनावों में मतदान किया और अब विधानसभा लोगों के लिए काम करेगी। हमें उम्मीद है कि केंद्र पूर्ण राज्य का दर्जा देगा ताकि सरकार लोगों के लिए काम कर सके।
उमर अब्दुल्ला की केंद्रीय गृह मंत्री शाह से मुलाकात पर फारूक ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार को चलाने के लिए केंद्र के साथ समन्वय की आवश्यकता है। जब मैं मुख्यमंत्री था, तो मैं हर बार यही कहता था कि समन्वय अच्छी बात है क्योंकि सब कुछ उनके (केंद्र सरकार) पास है।
फारूक ने कहा था- कश्मीर कभी पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बनेगा जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने 21 अक्टूबर को कहा था कि अगर इस्लामाबाद (पाकिस्तान) भारत के साथ दोस्ताना संबंध रखना चाहता है तो उसे यहां आतंकी घटनाएं रोकनी होंगी
उन्होंने कहा था कि दोनों देशों में बातचीत कैसे हो सकती है? आप (पाकिस्तान) हमारे निर्दोष लोगों को मारते हैं और फिर बातचीत के लिए कहते हैं। जब तक पड़ोसी देश जम्मू-कश्मीर में हत्याएं बंद नहीं करता, तब तक नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच कोई बातचीत नहीं हो सकती। पूरी खबर पढ़ें…
