संविधान बदलने’ और ‘संविधान बचाने’ को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार जारी हैं। इस बीच, नरेंद्र मोदी सरकार 26 नवंबर को संसद का विशेष संयुक्त अधिवेशन बुलाने पर विचार कर रही है। यह सत्र संविधान पारित होने के 75 वर्ष पूरे होने के मौके को समर्पित होगा, जो नई संसद में आहूत किया जाएगा।
सूत्रों ने बताया- संसद का शीतकालीन सत्र अमूमन दिसंबर के पहले सप्ताह में शुरू होता है, लेकिन ‘संविधान दिवस के 75 वर्ष’ के मौके पर इसे एक हफ्ते पहले बुला सकते हैं। 70वें संविधान दिवस पर भी शीतकालीन सत्र का पहला दिन इस आयोजन काे समर्पित हुआ था।
सूत्रों ने कहा, संविधान दिवस पर संयुक्त सत्र बुलाने और शीतकालीन सत्र की तारीखों को लेकर राजनीतिक मामलों की कैबिनेट कमेटी नवंबर के पहले हफ्ते में फैसला लेगी। संयुक्त बैठक के आयोजन का फाॅर्मेट भी कैबिनेट की समिति तय करेगी। यह विशेष आयोजन होगा या संयुक्त अधिवेशन में सभी दलों की चर्चा के लिए खुला होगा, इसकी रूपरेखा अभी स्पष्ट नहीं है।
2 राज्यों की चुनाव तारीखों पर भी निर्भर संसद के शीतकालीन सत्र की तारीखें तय होना महाराष्ट्र और झारखंड के विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम पर भी निर्भर है। निर्वाचन आयोग दोनों राज्यों की चुनावी तैयारी की समीक्षा कर चुका है। आयोग इसी महीने के अंत तक चुनाव कार्यक्रम भी घोषित कर सकता है।
संविधान दिवस संसदीय समारोह के साथ मनाने के बारे में सरकार की मंशा ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब आम चुनाव के बाद भी संविधान को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच संग्राम थमा नहीं है।
जातीय जनगणना के साथ-साथ पिछड़े वर्गों का आरक्षण बचाने और बढ़ाने के मुद्दे पर बहस लगातार जारी है। इस बीच अनुसूचित जातियों के बीच उपश्रेणियां बनाने के संबंध सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने भी संविधान संबंधी बहस को और तीखा किया है।
26 नवंबर 1949 को संविधान पारित हुआ था संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान पारित किया था, जिसे 26 जनवरी 1950 को देश ने अंगीकार किया। सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय ने 19 नवंबर 2015 को एक अधिसूचना जारी कर 26 नवंबर को हर वर्ष ‘संविधान दिवस’ के तौर पर मनाने के निर्णय की अधिसूचना जारी की थी। इसका मकसद इस दिन को नागरिकों के बीच संवैधानिक मूल्यों के प्रोत्साहन के तौर पर मनाना है।
26 नवंबर 1949 को लागू क्यों नहीं हुआ था संविधान? ऐसा करने की एक खास वजह थी, दरअसल, 26 जनवरी, 1930 को कांग्रेस ने देश की पूर्ण आजादी का नारा दिया था। इसी की याद में संविधान को लागू करने के लिए 26 जनवरी, 1950 तक इंतजार किया गया।
दरअसल, 1929 में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पहली बार पूर्ण स्वराज की शपथ ली गई थी। उस अधिवेशन में अंग्रेज सरकार से मांग की गई थी कि भारत को 26 जनवरी, 1930 तक संप्रभु दर्जा दे दिया जाए। फिर 26 जनवरी, 1930 को पहली बार पूर्ण स्वराज या स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था।
इसके बाद 15 अगस्त, 1947 तक यानी अगले 17 सालों तक 26 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता रहा। इस दिन के महत्व की वजह से 1950 में 26 जनवरी को देश का संविधान लागू किया गया और इसे गणतंत्र दिवस घोषित किया गया।
