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पंजाब-हरियाणा में किसानों ने रोकी ट्रेनें:रेलवे ट्रैक पर बैठ किया प्रदर्शन; कंगना और बिट्‌टू किसानों को बदनाम करने की कर रहे हैं कोशिश

पंजाब-हरियाणा में किसानों ने रोकी ट्रेनें:रेलवे ट्रैक पर बैठ किया प्रदर्शन; कंगना और बिट्‌टू किसानों को बदनाम करने की कर रहे हैं कोशिश

चंडीगढ़5 घंटे पहले
फिरोजपुर में रेलेव ट्रैक पर बैठे किसान।

फसलों पर MSP की लीगल गारंटी व लखमीरपुर खीरी मामले को लेकर आज किसानों ने पंजाब व हरियाणा में करीब 36 जगह दो घंटे तक रेलवे ट्रैक पर बैठकर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन दोपहर साढ़े 12 बजे से ढाई बजे तक चला। इस दौरान कई ट्रेन प्रभावित हुई। जिसकी वजह से आम लोगों को दिक्कत उठानी पड़ी। प्रदर्शन संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) और किसान मजदूर संगठन के बैनर तले चला। धरने की समयावधि में चंडीगढ़, अंबाला, अमृतसर, लुधियाना और जम्मू रूट पूरी तरह प्रभावित है।

किसानों को बदनाम करने की साजिश

अमृतसर में रेल रोको आंदोलन में पहुंचे किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने बीजेपी सांसद कंगना रनोट और केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर लखीमपुर कांड में बिट्टू के साथियों की मौत हो गई होती तो उनका क्या हाल होना था।

उन्होंने कंगना को मूर्ख बताते हुए कहा कि केंद्र और बीजेपी नेताओं के इशारे पर कंगना और बिट्टू किसानों को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। सरवन सिंह ने कहा कि अगर केंद्र व राज्य सरकार ने समय रहते आढ़तियों व श्रमिक संगठनों की मांगें मानकर हड़ताल खत्म नहीं करवाई तो किसान भी इस आंदोलन में शामिल हो जांएगे।

वहीं, भारतीय किसान यूनियन बीकेयू नेता हरजिंदर सिंह ने धरना प्रदर्शन के दौरान जानकारी देते हुए बताया की लखीमपुर खीरी में किसानों को तीन साल से इंसाफ नहीं मिला है। बीजेपी नेता के बेटे ने कई किसानों को कुचल दिया था। जिसके चलते हमें आज रेल रोकनी पड़ी है।

प्रदर्शन की तस्वीरें..

अमृतसर में ट्रेनों को रद् करने संबंधी सूचना डिस्प्ले बोर्ड पर प्रदर्शित होते हुए।
अंबाला में रेलवे ट्रैक पर बैठ हाथों में झंडे लिए नारेबाजी करते किसान।
पटियाला में रेलवे ट्रैक पर बैठे हुए किसान।
फिरोजपुर में धरना देते हुए किसान

शंभू बॉर्डर के पास ट्रैक पर बैठे किसान

किसानों ने शंभू बॉर्डर पर भी रेल ट्रैक पर बैठे थे। इसके अलावा पटियाला, लुधियाना, बठिंडा, फिरोजपुर में किसान ट्रैक पर बैठे थे। किसानों का कहना था कि वह लोगों की मुश्किल को समझते है। मजबूरी में उन्हें यह राह चुनी है।

इस साल यह तीसरा मौका है, जब किसान रेलवे ट्रैक जाम किया हैं। इससे पहले किसानों ने अमृतसर में 15 फरवरी को पहली बार रेल ट्रैक रोके थे। फिर 16 अप्रैल को शंभू ट्रैक पर प्रदर्शन शुरू किया था, जो कि करीब 34 दिन तक चला था।

शंभू बॉर्डर के पास ट्रैक पर प्रदर्शन करते किसान।

RPF अधिकारियों ने बैठक की RPF के सीनियर DSP अरुण कुमार त्रिपाठी ने अपनी डिवीजन में आने वाले सभी पोस्ट के प्रभारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस से बैठक की। उन्होंने सतर्कता बनाए रखने के आदेश दिए। रेलवे ट्रैक व स्टेशनों पर RPF भी तैनात रहेगी। खुफिया एजेंसियां भी नजर बनाए हुए हैं।

किसान खुद उठाएंगे रेल रोकने का नुकसान पंजाब के किसान संगठनों द्वारा 35 जगहों पर रेल ट्रैक जाम करने के ऐलान पर केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्‌टू ने कहा कि किसानों को रेल ट्रैक रोकने का नुकसान खुद उठाना पड़ेगा। इस पर किसानों ने केंद्रीय मंत्री के बयान का जवाब भी दिया।

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल और सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि आंदोलन लखीमपुर खीरी में मारे गए 4 किसानों और पत्रकार को इंसाफ दिलाने को लेकर है। बिट्टू यह न भूलें कि जिस सरकार में वह मंत्री हैं, उसी ने आरोपियों को मंत्री बनाए रखा था।

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