सोनम वांगचुक दिल्ली के पुलिस स्टेशन में अनशन पर बैठे:पुलिस ने कल हिरासत में लिया था; मामला हाईकोर्ट पहुंचा, 3 अक्टूबर को सुनवाई
लद्दाख के सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने मंगलवार को दिल्ली के बवाना पुलिस स्टेशन में अनिश्चित काल के लिए अनशन शुरू कर दिया है। लद्दाख को स्टेटहुड दिलाने की मांग को लेकर सोमवार देर रात दिल्ली पहुंचे सोनम सहित लगभग 120 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया था।
पुलिस ने बताया कि वांगचुक दिल्ली बॉर्डर पर रात बिताना चाहते थे। दिल्ली में 5 अक्टूबर तक धारा 163 लागू है। मार्च कर रहे लोगों को वापस जाने के लिए कहा गया था, जब वे नहीं माने तब एक्शन लिया गया।
सोनम वांगचुक को हिरासत में लेने का मामला मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया। एक याचिका में सोनम वांगचुक और अन्य लोगों की रिहाई का आदेश देने की अपील की गई है। कोर्ट 3 अक्टूबर को मामले की सुनवाई के लिए तैयार हो गई है।
चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस तुषार राव गेडेला की अगुवाई वाली बेंच ने याचिकाकर्ता को आज दोपहर 3:30 बजे तक सभी जरूरी दस्तावेज दाखिल करने को कहा है।
लेह अपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस पिछले 4 साल से लद्दाख को स्टेटहुड दिलाने की मांग कर रहे हैं। सोनम वांगचुक ने एक महीने पहले 120 लोगों के साथ लेह से दिल्ली में बापू की समाधि स्थल तक पैदल मार्च निकाला था। करीब 700 किमी पैदल यात्रा को उन्होंने ‘दिल्ली चलो पदयात्रा’ नाम दिया।
वांगचुक बोले- हिरासत में लेते समय हजार पुलिसकर्मी थे
वांगचुक ने सोमवार रात हिरासत में लेने के बाद X पर एक पोस्ट शेयर की। इसमें उन्होंने कहा- मुझे दिल्ली की बॉर्डर पर डिटेन किया गया है। कुछ लोग कह रहे हैं कि यहां 1,000 पुलिसवाले हैं। हमारे साथ कई बुजुर्ग हैं। हमारे भाग्य क्या लिखा है, हमें नहीं पता। हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और लोकतंत्र की जननी में बापू की समाधि तक शांतिपूर्ण मार्च पर थे। हे राम।
वांगचुक को वकीलों से मिलने की अनुमति नहीं वांगचुक से जुड़े लोगों ने बताया कि वांगचुक को बवाना पुलिस स्टेशन में वकीलों से मिलने नहीं दिया जा रहा है। इसलिए वांगचुक के साथ अन्य समर्थकों ने भी अनशन शुरू कर दिया है। वांगचुक ने इस मार्च के लिए मोदी और अमित शाह को भी ईमेल भेजकर अनुमति मांगी थी।
लद्दाख सांसद बोले- महिलाओं को पुरुषों के साथ रखा गया सोमवार देर रात को वांगचुक के हिरासत में लेने के बाद सिंघु बॉर्डर पर लद्दाख के सांसद हाजी हनीफा जान पहुंचे। उन्होंने कहा- पुलिस ने 30 महिलाओं को भी हिरासत में लिया है। उन्हें पुरुषों के साथ रखा गया है। दिल्ली पुलिस ने मंगलवार सुबह सांसद हनीफा को भी हिरासत में लिया। उन्हें नरेला पुलिस स्टेशन ले जाया गया है।
सांसद ने कहा कि हर कोई जानता है कि लद्दाख पर्यावरण और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार के साथ कैसे बातचीत कर रहा है। पिछले 3 सालों से हम अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्वक लड़ रहे थे। इसके लिए हमने सरकार से बातचीत भी की थी, लेकिन चुनाव और नई सरकार के गठन के बाद उन्होंने बातचीत बंद कर दी।
वांगचुक को हिरासत में लेने पर किसने क्या कहा?
राहुल गांधी: पर्यावरण और संवैधानिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्वक मार्च कर रहे सोनम वांगचुक जी और सैकड़ों लद्दाखियों की हिरासत में लेना सही है। लद्दाख के भविष्य के लिए खड़े होने वाले बुजुर्ग नागरिकों को दिल्ली की सीमा पर हिरासत में क्यों लिया जा रहा है? मोदी जी, किसान बिल की तरह ये चक्रव्यूह और आपका अहंकार टूटेगा। आपको लद्दाख की आवाज सुननी होगी।
केसी वेणुगोपाल: मुझे समझ नहीं आ रहा है कि सरकार किस तरह से काम कर रही है। सोनम वांगचुक लद्दाख के बहुत सम्मानित व्यक्ति हैं। पूरे भारत में लोग उनका सम्मान करते हैं। उन्होंने लद्दाख से राजघाट तक शांतिपूर्ण मार्च की योजना बनाई। उनके साथ कई कांग्रेस नेताओं को भी हिरासत में लिया गया है। वे अपने वैध अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
मल्लिकार्जुन खड़गे: सत्ता के नशे में चूर मोदी सरकार ने कायरतापूर्ण कार्रवाई है। मोदी सरकार अपने मित्रों को लाभ पहुंचाना चाह रहे हैं। यह घटना हमें बताती है कि मोदी सरकार के खिलाफ हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर वरिष्ठ भाजपा नेता रविशंकर ने कहा, “मुझे तथ्य नहीं पता। मुझे तथ्यों की जांच करनी होगी।”
रविशंकर प्रसाद: अगर राहुल गांधी को कोई टिप्पणी करनी है, तो कोलकाता में कार्टूनिस्टों को उठाए जाने और तमिलनाडु में व्यंग्यकार को जेल में डाले जाने पर वह क्यों चुप्पी साधे रहते हैं। वांगचुक की हिरासत पर कांग्रेस नेता की प्रतिक्रिया चरम पाखंड है।
मनीष सिसोदिया: दिल्ली, कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक सभी की है। आप लोगों को सीमा में प्रवेश करने से नहीं रोक सकते। भाजपा सरकार धीरे-धीरे देश के हर राज्य को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के फॉर्मूले पर काम कर रही है। सोनम वांगचुक जो आवाज उठा रहे थे, वह खतरे के खिलाफ आवाज थी। वांगचुक ने आपको क्या नुकसान पहुंचाया है? आप आवाज को दबा नहीं सकते। आज हर कोई देख रहा है कि केंद्र सरकार क्या कर रही है।
आतिशी: लद्दाख के लोग राज्य का दर्जा चाहते हैं। सोनम वांगचुक और लद्दाख के लोग, जो बापू की समाधि पर जा रहे थे, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने मुझे सोनम वांगचुक से मिलने नहीं दिया। यह भाजपा की तानाशाही है। हम सोनम वांगचुक का पूरा समर्थन करते हैं।
मार्च में सोनम वांगचुक ने 21 दिन की भूख हड़ताल की थी
सोनम वांगचुक लद्दाख को पूर्ण राज्य बनाने, स्थानीय लोगों के लिए नौकरी में आरक्षण, लेह और कारगिल के लिए एक-एक संसदीय सीट और संविधान की छठी अनुसूची लागू करने की मांग को लेकर काफी समय से प्रदर्शन कर रहे हैं।
इसी साल मार्च में सोनम ने 21 दिन की भूख हड़ताल की थी। भूख हड़ताल खत्म करने के बाद सोनम वांगचुक ने कहा था- ये आंदोलन का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। अपनी मांगों को लेकर हमें जब तक आंदोलन करना पड़े, हम करेंगे।
आर्टिकल 370 हटने के बाद शुरू हुआ आंदोलन केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाकर पूर्ण राज्य का दर्जा खत्म कर दिया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बना। लेह और कारगिल को मिलाकर लद्दाख अलग केंद्र शासित प्रदेश बना था।
इसके बाद लेह और कारगिल के लोग खुद को राजनीतिक तौर पर बेदखल महसूस करने लगे। उन्होंने केंद्र के खिलाफ आवाज उठाई। बीते दो साल में लोगों ने कई बार विरोध-प्रदर्शन कर पूर्ण राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा मांगते रहे हैं, जिससे उनकी जमीन, नौकरियां और अलग पहचान बनी रही, जो आर्टिकल 370 के तहत उन्हें मिलता था।
केंद्र ने मांगें मानने से इनकार किया था इस साल की शुरुआत में बौद्ध बहुल लेह और मुस्लिम बहुल कारगिल के नेताओं ने लेह स्थित एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) के बैनर तले हाथ मिलाया। इसके बाद लद्दाख में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन और भूख हड़ताल होने लगीं।
केंद्र ने मांगों पर विचार करने के लिए एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत सफल नहीं हुई। 4 मार्च को लद्दाख के नेताओं ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और बताया कि केंद्र ने मांगें मानने से इनकार दिया है। इसके दो दिन बाद वांगचुक ने लेह में अनशन शुरू किया था।
