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कनाडा समेत कई देश खरीदना चाहते हैं वंदे भारत:डिजाइन-लागत में बेहतर; 52 सेकंड में 100kmph की रफ्तार, बुलेट ट्रेन इसके लिए 54 सेकंड लेती है

कनाडा समेत कई देश खरीदना चाहते हैं वंदे भारत:डिजाइन-लागत में बेहतर; 52 सेकंड में 100kmph की रफ्तार, बुलेट ट्रेन इसके लिए 54 सेकंड लेती है

नई दिल्ली2 घंटे पहले
15 फरवरी 2019 को मेक इन इंडिया स्कीम के तहत वंदे भारत ट्रेनों की शुरूआत की गई थी। देश में इस वक्त 102 वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं।

चिली, कनाडा, मलेशिया जैसे देशों ने भारत से वंदे भारत ट्रेनें खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। इसका सबसे बड़ा कारण इसकी लागत है। भारत में वंदे भारत को 120 से 130 करोड़ रुपए की लागत में बन रही है। जबकि ऐसी ही ट्रेनों की लागत 160-180 करोड़ रुपए है।

बात अगर स्पीड की करें तो वंदे भारत आगे है। वंदे भारत को 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ने में सिर्फ 52 सेकंड लगते हैं। जबकि जापान की बुलेट ट्रेन इसके लिए 54 सेकंड लेती है। वंदे भारत का डिजाइन भी विदेशी ट्रेनों की तुलना में बेहतर है।

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक प्लेन की तुलना में सौ गुना कम शोर होता है, ईंधन की खपत भी बहुत कम है। भारतीय रेलवे भी अपने ट्रैक नेटवर्क और ट्रेनों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है।

वंदे भारत ट्रेनों की शुरुआत पहली बार 15 फरवरी 2019 को मेक इन इंडिया स्कीम के तहत की गई थी। इस समय देश में 102 वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं। वंदे भारत ट्रेनों का रूट देश के 280 से अधिक जिलों को आपस में जोड़ रहा है।

10 साल में 31 हजार से ज्यादा रेलवे ट्रैक जोड़े गए- रेल मंत्री रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पिछले 10 साल में 31000 किमी से ज्यादा ट्रैक जोड़े गए हैं। 40 हजार किमी के ट्रैक और जोड़े जाने हैं। वैष्णव ने बताया कि बुलेट ट्रेन पर काम तेजी से चल रहा है।

सिक्योरिटी के लिए रेलवे देश भर में ऑटोमैटिक ट्रेन सिक्योरिटी सिस्टम कवच पर खास ध्यान दे रहा है। ये लगभग 40 हजार किमी नेटवर्क को कवर करेगा। इसे 10000 इंजनों में लगाया जाएगा।

कवच, असरदार और कम लागत वाली सर्टिफाइड सुरक्षा प्रणाली है। कवच लगने के बाद रेल हादसों को 80% तक कम किया जा सकता है। मंत्री ने कहा कि 10,000 लोको और 9,600 किमी ट्रैक का टेंडर जारी हो चुका है।

कवच सिस्टम की मौजूदा स्थिति

  • मथुरा-पलवल और मथुरा-नागदा में 632 किमी में कवच सिस्टम चालू किया गया है।
  • कोटा-सवाई माधोपुर में भी 108 किमी में कवच लगाया गया है।
  • कवच पर 426 मुख्य लोको इंस्पेक्टर्स की ट्रेनिंग के लिए इरिसेट में प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं।

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