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दिल्ली में 4 दिव्यांग बेटियों संग पिता ने की खुदकुशी:पड़ोसी बोले- 4 दिन से किसी को नहीं देखा; छपरा का रहने वाला था परिवार

दिल्ली के वसंत कुंज के रंगपुरी गांव में एक ही परिवार के 5 लोगों ने सुसाइड कर लिया। मरने वालों में पिता और 4 बेटियां हैं। सभी की लाश सड़ चुकी थी। कमरे से बदबू आ रही थी। पुलिस ने बताया कि शुक्रवार सुबह 10:18 बजे पड़ोसियों से सूचना मिली थी। उन्होंने मौके पर पहुंचकर फ्लैट का दरवाजा तोड़ा और शवों को बाहर निकाला।

पुलिस का कहना है कि सभी ने जहर खाकर जान दी है। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन माना जा रहा है कि बेटियों के दिव्यांग होने के कारण परिवार ने खुद को खत्म कर लिया।

मृतकों की पहचान 50 साल के हीरालाल और उनकी चार बेटियां नीतू (18), निशि(15), नीरू(10) और निधि (8 ) के तौर पर हुई। परिवार बिहार के छपरा के मशरख का रहने वाला है।

दिव्यांग थी चारों बेटियां

चारों लड़कियां दिव्यांग थी और चलने-फिरने में असमर्थ थीं। पत्नी की कैंसर से पहले ही मौत हो चुकी थी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि हीरालाल परिवार के साथ रंगपुरी गांव में किराए के मकान में रहते थे।

हीरालाल वसंत कुंज स्थित एक अस्पताल में कारपेंटर के तौर पर काम करते थे। पुलिस के अनुसार, शुक्रवार को हीरालाल के फ्लैट से बदबू आनी शुरू हुई। इस पर सड़क की दूसरी तरफ स्थित मकान में रहने वाले शख्स ने पुलिस को फोन कर यह जानकारी दी।

दिल्ली के वसंत कुंज के रंगपुरी गांव में किराए के मकान में परिवार रहता था।

पड़ोसी बोले- हीरालाल को 4 दिन से नहीं देखा था

पड़ोसी रतन ने बताया कि केयरटेकर ने फोन करके उनके बारे में पूछा था। उसने मुझे घर के आसपास से आ रही बदबू के बारे में बताया। मैंने उन्हें 2-3 दिनों से नहीं देखा था। बच्चे कभी घर से बाहर नहीं निकलते थे। जानकारी मिलते ही मकान मालिक और पुलिस को बुलाया। पुलिस ने घर का दरवाजा खोला। घर में 5 शव पड़े थे। 15-25 साल की उम्र की 4 बेटियां थीं। चारों शारीरिक रूप से दिव्यांग थी। हमने उन्हें बहुत कम ही घर से बाहर देखा। मां की मौत बीमारी से हो गई थी।

एक कमरे में हीरालाल, दूसरे में बच्चियों के शव थे

पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो अंदर से जबरदस्त बदबू आ रही थी। पुलिस टीम अंदर गई तो पहले कमरे के बिस्तर पर हीरालाल का शव पड़ा था। दूसरे कमरे में चारों बेटियों के शव पड़े थे। पुलिस ने दिल्ली में रहने वाले हीरालाल के बड़े भाई जोगिंदर को घटना की सूचना दी गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, परिवार ने सल्फास खाकर खुदकुशी की है। हालांकि, पुलिस को अभी तक सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन बेटियों की दिव्यांगता को इस घटना की वजह माना जा रहा है।

डस्टबिन में सल्फास के रैफर मिले

साउथ वेस्ट दिल्ली के डीसीपी रोहित मीना ने बताया कि दो अलग-अलग कमरों में शव मिला है। एक कमरे में हीरालाल और दूसरे में 4 लड़कियों का शव पड़ा था। ये सभी बिहार के छपरा के रहने वाले थे। छानबीन में डस्टबिन में सल्फास के रैफर मिले हैं। ग्लास और कुछ लिक्विड मैटेरियल भी मिला है। सभी को जब्त कर लिया गया। जांच चल रही है। मृतक का भाई भी जोगिंद्र करीब 1 किलोमीटर दूरी पर रहता है।

भाई ने बताया कि बच्चों की मां की मौत लास्ट ईयर कैंसर से हो गई थी। जनवरी 2024 से हीरालाल शर्मा जॉब पर नहीं जा रहे थे। जांच में ये भी पता चला है कि ये अपने आप को रिजर्व रखता था। 2 साल पहले तक बच्चियां स्कूल जाती थीं। फिर जाना बंद कर दिया। सभी एंगल से इस पर जांच चल रही है।

पत्नी की कैंसर से एक साल पहले हुई थी मौत हीरालाल की पत्नी सुनीता कैंसर से पीड़ित थीं। काफी इलाज के बाद भी वह बच नहीं सकीं। दंपती को पहली बेटी दिव्यांग पैदा हुई थी। स्वस्थ बच्चे की चाह में तीन और बच्चियों ने जन्म लिया, लेकिन वो तीनों भी दिव्यांग थीं। सभी की देखरेख हीरालाल ही कर रहे थे।

पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी थी, जिसके बाद पांचों के शव को बाहर निकाला गया। पुलिस ने फिलहाल कमरा सील कर दिया है।

सुबह खाना खिलाकर जाते, फिर काम से लौटकर बच्चों की देखरेख में जुट जाते पुलिस अधिकारी ने बताया कि चारों बच्चियां बिस्तर पर ही रहती थीं। हीरालाल सुबह खाना आदि कराकर जाते थे। जब तक वो घर नहीं लौटते तब तक बच्चियां भूखी प्यासी रहती थीं। हीरालाल काम से घर लौटने पर बच्चियों की देखभाल में लग जाते थे।

आसपास के लोगों ने बताया कि हो सकता है कि दिनभर नौकरी और रात को बच्चियों की देखभाल करने से वह धीरे-धीरे डिप्रेशन में आ गए होंगे और आखिर में इस घटना को अंजाम दिया। इस घटना के बाद से आसपास के लोग सहमे हुए हैं।

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