हरियाणा विधानसभा चुनाव के बीच भाजपा प्रधान सुनील जाखड़ के इस्तीफे की खबर सामने आई है। हालांकि पार्टी ने इस्तीफे की बात से किनारा करते हुए इसे अफवाह बताया है। इसी बीच पंजाब बीजेपी की तरफ से 30 सितंबर को एक बैठक बुलाई ली गई। बीजेपी के प्रभारी विजय रूपाणी की की अगुवाई में चंडीगढ़ में मीटिंग होगी। इसमें बीजेपी के सभी वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। दावा किया गया है कि बैठक में आगामी पंचायत चुनाव और राजनीतिक गतिविधियों पर की चर्चा की जाएगी।
दो साल पहले जॉइन की पार्टी
जाखड़ ने दो साल पहले पार्टी जॉइन की थी। जून 2024 में आए लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर प्रधान पद छोड़ने की इच्छा जता दी थी। लेकिन पार्टी ने उन्हें कमान जारी रखने को कहा था। मीडिया में अब ऐसे समय से उनके इस्तीफे की खबर आई है। जब पंचायत चुनाव और चार विधानसभा सीटों पर उप चुनाव होने हैं।
इस्तीफे को लेकर सुनील जाखड़ से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। वहीं इस खुलासे से पंजाब BJP में बड़ी हलचल मची हुई है। पंजाब भाजपा के जनरल सेक्रेटरी अनिल सरीन का कहना है कि सुनील जाखड़ ने इस्तीफा नहीं दिया है। अफवाह फैलाई गई है।
जानकारी के मुताबिक वह रवनीत सिंह बिट्टू को केंद्रीय राज्य मंत्री बनाए जाने से नाराज चल रहे थे। बिट्टू लोकसभा चुनाव हार गए थे। हालांकि, बाद में उन्हें राजस्थान से राज्यसभा भेजा गया।
इसके अलावा वह पंजाब में भाजपा नेताओं के कामकाज के तरीके से भी नाराज हैं। इस बारे में जाखड़ पिछले हफ्ते PM नरेंद्र मोदी से भी एक मीटिंग के दौरान पद छोड़ने की इच्छा जता चुके हैं।
सूत्रों के मुताबिक जाखड़ ने जुलाई महीने से ही पार्टी से दूरी बनानी शुरू कर दी थी। हालांकि, भाजपा की मेंबरशिप मुहिम की शुरुआत के समय वह मौजूद रहे थे।
पार्टी कार्यालय में रखी मीटिंग में नहीं पहुंचे मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंचायत चुनाव पर चर्चा और तैयारियों को लेकर गुरुवार को पार्टी कार्यालय में मीटिंग रखी गई थी। इसके लिए भी वह नहीं आए थे। जब BJP के किसी सीनियर मेंबर ने उन्हें इस बारे में फोन किया तो उनका जवाब था कि वह बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं और आगे भी किसी भी मीटिंग में शामिल नहीं होंगे।
इससे पहले जालंधर विधानसभा के उपचुनाव के बाद उनकी तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को बताया गया था कि वह प्रधान पद पर नहीं रहना चाहते हैं।
जानकारों के मुताबिक जाखड़ के इस्तीफे देने की कई वजह हैं, क्योंकि उनकी लाइन BJP से अलग रही है। लोकसभा चुनाव में वह चाहते थे कि भाजपा अकाली दल के साथ मिलकर चुनाव लड़े। उन्होंने कई बयान भी इसको लेकर सामने आए थे, लेकिन आखिर में यह बात सिरे नहीं चढ़ पाई।
दूसरा भाजपा के पुराने नेता भी उनसे असहज महसूस कर रहे थे। वह हमेशा कहते हैं कि बाहर से आए लोगों को जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके अलावा जाखड़ जिस हिसाब से पंजाब में संगठन में बदलाव चाहते हैं, उससे प्रदेश के नेताओं के अलावा केंद्रीय नेतृत्व भी सहमत नहीं है। जाखड़ का मानना है कि वह अपने हिसाब से काम नहीं कर पा रहे हैं।
पंजाब में 15 अक्टूबर को पंचायत चुनाव पंजाब में 2 दिन पहले ही पंचायती चुनाव का ऐलान हुआ था। 15 अक्टूबर को वोटिंग होंगी। इसी दिन रिजल्ट भी आएंगे। 27 से 4 अक्टूबर तक पंच व सरपंच पद के लिए नॉमिनेशन दाखिल कर सकते हैं। करीब 4 महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव में पंजाब में भाजपा एक भी सीट नहीं जीत पाई, लेकिन इस बार पार्टी का वोट प्रतिशत बढ़ा है।
भाजपा आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस पार्टी के बाद तीसरे नंबर पर रही थी। भाजपा को करीब साढ़े 18 फीसदी वोट मिले थे। जाखड़ के करीबी सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद ही सुनील जाखड़ ने हाईकमान को इस्तीफे की पेशकश की थी। हालांकि, हाईकमान ने उनका इस्तीफा लेने से इनकार कर दिया था।
CM न बनाने पर कांग्रेस छोड़ी, 2022 में BJP जॉइन की थी सुनील जाखड़ ने 14 मई को 2022 को कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। इसके बाद 19 मई को BJP जॉइन की थी। दिल्ली में उन्हें BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी जॉइन कराई थी। जाखड़ इससे पहले लंबे अर्से तक कांग्रेस में रहे। हालांकि, साल 2021 में जब पंजाब में कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को CM कुर्सी से हटाया गया तो जाखड़ का नाम CM की रेस में था। हालांकि, बाद में जाखड़ ने ही आरोप लगाया था कि अंबिका सोनी ने उनके हिंदू होने की वजह से विरोध किया। सोनी ने कहा कि पंजाब सिख स्टेट है, इसलिए वहां सिख की CM होना चाहिए, जिसके बाद चरणजीत चन्नी को CM बना दिया गया। इसके बाद से ही जाखड़ लगातार नाराज रहे और फिर कांग्रेस से अलग हो गए।
