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CJI बोले- सच्चे लीडर्स अपनी ताकत और कमजोरियां पहचानते हैं:युवा लॉ ग्रेजुएट्स महान सोच रखें लेकिन दयालु इंसान भी बने; धैर्य से निर्णय लें

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने रविवार को बेंगलुरु में नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के 32वें एनुअल कॉन्वोकेशन डे में हिस्सा लिया।

सीजेआई ने कहा, ‘सच्चे लीडर्स अपनी ताकत और कमजोरियां पहचानते हैं। वे अपनी ताकत का इस्तेमाल दूसरों को आगे बढ़ाने के लिए करते हैं। अपनी कमियों को दूर करने के लिए मदद मांगते हैं।’

उन्होंने ये भी कहा कि युवा लॉ ग्रेजुएट्स महान सोच रखने के साथ-साथ दयालु इंसान बनें। आपको धैर्य के साथ निर्णय लेना चाहिए।

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निर्णय लेने की प्रक्रिया अनिश्चितता से भरी होती है, लेकिन इससे डरने की कोई बात नहीं है। क्योंकि अनिश्चितता के इन्हीं क्षणों में आपका चरित्र गढ़ा जाता है। आने वाले सालों में आपका जो भी रास्ता हो, आपके अपने निर्णयों के सकारात्मक परिणाम होने की संभावना है। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप धैर्य और विनम्रता के साथ इस यात्रा पर चलें।

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CJI ने कहा- हम छोटी कोशिश से संतुष्टि पाने वाली पीढ़ी बन गए अपने संबोधन में सीजेआई ने धैर्य रखने के गुणों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्टडी से पता चला है कि हम छोटी कोशिश से संतुष्टि पाने वाली पीढ़ी बन गए हैं। तेजी से बदलती दुनिया, जलवायु परिवर्तन, सोशल मीडिया जैसे मनोरंजन के नए तरीके और सामाजिक बुराइयों को बदलने की उत्सुकता की वजह से हम जटिल समस्याओं के लिए शॉर्ट-टर्म रिजल्ट चाहते हैं।

सीजेआई ने कहा कि हमें जल्दबाजी में लिए गए फैसले पर ध्यान देने की जरूरत है। ये हमारी मेंटल हेल्थ को लॉन्ग टर्म में नुकसान पहुंचाता है। यह आपके टारगेट के लिए लॉन्ग-टर्म में पॉजिटिव बदलाव भी नहीं ला सकता। इस बात को ध्यान में रखना वकीलों के लिए बहुत जरूरी है।

सीजेआई बोले- हम मुवक्किलों के लिए नहीं, उनके रूप में बहस करते हैं सीजेआई ने कहा- अनिश्चितता के समय में जब (लॉ ग्रेजुएट्स) कठिन चॉइस का सामना करें तो थोड़ा रुकें और अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनना याद रखें। आपकी प्रवृत्ति, आपकी ट्रेनिंग और एक्सपीरियंस का रिफ्लेक्शन है।

चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जस्टिस के तौर पर अपने 24 साल के करिअर के आधार पर मैं बता सकता हूं कि भारतीय कोर्ट्स में हम तीसरे व्यक्ति की बजाय पहले व्यक्ति की तरह बहस करते हैं। हम मुवक्किलों के लिए बहस नहीं करते, हम उनके रूप में बहस करते हैं।

जब मामला खत्म हो जाता है तो हम अपने आप में वापस आ जाते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा जरूरत होती है तो हम सिर्फ मुवक्किलों का रिप्रेजेंटेशन नहीं करते बल्कि उनकी आवाज, उनके वकील और उनके चैंपियन बन जाते हैं। चीफ जस्टिस ने NLSIU के एकेडमिक ब्लॉक की आधारशिला रखी सीजेआई चंद्रचूड़ ने NLSIU के JSW एकेडमिक ब्लॉक के नाम से कोर एकेडमिक ब्लॉक के रीडेवलपमेंट की आधारशिला रखी। JSW फाउंडेशन के मुताबिक, प्रोजेक्ट के तहत मौजूदा इमारत को मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में बदला जाना है। इसमें लेक्चर थिएटर, सेमिनार रूम, फैकल्टी ऑफिस और रिसर्च स्पेस होगा।

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