अयोध्या में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने गोवंश को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा- गो माता को लेकर BJP का दोहरा चरित्र अब नहीं चलेगा। उनके नेताओं को अपना एजेंडा साफ करना होगा। हम गौ प्रतिष्ठा आंदोलन का ऐलान कर चुके हैं।
इसके साथ 2 संकेत मिले हैं। हमारी यात्रा का नगालैंड के BJP अध्यक्ष ने विरोध किया। लेटर जारी करके कहा, हमारी संस्कृति का हिस्सा है कि हम गाय को काटे और खाएं। अगर आप गाय की बात को लेकर नगालैंड आते हैं, तो स्टेट में आपको प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
इधर, उन्हीं की पार्टी के संसदीय दल का नेता (प्रधानमंत्री), गाय के बच्चे को दुलारते हैं, पुचकारते हैं। फूल की माला पहना रहे हैं। चुनरी ओढ़ाते हुए दिखते हैं। गोद में लेकर चूम रहे, अपना गाल चाटने दे रहे। यह सब बड़ा लाड़-प्यार वाला सीन है। अब दोनों लोग एक ही पार्टी के हैं। लेकिन, उनके काम एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। विचारधारा भी अलग-अलग दिखती है। इसलिए BJP अपना एजेंडा साफ कर दे।
जहां जैसी स्थिति, वैसी तस्वीर आगे करने की पॉलिटिक्स उत्तराखंड के जोशीमठ स्थित ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज शनिवार को अयोध्या पहुंचे। वह जानकी घाट स्थित चारूशिला मंदिर में मीडिया के सामने आए। दैनिक भास्कर से उन्होंने खास बातचीत की।
उन्होंने कहा- यह जो राजनीति है कि कुछ लोग इस तरफ मिल आओ, कुछ उस तरफ मिल जाओ। जहां जैसी परिस्थिति हो, वहां वैसा फोटो आगे कर दो। जब गाय का प्रेमी आ जाए, तो ये वाला फोटो आगे कर दो। जब गाय का द्रोही आ जाए, तो दूसरी वाली फोटो आगे कर दो और कहो कि हम आपके साथ खड़े हैं।
BJP बताए कि विचारधारा क्या है? शंकराचार्य ने कहा- अब यह नहीं चलेगा कि देश के एक भू-भाग में गाय को काटने के लिए कहें और दूसरे भू-भाग में गाय को दुलारने के लिए कहें। पार्टी की दोहरी रणनीति अब नहीं चलेगी। पार्टी को साफ बताना होगा कि वह किसके साथ खड़े है। क्या विचारधारा है?
तिरुपति के प्रसाद में मिलावट करने वाले को ऐसी सजा मिले, जो किसी को न मिली हो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने तिरुपति के लड्डू में चर्बी मिलाने के मामले पर भी बात की। उन्होंने कहा- यह करोड़ों सनातनियों की पवित्रता को खंडित करने का प्रयास है। पुराने समय से यह चलता चला आया है। पहले विधर्मी कुएं में मांस का टुकड़ा फेंक देते थे। कहते थे कि तुमने यहां का पानी पी लिया अब आप हिंदू नहीं रह गए, मुसलमान हो गए। अब तुम हिंदू धर्म से अलग हो गए। यह घटना किसी विधर्मी की साजिश है। इसका पर्दाफाश होना चाहिए। दोषी मिलने पर कठोर से कठोर दंड मिलना चाहिए। ऐसी सजा, जो आज तक किसी को न मिली हो।
मंदिरों में खुद धर्माचार्य भोग की व्यवस्था संभाले शंकराचार्य ने कहा- अयोध्या के साधु-संत, महात्मा और पूरे देश के धर्माचार्यों से निवेदन करना चाहेंगे कि वे खुद मंदिरों में पूजा आरती और भोग की व्यवस्था को संभाले। नहीं तो ऐसी घटनाएं रोज होंगी। सरकारों के वश की बात नहीं है। क्योंकि, सरकार, उनके नेता और अधिकारी धर्मनिरपेक्ष विचारधारा के होते हैं। इसलिए यदि उनके द्वारा हमारी पूजा व्यवस्था होगी तो कदम-कदम पर खंडित होगी।
तिरुपति के पास अपना खुद का गोशाला नहीं है क्या? शंकराचार्य ने कहा- हमारे सामने एक सबसे बड़ा सवाल है कि तीन लाख करोड़ से अधिक रुपए हम सनातनधर्मियों ने मंदिर में जा-जाकर चढ़ा दिए। 11 हजार करोड़ से अधिक का सोना वहां चढ़ा दिया। यह सब भक्तों का दिया हुआ है। फिर आप बाहर से घी खरीदकर भोग क्यों लगाओ? क्यों नहीं आपने गौशाला का निर्माण किया? अगर खुद की गोशाला होती तो दूध, दही, घी खुद का होता। टेंडर निकालने की जरूरत नहीं पड़ती। वहां एक विशाल गोशाला की स्थापना की जानी चाहिए। वहीं से उत्पन्न घी से भगवान का भोग लगना चाहिए।
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