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आतिशी दिल्ली की सबसे युवा CM बनीं:शपथ के बाद केजरीवाल के पैर छुए; कैबिनेट में 5 मंत्री, मुकेश अहलावत नया चेहरा

आतिशी दिल्ली की सबसे युवा CM बनीं:शपथ के बाद केजरीवाल के पैर छुए; कैबिनेट में 5 मंत्री, मुकेश अहलावत नया चेहरा

नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले
भाजपा की सुषमा स्वराज और कांग्रेस की शीला दीक्षित के बाद आतिशी दिल्ली की तीसरी महिला CM हैं।

आतिशी ने शनिवार को दिल्ली की 9वीं मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। राजनिवास में उपराज्यपाल (LG) विनय सक्सेना ने उन्हें शपथ दिलाई। शपथ के बाद आतिशी ने अरविंद केजरीवाल के पैर छुए।

वे ​​​​​दिल्ली की सबसे युवा (43 साल) CM हैं। इससे पहले केजरीवाल 45 साल की उम्र में CM बने थे। आतिशी बतौर महिला सुषमा स्वराज और शीला दीक्षित के बाद दिल्ली की तीसरी महिला CM हैं।

आतिशी के बाद सौरभ भारद्वाज, गोपाल राय, कैलाश गहलोत, इमरान हुसैन और मुकेश अहलावत ने मंत्री पद की शपथ ली। कैबिनेट में मुकेश अहलावत एकमात्र नया चेहरा हैं।

आतिशी ने शिक्षा, PWD और वित्त समेत 13 विभाग अपने पास रखे। वहीं, सौरभ भारद्वाज को हेल्थ समेत 8 प्रमुख विभाग का जिम्मा दिया गया।

आतिशी कालकाजी सीट से तीन बार की विधायक हैं। AAP विधायकों ने 17 सितंबर को केजरीवाल के इस्तीफे के बाद आतिशी का नाम CM के रूप में फाइनल किया था।

शपथ ग्रहण समारोह में आतिशी के माता-पिता, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, विपक्ष के नेता विजेन्दर गुप्ता, भाजपा सांसद मनोज तिवारी शामिल हुए।

केजरीवाल के साथ आतिशी और उनकी कैबिनेट…

केजरीवाल के साथ सौरभ भारद्वाज, कैलाश गहलोत, आतिशी, गोपाल राय, इमरान हुसैन, और मुकेश अहलावत। (दाएं से बाएं)।
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेतीं आतिशी। मंच पर मौजूद सौरभ भारद्वाज, गोपाल राय, कैलाश गहलोत। (बाएं से दाएं)
शपथ ग्रहण कार्यक्रम में आतिशी के पिता विजय सिंह और मां तृप्ता वाही भी शामिल हुए।
शपथ ग्रहण समारोह में दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना के साथ अरविंद केजरीवाल।

शपथ के बाद आतिशी बोली- केजरीवाल को दोबारा सीएम बनाएंगे आतिशी ने कहा- अरविंद केजरीवाल ने इस देश की राजनीति में ईमानदारी और नैतिकता की मिसाल कायम करते हुए सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। मुझे नहीं लगता पूरी दुनिया में ऐसा कोई नेता रहा होगा। हम सभी दिल्ली वालों को फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल को फिर से सीएम बनाना है।

CM आतिशी समेत कैबिनेट में ये 6 चेहरे ही क्यों

1. आतिशी: केजरीवाल और सिसोदिया की भरोसेमंद केजरीवाल और सिसोदिया के जेल में रहते हुए पार्टी का मजबूती से स्टैंड रखती रही हैं। इस साल स्वतंत्रता दिवस पर जेल में रहते हुए केजरीवाल ने तिरंगा फहराने के लिए आतिशी के नाम की सिफारिश की थी। 2013 के विधानसभा चुनावों के लिए आप का घोषणापत्र तैयार करने वाली समिति की प्रमुख सदस्य थीं। उसके बाद से ही पार्टी के विस्तार में अहम भूमिका निभाती रही हैं।

2. सौरभ भारद्वाज: पार्टी का मजबूती से पक्ष रखते हैं 2013 से विधायक और मंत्री हैं। केजरीवाल के भरोसेमंद नेता हैं। केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह के जेल में रहने के दौरान आतिशी के साथ भाजपा पर लगातार हमलावर रहे हैं। मनीष सिसोदिया के जेल जाने पर आतिशी के बाद महत्वपूर्ण मंत्रालय सौरभ को ही सौंपे गए।

3. गोपाल राय: वर्किंग क्लास कम्युनिटी के बीच अच्छी पकड़ 2013 में पहली बार सत्ता में आने के बाद से AAP सरकार का हिस्सा रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। केजरीवाल के भरोसेमंद माने जाते हैं। दिल्ली की वर्किंग क्लास कम्युनिटी के बीच अच्छी पकड़ है। कई मौकों पर पार्टी के लिए संकट मोचक बनकर उभरे हैं। मौजूदा दिल्ली सरकार में पर्यावरण मंत्री हैं। मंत्री पद संभालने का लंबा अनुभव है।

4. कैलाश गहलोत: जाट परिवार से हैं, पॉलिटिकल​​​​​​ फंडिंग के लिए महत्वपूर्ण LG विवेक सक्सेना के साथ अच्छे रिश्ते हैं। LG ने 15 अगस्त पर आतिशी की जगह झंडा फहराने के लिए गहलोत को चुना था। जाट परिवार से हैं। हरियाणा में जाट BJP से नाराज हैं। हरियाणा चुनाव में आम आदमी पार्टी उन्हें कैबिनेट से ड्रॉप नहीं करना चाहती। वे 2017 से लगातार परिवहन मंत्रालय संभाल रहे हैं। पॉलिटिकल फंडिंग के लिए भी AAP के लिए महत्वपूर्ण हैं।

5. इमरान हुसैन: अकेला मुस्लिम चेहरा, दिल्ली में करीब 11.7% मुस्लिम पॉपुलेशन केजरीवाल की कैबिनेट का अकेला मुस्लिम चेहरा थे, इसलिए आतिशी की कैबिनेट में भी पार्टी ने उन्हें रिटेन किया है। दिल्ली में करीब 11.7% मुस्लिम पॉपुलेशन है। 2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी अल्पसंख्यक वोट बैंक पर पकड़ बनाए रखना चाहती है।

6. मुकेश अहलावत: दलित समुदाय से आते हैं, दिल्ली में 12% दलित पॉपुलेशन दलित समुदाय से आने वाले मुकेश अहलावत ने राजकुमार आनंद की जगह ली। दिल्ली में 12% दलित पॉपुलेशन है। राजकुमार आनंद के BSP में जाने से AAP के दलित वोट बैंक में सेंध लगी है। पहली बार के विधायक अहलावत को मंत्री बनाकर पार्टी दलित वोट बैंक साधना चाहती है।

15 को केजरीवाल का इस्तीफा, 17 को आतिशी के नाम का ऐलान हुआ दिल्ली शराब नीति मामले में जमानत मिलने के 2 दिन बाद 15 सितंबर को अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफे का ऐलान किया था। प्रधानमंत्री मोदी के 74वें जन्मदिन यानी 17 सितंबर को केजरीवाल के इस्तीफे से पहले विधायक दल की बैठक में आतिशी को नया मुख्यमंत्री चुना गया। इसके बाद शाम करीब 5 बजे केजरीवाल ने LG को इस्तीफा सौंपा और आतिशी ने सरकार बनाने का दावा पेश किया।

2012 में AAP बनी, 2023 में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला अन्ना आंदोलन के बाद 2 अक्टूबर 2012 को अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी (AAP) बनाई। चुनाव आयोग से 10 अप्रैल 2023 को उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला। किसी पार्टी को नेशनल पार्टी का दर्जा हासिल करने के लिए लोकसभा या विधानसभा चुनाव में चार राज्यों में 6% वोट हासिल करना जरूरी होता है। पार्टी दिल्ली, पंजाब, गोवा और गुजरात में 6% से ज्यादा वोट शेयर हासिल कर चुकी है।

दिल्ली के अलावा पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है। पार्टी का संगठन हरियाणा और गुजरात में भी मजबूत है। पार्टी के लोकसभा में तीन जबकि राज्यसभा में 10 सांसद है। देश के अन्य राज्यों में भी AAP के कैडर एक्टिव हैं।

आतिशी 5 महीने से भी कम समय तक CM रहेंगी दिल्ली विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 23 फरवरी 2025 को खत्म हो रहा है। इलेक्शन कमीशन मौजूदा सदन के पांच साल के कार्यकाल के खत्म होने की तारीख से पहले चुनाव की प्रक्रिया पूरी कराता है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 15(2) कहती है कि चुनाव की अधिसूचना विधानसभा के कार्यकाल के खत्म होने से 6 महीने से कम समय पहले नहीं की जा सकती है।

इसका मतलब चुनाव आयोग को 5 महीने के अंदर दिल्ली में विधानसभा चुनाव कराने ही होंगे। हालांकि केजरीवाल ने इस्तीफे की घोषणा के समय कहा था कि वे दिल्ली में जल्दी चुनाव कराने की मांग करेंगे। उपराज्यपाल और चुनाव आयोग तैयार हुआ तो विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से पहले भी दिल्ली में चुनाव कराए जा सकते हैं। इस हिसाब से आतिशी 5 महीने से भी कम समय तक CM रहेंगी।

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