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मणिपुर में म्यांमार से 900 कुकी उग्रवादी घुसे:सुरक्षा सलाहकार बोले- इन्हें ड्रोन-मिसाइल हमले की ट्रेनिंग मिली; इस महीने मैतेई गांवों में हमले की आशंका

मणिपुर में म्यांमार से 900 कुकी उग्रवादियों की घुसपैठ की बात सामने आई है। राज्य के सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह ने शुक्रवार, 20 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पिछले तीन-चार दिनों से उग्रवादियों की आवाजाही की खबरें मिल रही हैं।

सुरक्षा सलाहकार के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों ने बताया है कि घुसपैठी उग्रवादी ड्रोन बम, प्रोजेक्टाइल, मिसाइल और गोरिल्ला युद्ध में ट्रेंड हैं। ये 30-30 लोगों के ग्रुप में हैं और अलग-अलग क्षेत्राें में छिपे हुए हैं।

कुलदीप सिंह ने कहा, उग्रवादी 28 सितंबर के आसपास मैतेई गांवों पर हमले कर सकते हैं। हमले की आशंका के बीच चुराचांदपुर, तेंगनौपाल, उखरुल, कामजोंग और फेरजॉल समेत कई जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

मणिपुर में 3 मई, 2023 से कुकी और मैतेई समुदाय के बीच आरक्षण को लेकर हिंसा चल रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हिंसा में अब तक 237 लोगों की मौत हो चुकी है। 1500 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। 60 हजार से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ चुके हैं।

सेना ने मणिपुर पुलिस, सीआरपीएफ और बीएसएफ के साथ संयुक्त अभियान के दौरान 12 सितंबर को चुराचांदपुर में बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और अन्य हथियार बरामद किए थे।

इंफाल में मंत्री के पर्सनल असिस्टेंट का अपहरण दूसरी तरफ, इंफाल पूर्वी जिले में शुक्रवार को ही अज्ञात बदमाशों ने मणिपुर के मंत्री एल. सुसिंदरो के पर्सनल असिस्टेंट का उनके आवास के पास से अपहरण कर लिया। घटना सुबह 8:30 बजे की है।

पर्सनल असिस्टेंट की पहचान 43 साल के सारंगथेम सोमरेंड्रो के रूप में हुई है। वे घटना के समय अपने ऑफिशियल काम से जा रहे थे। पुलिस ने कहा कि अपहरणकर्ताओं ने कई राउंड गोलियां भी चलाईं।

घटनास्थल से पांच खाली कारतूस बरामद किए गए हैं। अपहृत व्यक्ति की तलाश जारी है। उसके अपहरण के पीछे का कारण पता नहीं चल पाया है। न ही किसी भी विद्रोही समूह ने घटना की जिम्मेदारी ली है।

मणिपुर में हिंसा की ताजा घटनाएं…

1 सितंबर- पहली बार ड्रोन से हमला : एक सितंबर को राज्य में पहली बार ड्रोन हमला देखने को मिला। इंफाल वेस्ट जिले के कोत्रुक गांव में उग्रवादियों ने पहाड़ी के ऊपरी इलाके से कोत्रुक और कडांगबांड घाटी के निचले इलाकों में फायरिंग की और ड्रोन से हमला किया। इसमें 2 लोगों की मौत और 9 घायल हुए।

3 सितंबर- दूसरा ड्रोन अटैक: इंफाल जिले के सेजम चिरांग गांव में उग्रवादियों ने ड्रोन अटैक किए। इसमें एक महिला समेत 3 लोग घायल हो गए। उग्रवादियों ​​​​​​ने रिहायशी इलाके में ड्रोन से 3 विस्फोटक गिराए, जो छत को तोड़ते हुए घरों के अंदर फटे। उग्रवादियों ने पहाड़ी की चोटी से गोलीबारी भी की।

6 सितंबर- पूर्व CM के घर रॉकेट से हमला: मणिपुर बिष्णुपुर जिला स्थित मोइरांग में पूर्व मुख्यमंत्री मैरेम्बम कोइरेंग के घर पर हमला हुआ था। कुकी उग्रवादियों ने रॉकेट बम फेंका। इस हमले में 1 एक बुजुर्ग की मौत हो गई, जबकि 5 लोग घायल हो गए। मैरेम्बम कोइरेंग राज्य के पहले मुख्यमंत्री थे।

7 सितंबर- जिरिबाम में दो हमले, 5 की मौत: पहली घटना जिला हेडक्वार्टर से करीब 7 KM दूर हुई। यहां संदिग्ध पहाड़ी उग्रवादियों ने एक घर में घुसकर बुजुर्ग को सोते समय गोली मार दी। वे घर में अकेले रहते थे। दूसरी घटना में कुकी और मैतेई लोगों के बीच गोलीबारी हुई। इसमें 4 लोगों की मौत हुई।

4 पॉइंट्स में जानिए क्या है मणिपुर हिंसा की वजह…

मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं। नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। ST वर्ग में आते हैं। इनकी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इंफाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है। नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं।

कैसे शुरू हुआ विवाद: मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए। समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाई कोर्ट में याचिका लगाई। समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था। उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था। इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए।

मैतेई का तर्क क्या है: मैतेई जनजाति वाले मानते हैं कि सालों पहले उनके राजाओं ने म्यांमार से कुकी काे युद्ध लड़ने के लिए बुलाया था। उसके बाद ये स्थायी निवासी हो गए। इन लोगों ने रोजगार के लिए जंगल काटे और अफीम की खेती करने लगे। इससे मणिपुर ड्रग तस्करी का ट्राएंगल बन गया है। यह सब खुलेआम हो रहा है। इन्होंने नागा लोगों से लड़ने के लिए आर्म्स ग्रुप बनाया।

नगा-कुकी विरोध में क्यों हैं: बाकी दोनों जनजाति मैतेई समुदाय को आरक्षण देने के विरोध में हैं। इनका कहना है कि राज्य की 60 में से 40 विधानसभा सीट पहले से मैतेई बहुल इंफाल घाटी में हैं। ऐसे में ST वर्ग में मैतेई को आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों का बंटवारा होगा।

सियासी समीकरण क्या हैं: मणिपुर के 60 विधायकों में से 40 विधायक मैतेई और 20 विधायक नगा-कुकी जनजाति से हैं। अब तक 12 CM में से दो ही जनजाति से रहे हैं।

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