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मोदी आज 75वें साल में प्रवेश कर रहे:नरेंद्र मोदी पर लागू नहीं होगा 75 साल में रिटायरमेंट का बैरियर; जानिए क्यों

भास्कर एक्सप्लेनर- मोदी आज 75वें साल में प्रवेश कर रहे:नरेंद्र मोदी पर लागू नहीं होगा 75 साल में रिटायरमेंट का बैरियर; जानिए क्यों

13 घंटे पहलेलेखक: कृष्ण गोपाल

लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए तिहाड़ जेल से जमानत पर बाहर आए दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल ने 11 मई 2024 को एक चर्चित बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले साल 17 सितंबर को 75 साल के हो जाएंगे। क्या भाजपा उन्हें लालकृष्ण आडवाणी की तरह रिटायर करेगी।’ उस वक्त गृह मंत्री अमित शाह को सफाई देनी पड़ी थी।

आज 17 सितंबर यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 74वां जन्मदिन है। वे अब 75वें साल में प्रवेश कर रहे हैं। क्या नरेंद्र मोदी 75 साल का बैरियर तोड़कर प्रधानमंत्री बने रहेंगे, राजनीति में रिटायरमेंट से जुड़े देश-दुनिया के नियम और BJP में कैसे आई 75 साल में रिटायरमेंट की बात; भास्कर एक्सप्लेनर में 7 सवालों में जानेंगे…

सवाल-1: 75 साल की उम्र में राजनीति से रिटायरमेंट का मामला क्या है, इसे लेकर कोई नियम है या नहीं? उत्तर: राजनीति से रिटायर होने की कोई तय उम्र नहीं है। यह पार्टी या पर्सन पर डिपेंड करता है कि वह रिटायर होना चाहता है या नहीं। ज्यादातर देशों में राजनेताओं के लिए रिटायरमेंट की कोई उम्र तय नहीं है। वे तब तक चुनाव लड़ सकते हैं, जब तक चुनाव लड़ने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से फिट हैं।

भारत में 75 साल से ज्यादा उम्र के कई नेता अभी भी एक्टिव हैं और बड़े पदों पर हैं। इनमें 83 साल के NCP (SP) अध्यक्ष शरद पवार, 82 साल के कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, 91 साल के JD(S) अध्यक्ष और सांसद एचडी देवगौड़ा, 86 साल के फारूक अब्दुल्ला, 77 साल की सोनिया गांधी और 79 साल के अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद इत्यादि नेता शामिल हैं।

सवाल-2: राजनीति से रिटायरमेंट को लेकर भारत का संविधान क्या कहता है? उत्तर: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 84 में संसद सदस्य बनने के लिए जरूरी योग्यताओं के बारे में बताया गया है। लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए कम से कम 25 साल और राज्यसभा का चुनाव लड़ने के लिए कम से कम 30 साल की उम्र होनी चाहिए। भारतीय संविधान में राजनीति से रिटायर होने की कोई तय उम्र सीमा नहीं है।

सांसद, विधायक, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति आदि पदों पर काम कर रहे लोगों के लिए रिटायरमेंट की अधिकतम आयु सीमा नहीं है। कार्यकाल खत्म होने पर उनका पद चला जाता है, लेकिन चुनाव जीतकर वे फिर से इसी पद पर आ सकते हैं।

संविधान में इन पदों पर कितनी बार आ सकते हैं, इसको लेकर भी कोई नियम नहीं है। यानी कोई व्यक्ति कितनी भी बार चुनाव जीतकर अलग-अलग या उसी राजनीतिक पद पर बना रह सकता है।

सवाल-3: दुनिया के किसी देश में राजनीति से रिटायरमेंट की क्या कोई उम्र फिक्स है? उत्तर: नहीं, दुनिया के किसी भी देश में राजनीति से रिटायरमेंट की कोई उम्र तय नहीं है। हालांकि, तुर्कमेनिस्तान में सितंबर 2016 तक राष्ट्रपति पद के लिए अधिकतम आयु सीमा 70 साल थी, लेकिन इस नियम को हटा दिया गया है।

इसके अलावा ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और रूस में कोई नेता दो बार से ज्यादा राष्ट्रपति नहीं बन सकता था, लेकिन साल 2016 में ताजिकिस्तान, 2020 में रूस और 2023 में उज्बेकिस्तान ने इस नियम को भी हटा दिया। हालांकि, अमेरिका में इस तरह का नियम अभी भी कायम है। अमेरिकी संविधान के अनुसार कोई व्यक्ति अधिकतम दो बार ही राष्ट्रपति पद पर रह सकता है, लेकिन इसके लिए कोई अधिकतम आयु सीमा नहीं है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन 81 साल की उम्र के बावजूद इस बार दोबारा चुनाव लड़ रहे थे, लेकिन पार्टी के अंदर विरोध और आलोचना के बाद उन्होंने अपना इरादा बदला और कमला हैरिस को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। दूसरी तरफ रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प भी 78 साल के हैं।

22 जुलाई को राष्ट्रपति पद से उम्मीदवारी वापस लेने के बाद जो बाइडेन ने कमला हैरिस का समर्थन किया था।

सवाल-4: क्या BJP ने 75 साल की उम्र के बाद अपने नेताओं को रिटायर किया है? उत्तर: जी हां, इसके कई उदाहरण हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद BJP में इस तरह का ट्रेंड देखने को मिला था। पहली बार प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी ने अपनी कैबिनेट में 75 साल से कम उम्र के नेताओं को ही जगह दी थी। यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी, लालजी टंडन जैसे वरिष्ठ नेताओं को 75 प्लस की उम्र का होने के कारण शामिल नहीं किया गया था। लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को भी इलेक्टोरल पॉलिटिक्स से हटाकर मार्गदर्शक मंडल में शामिल किया था।

2016 में जब गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने इस्तीफा दिया तो उस समय उनकी उम्र भी 75 साल थी। इसी साल नजमा हेपतुल्लाह ने भी मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दिया, जिनकी उम्र 76 साल थी। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले तब के BJP अध्यक्ष अमित शाह ने ‘द वीक’ मैगजीन से एक इंटरव्यू में कहा था कि 75 साल से ऊपर के किसी भी व्यक्ति को टिकट नहीं दिया गया है। यह पार्टी का फैसला है।

इस चुनाव में सुमित्रा महाजन और हुकुमदेव नारायण यादव जैसे नेताओं को टिकट नहीं दिया गया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में राजेंद्र अग्रवाल, संतोष गंगवार, सत्यदेव पचौरी, रीता बहुगुणा जोशी का टिकट 75 साल से ज्यादा उम्र की वजह से कट गया था।

मार्च, 2023 में BJP के एक कार्यक्रम में PM मोदी के साथ दीप जलाते मार्गदर्शक मंडल में शामिल वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी। 2019 लोकसभा चुनाव में उनका टिकट काट दिया गया था।

सवाल-5: क्या BJP में 75 की उम्र वाला अपवाद भी है? अगर हां तो क्यों? उत्तर: हां, BJP में इसके अपवाद भी हैं। साल 2022 में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को BJP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह दी गई। उस समय उनकी उम्र करीब 79 साल थी। ऐसा अगले साल 2023 में कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर किया गया था। येदियुरप्पा लिंगायत समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं। राज्य में इनकी आबादी करीब 17% है।

एक साल पहले ही उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इस्तीफा देने से पहले विधानसभा में उन्होंने BJP के केंद्रीय नेतृत्व का आभार प्रकट किया था। उन्होंने कहा था, ‘मेरी उम्र 75 साल से ज्यादा हो जाने के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने मुझे पद पर बने रहने दिया।’

येदियुरप्पा के साथ ही सत्यनारायण जटिया को भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह दी गई थी। उनकी उम्र भी उस समय 76 साल थी। मध्य प्रदेश में दलित समुदाय को साधने के लिए BJP ने ऐसा किया था। इसके अलावा 2022 गुजरात चुनाव में 76 साल के योगेश पटेल को टिकट दिया था। वहीं, 2023 मध्य प्रदेश चुनाव में 80 साल के नागेंद्र सिंह और 75 साल के जगन्नाथ सिंह रघुवंशी को चुनाव मैदान में उतारा गया था।

26 जुलाई 2021 को बतौर CM बीएस येदियुरप्पा ने तब के कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत को अपना इस्तीफा सौंपा था।

सवाल-6: आज PM मोदी 74 साल के हो गए, क्या वो अगले साल रिटायर हो सकते हैं? उत्तर: नहीं, PM मोदी पर 75 साल की उम्र वाला बैरियर लागू नहीं होगा। सबसे पहले BJP के अंदर से मिल रहे संकेतों को समझते हैं…

  • मई, 2024 में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि अगर 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP जीत भी गई तो PM मोदी अगले साल तक ही प्रधानमंत्री रहेंगे। फिर अमित शाह को देश का प्रधानमंत्री बनाएंगे। PM मोदी ने खुद यह नियम (75 साल की उम्र में रिटायरमेंट) बनाया है। मोदी, अमित शाह के लिए वोट मांग रहे हैं।
  • उसी दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था, ‘मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि भाजपा के संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। मोदी जी 2029 तक देश का नेतृत्व करेंगे। मोदी जी आने वाले चुनावों में भी नेतृत्व करेंगे।’
  • इस पर पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था कि भाजपा के संविधान में कहीं भी आयु को लेकर ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। अगले 5 साल के कार्यकाल में मोदी जी देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। मोदी जी हमारे नेता हैं। भविष्य में भी हमारा नेतृत्व करते रहेंगे।
  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ANI को दिए इंटरव्यू में कहा था, ‘मैं BJP का वरिष्ठ नेता होने के नाते ये कहना चाहता हूं कि 2024 में भी वो (नरेंद्र मोदी) भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे। 2029 में भी वो भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।’
  • हाल ही में चंडीगढ़ के कार्यक्रम में भी अमित शाह ने कहा, ‘मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि विपक्ष को जो करना है करने दीजिए, 2029 में NDA आएगा, मोदी जी ही आएंगे।’
मई, 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में कहा था- 2029 में भी मोदी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।

सवाल-7: PM मोदी पर 75 साल की उम्र का बैरियर लागू क्यों नहीं होगा, क्या BJP 2029 का चुनाव भी मोदी की अगुआई में लड़ेगी? उत्तर: कई मौकों पर BJP नेताओं ने कहा है कि 2029 लोकसभा चुनाव की अगुआई भी प्रधानमंत्री मोदी ही करेंगे। हालांकि, इस पर अभी सिर्फ कयास ही लगाए जा सकते हैं। मोदी पर 75 साल की उम्र का बैरियर लागू न होने की कई वजहे हैं।

पॉलिटिकल एक्सपर्ट किदवई के मुताबिक,

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अभी BJP के लिए चुनौती का वातावरण है, किसी तरह का प्रयोग घातक हो सकता है। पार्टी चाहेगी कि PM मोदी 2029 के चुनाव तक सक्रिय रहें। BJP के संविधान में 75 की उम्र के बाद रिटायर होने का कोई लिखित नियम नहीं है, लेकिन पार्लियामेंट्री बोर्ड और NDA के घटक दल सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर सकते हैं कि मोदी ही कंटिन्यू करें।

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पॉलिटिकल एक्सपर्ट अमिताभ तिवारी कहते हैं कि पार्टी के अंदर भी मोदी को चैलेंज करने वाला कोई चाहिए। जब BJP के पास कोई बैकिंग फेस होगा तभी मोदी पर दबाव बनेगा। मोदी रिकॉर्डमैन हैं। अगर वे तीसरा टर्म पूरा कर भी लेते हैं तब भी कार्यकाल के हिसाब से नेहरू से पीछे रहेंगे। यही कारण है कि वे पद नहीं छोड़ना चाहेंगे। मोदी चाहेंगे कि नेहरू का सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड तोड़ा जाए।

पॉलिटिकल एक्सपर्ट अविनाश कल्ला भी कहते हैं कि इस तरह के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। PM मोदी की पार्टी भी इस पोजिशन में नहीं है। ऐसा इसलिए, क्योंकि उन्हीं के नाम पर वोट मांगे गए थे। इस बार उनके पास स्पष्ट जनादेश भी नहीं है। अविनाश कहते हैं कि आगे होने वाले विधानसभा चुनावों में भी अगर BJP का प्रदर्शन खराब भी रहता तब भी कोई बदलाव होने वाला नहीं है, क्योंकि BJP के पास प्रधानमंत्री मोदी के अलावा कोई दूसरा चेहरा नहीं है, जो सबको बांधकर रख सके।

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