जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग केस में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद बारामूला के सांसद शेख अब्दुल राशिद की जमानत पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। पटियाला हाउस कोर्ट में केस की जांच कर रही नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने जमानत का विरोध किया है।
इंजीनियर राशिद के नाम से मशहूर अब्दुल राशिद की याचिका पर सुनवाई बंद कमरे में की गई। सुनवाई के बाद एडिशनल सेशन जज चंद्रजीत सिंह ने ऑर्डर रिजर्व कर लिया। अदालत 4 सितंबर को फैसला सुना सकती है।
2005 और 2019 में भी गिरफ्तार हो चुके राशिद
राशिद की गिरफ्तारी 2017 में जम्मू में टेरर फंडिंग केस में की गई थी। राशिद को 2005 में भी स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने श्रीनगर से गिरफ्तार कियाा था। तब राशिद पर आतंकियों की मदद करने का आरोप था। इस केस में राशिद 3 महीने 17 दिन तक राजबाग जेल में बंद रहे। इस मामले में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने मानवीय आधार पर सभी आरोपों से बरी कर दिया था। अगस्त 2019 में उन्हें UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था।
जूनियर इंजीनियर से सांसद तक का सफर
राशिद ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है । कुछ वक्त रूरल डेवलपमेंट में कॉन्ट्रैक्ट पर काम किया। इसी दौरान जम्मू-कश्मीर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट कॉर्पोरेशन में असिस्टेंट मैनेजर की नौकरी लग गई।
नौकरी करते हुए भी वे लोगों के मसले उठाते थे। तभी किसी ने उन्हें सियासत में आने की सलाह दी। उन्होंने फैसला कर लिया कि राजनीति में आएंगे। 2008 में उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी।
उसी साल लंगेट विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत गए। इसके बाद अपनी पार्टी बनाई। 2014 में फिर चुनाव लड़ा और जीते। उनकी पार्टी ने 3-4 सीटों पर चुनाव लड़ा था, बाकी सभी कैंडिडेट हार गए।
और सबसे बड़ी पहचान जम्मू-कश्मीर के पूर्व CM उमर अब्दुल्ला और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन को लोकसभा चुनाव 2024 में बहुत बड़े अंतर से हराया है।
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