वंदेभारत-तेजस ट्रेनों में बदबूदार लंच-डिनर:शिकायत पर पिट रहे यात्री; एडवांस पेमेंट के बाद भी घटिया खाना क्यों, पर्दाफाश
तारीख : 1 जनवर
क्या हुआ : भुवनेश्वर-नई दिल्ली तेजस राजधानी एक्सप्रेस के यात्री ने वीडियो शेयर कर कहा कि, परोसा गया खाना ‘इंसानों के खाने लायक नहीं’ है, इससे फूड पॉइजनिंग का खतरा है।
तारीख : 23 जनवरी
क्या हुआ : कामाख्या-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों को अधपके चावल, कड़क रोटियां और बेहद कम मात्रा में खाना परोसा गया।
तारीख : 25 जनवरी
क्या हुआ : कामाख्या-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों को दुर्गंध वाली दाल परोसी गई। हंगामा होने के बाद कैटरिंग स्टाफ ने खुद खाना फेंका।
तारीख : 7 मई
क्या हुआ : 15 रुपए की पानी की बोतल यात्री को 20 रुपए में दी गई। उन्होंने इसकी ऑनलाइन शिकायत की। इसके बाद पैंट्री कार स्टाफ ने यात्री के साथ मारपीट की।
इस तरह की 6645 शिकायतें IRCTC को 2024-25 में मिलीं। अधिकतर मामले मेन्यू से आइटम गायब होने, ओवरचार्जिंग, बासी खाना, खराब खाना, मात्रा कम होने से जुड़े हैं।
दैनिक भास्कर ने पड़ताल कर जाना कि रेलवे के सिस्टम में गड़बड़ कहां है और प्रीमियम ट्रेनों में यात्रियों से एडवांस पेमेंट लिया जा रहा है, फिर अच्छी सर्विस क्यों नहीं मिल पा रही।
हिस्सेदार कौन–कौन हैं
IRCTC : ठेका, निगरानी और कार्रवाई का जिम्मा
टेंडर लेने वाली कंपनियां : खाना बनाने, ट्रांसपोर्ट, सर्व करने का जिम्मा
रेलवे बोर्ड : नीति और सिस्टम में सुधार का जिम्मा
यात्री : पैसा देने के बाद भी अच्छी सर्विस नहीं
यात्रियों के साथ कहां, क्या गड़बड़ी, कौन कसूरवार, पढ़िए…
पहला जिम्मेदार : IRCTC
मोनोपॉली को नहीं रोक रहे, शिकायतों के बाद भी ठेका रद्द नहीं
IRCTC ट्रेन में मील फेसिलिटी प्रोवाइड करने का काम निजी कंपनियों के जरिए करता है। 5 साल के लिए ठेके दिए जाते हैं। परफॉर्मेंस के हिसाब से 2 साल का एक्सटेंशन मिलता है।
राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, वंदेभारत, तेजस जैसी प्रीमियम ट्रेनों के अधिकतर ठेके एक ही कंपनी आरके ग्रुप को दिए गए हैं।
क्लस्टर ए में आने वाली 265 ट्रेनों में से 218 के ठेके आरके ग्रुप के पास हैं। जबकि इस ग्रुप के खिलाफ रेलवे को 2021 से 2024 के बीच 1910 शिकायतें मिलीं।
इसके अलावा क्लासिक कैटर्स के खिलाफ 1439, पी शिवा प्रसाद के खिलाफ 1208, आरके ग्रुप की ही वृंदावन फूड प्रोडक्ट्स के खिलाफ 1196 और एक्सप्रेस फूड सर्विसेज के खिलाफ 1162 शिकायतें मिलीं।
रेलवे की पॉलिसी में सिलिंग लिमिट नहीं होने से एक ग्रुप की मोनोपॉली है, जिससे काम्पीटिशन खत्म हो गया है।
2017 में संसद में पेश की गई CAG की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि, सिलिंग लिमिट न होने से रेलवे ने मोनोपलाइजेशन को प्रमोट किया।
दूसरा जिम्मेदार : ठेका लेने वाली कंपनियां
कई गुना ज्यादा देकर टेंडर लिया, अब कमाई कैसे
किसी भी ट्रेन से सालभर में होने वाली बिक्री के हिसाब से IRCTC उस ट्रेन के लिए एक रिजर्व प्राइज तय करता है।
टेंडर लेने के लिए यह मिनिमम लाइसेंस फीस होती है। यानी इससे कम में टेंडर नहीं मिलेगा। अभी यह 15 फीसदी है।
पड़ताल में पता चला कि, टेंडर लेने की होड़ में कंपनियां 70 फीसदी तक रिजर्व प्राइज जमा कर रही हैं।
जुलाई 2017 में संसद में पेश CAG की रिपोर्ट में भी कहा गया था कि, ‘रेलवे ने कई कैटरिंग ठेके बहुत ज्यादा बोली (लाइसेंस फीस) पर दे दिए, जो व्यवहारिक नहीं थे।’
‘ठेकेदार ठेका पाने के लिए रिजर्व प्राइस से काफी ऊपर बोली लगा रहे थे, लेकिन रेलवे के पास ऐसी ‘अनरियलिस्टिक’ बोली को रोकने का साफ नियम नहीं था।’
‘इसका नतीजा यह हुआ कि वेंडरों पर खर्च का दबाव बढ़ा और उन्होंने खाना घटिया देना, मात्रा कम करना या यात्रियों से ज्यादा पैसा वसूलना जैसे तरीके अपनाए।’
हमारे पास IRCTC का 24 अप्रैल 2024 का लेटर ऑफ अवॉर्ड यानी LOA है। इसमें 10 ट्रेनों का जिक्र है। इन ट्रेनों की कैटरिंग को 8 सितंबर 2026 से 14 जुलाई 2029 तक के लिए आरके ग्रुप से जुड़ी वृंदावन फूड प्रोडक्ट्स को हैंडओवर किया गया है।
रेलवे ने खुद जितनी एनुअल फीस तय की है, उससे 70 फीसदी ज्यादा तक जमा करके टेंडर ले लिया गया है।
ऐसे में सवाल उठता है कि, कंपनी बचे हुए 30 फीसदी अमाउंट में से अच्छा खाना कैसे बनाएगी, स्टाफ को सैलरी और खुद का प्रॉफिट कैसे निकालेगी।
प्रॉफिट निकालने के लिए ठेकेदार ओवरचार्जिंग, मेन्यू से आइटम गायब करना, क्वालिटी से समझौता करते हैं, एक एग्जाम्पल से समझिए
यात्रियों से लूट कैसे…
ट्रेन में आपको मिलने वाली थाली में से एक छोटा सा आइटम गायब करके ही IRCTC के ठेकेदार करोड़ों का मुनाफा बना रहे हैं।
IRCTC ने माना मोनोपॉली से क्वालिटी नहीं मिल रही
IRCTC ने 28 नवंबर 2025 को रेलवे मिनिस्ट्री को एक पत्र लिखकर न्यू कैटरिंग पॉलिसी से जुड़े चैलेंजेस बताए।
इसके पॉइंट नंबर–5 में कहा कि, सिलिंग लिमिट न होने से कुछ फर्म/ कंपनीज के खिलाफ मोनोपॉली की शिकायतें हैं।
ज्यादा लाइसेंस फीस देकर टेंडर लिए गए, इसके चलते अब खाने की क्वालिटी से समझौता कर रहे हैं, साथ ही टेंडर की शर्तों और नियमों का पालन नहीं कर पा रहे।
तीसरा जिम्मेदार : रेलवे बोर्ड
नियम टूट रहे, फिर भी एक्शन नहीं
नीति और निगरानी की मुख्य जिम्मेदारी रेलवे बोर्ड की है। पॉलिसी बनाना, मेन्यू, दरें तय करना, IRCTC की निगरानी, क्वालिटी चेक और शिकायतों पर कार्रवाई का जिम्मा बोर्ड का ही है।
2010 की पॉलिसी में यह नियम था कि, कोई भी कॉन्ट्रेक्टर कुल कॉन्ट्रेक्ट का 10 फीसदी से ज्यादा नहीं ले सकता।
लेकिन बड़े ग्रुप्स ने अलग-अलग नाम से कंपनियां बनाकर इस नियम को ब्रेक कर दिया। 2017 की पॉलिसी में रेलवे ने सिलिंग लिमिट का जिक्र ही नहीं किया, यानी सिलिंग लिमिट हटा दी गई।
रेलवे ने 14 नवंबर 2023 को पॉलिसी से जुड़ी नई जानकारी में कहा कि, ट्रेनों के क्लस्टर और बेस किचन को दो ग्रुप ए और बी में बांटा गया है।
एक क्लस्टर मतलब– कुछ ट्रेनों का एक समूह। एक क्लस्टर में 10 जोड़ी ट्रेन होती हैं। क्लसटर ए में प्रीमियम प्रीपेड ट्रेन और पेंट्री कार वाली मेल/एक्सप्रेस ट्रेन हैं।
कहा गया कि, यदि क्लस्टर में 5 जोड़ी ट्रेनें शामिल हैं तो इसमें मेल/एक्सप्रेस ट्रेन के साथ में एक प्रीमियम प्रीपेड ट्रेन शामिल हो सकती है।
यदि क्लस्टर में 6 से 10 जोड़ी ट्रेनें हैं तो प्रीमियम प्रीपेड ट्रेन की संख्या अधिकतम दो हो सकती है।
लेकिन रेलवे ने खुद ही इस नियम को फॉलो नहीं किया। एक ही कंपनी को एक रूट पर 10 में से 7 प्रीमियम ट्रेनें दे दी गईं।
भास्कर के पास मौजूदा एक रूट के टेंडर में 10 में से 7 प्रीमियम ट्रेनें नजर आ रही हैं। IRCTC ने रेलवे बोर्ड की बनाई पॉलिसी को ही कई बार तोड़ा। इसके बावजूद बोर्ड ने कोई दखल नहीं दिया।
खराब खाने की 6645 शिकायतें
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में बताया कि, 2024-25 में IRCTC को 6645 खराब गुणवत्ता वाले खाने की 6645 शिकायतें मिलीं।
इनमें से 1341 केस में फूड सप्लायर्स पर फाइन लगाया गया। 2995 केस में वॉर्निंग दी गई। 1547 केस में एडवाइजरी दी। 762 केस में अन्य जरूरी कार्रवाई की गई।
IRCTC को सवाल भेजे- भास्कर ने इस पूरे मामले में IRCTC को सवाल भेजे हैं, लेकिन अभी जवाब नहीं आया है। जवाब आते ही खबर में अपडेट किया जाएगा।
हमने आरके ग्रुप के सीईओ और प्रेसीडेंट कैलाश अग्रवाल से भी संपर्क किया। उन्होंने मीटिंग में होने का हवाला देते हुए बाद में बात करने की बात कही।
